Tuesday, May 4, 2021

इंदिरा स्मृति - सफदरजंग बंगला नंबर एक


भारत की राजधानी दिल्ली में। सफदरजंग बंगला नंबर एक।   यह लंबे समय तक आवास रहा देश सबसे शक्तिशाली प्रधान मंत्री,  लौह महिला श्रीमती इंदिरा गांधी का।   यहीं उनका आखिरी वक्त भी गुजरा। यहीं पर 31 अक्तूबर 1984 को उनकी हत्या भी कर दी गई थी।


तो चलिए आज चलते हैं इस बंगले में। देश की राजधानी दिल्ली के लुटियन जोन में बहुत कम बंगले हैं जिसमें आम आदमी का प्रवेश संभव है। पर अब संग्रहालय में तबदील हो जाने के कारण आप इसमें प्रवेश कर सकते हैं। इस बंगले का रिश्ता देश के दो प्रधानमंत्रियों से है।


इंदिरा गांधी के अलावा उनके बेटे राजीव गांधी भी लंबे समय तक इस बंगले में रहे। इसी बंगले में रहते हुए देश के प्रधानमंत्री बने। तो इस बंगले घूमते हुए राजीव गांधी का कक्ष भी देखा जा सकता है। युवावस्था में राजीव अपनी मां के साथ इसी बंगले में रहते थे।  हांलाकि वे पायलट थे पर परिस्थितिवश उन्हें राजनीति में आना पड़ा।


दिल्ली के पृथ्वीराज रोड से चलकर सफदरजंग के मकबरे वाले चौराहे पर पहुंचने पर दाहिनी तरफ का रास्ता सफदरजंग रोड कहलाता है। इसी सड़क पर दिल्ली का प्रसिद्ध जिमखाना क्लब स्थित है। सफदरजंग और अकबर रोड के चौराहे पर ये बंगला नंबर एक स्थित है।

 


इंदिरा गांधी जब पंडित नेहरू के मंत्रीमंडल में मंत्री बनीं तो उन्होने अपने रहने के लिए इस बंगले को पसंद किया। वैसे यह बंगला 1926 के आसपास का बना हुआ है। लुटियन बंगलों की तरह यह आसपास के बाकी बंगलों जैसा ही है। इसमें कुछ खास या कुछ अलग नहीं था। पर मंत्री से प्रधानमंत्री बनने तक इंदिरा गांधी इसी बंगले में रहीं। उन्होंने जीवन भर अपना आवास कभी नहीं बदला।


इस बंगले कई कमरों को संग्रहालय में तबदील कर दिया गया है। यहां प्रवेश करने के बाद 1966 से 1984 के बीच के देश के इतिहास से रुबरू हो सकते हैं। इस दौरान की बड़ी घटनाओं के अखबारों के मुख पृष्ठ की प्रतियां यहां डिस्प्ले किया गया है। 

इंदिरा गांधी ने पहली बार प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली। 1969 में कांग्रेस में विद्रोह हुआ और प्रधानमंत्री को ही पार्टी से निकाल दिया गया। इसके बाद कांग्रेस में विभाजन हुआ। पर बड़े धड़े पर इंदिरा गांधी का कब्जा रहा।   दरअसल सन 1966  से  1984  तक देश का इतिहास इंदिरा युग है।



सन 1971 में पूर्वी पाकिस्तान को आजादी मिलना और बांग्लादेश का गठन होना। इसमें इंदिरा गांधी की बड़ी भूमिका थी। फिर इमरजेंसी का भी दौर आया। 1977 के चुनाव में इंदिरा गांधी को बड़ी हार मिली। सन 1980 में उन्होंने सत्ता में वापसी की। इन सब घटनाओं को आप यहां अखबारों की हेडलाइन में देख सकते हैं।   इंदिरा गांधी को कई बड़े फैसलों के लिए याद किया जाता है। उन्होंने बैंको का राष्ट्रीयकरण किया।   प्रिंसले  स्टेट के राजाओं का प्रिवी पर्स खत्म कर दिया। 

इंदिरा जी का दुनिया महान हस्तियों से पत्रव्यवहार, वार्ताओं और उनसे मिले कुछ स्मृति चिन्हों को भी यहां देखा जा सकता है। इसके अलावा आप इंदिरा जी अध्ययन कक्ष ( पुस्तकालय) उनका डायनिंग रूम और उनका शयन कक्ष भी देख सकते हैं। उस कक्ष भी देख सकते हैं जहां बैठकर वह प्रमुख लोगों के वार्ता किया करती थीं।


सफदरजंग के इस बंगले के लॉन में आगे बढ़ते हुए आप उस स्थल तक पहुंच जाते हैं जहां 31 अक्तूबर 1984 की मनहूस सुबह उनके ही दो सुरक्षा गार्डों ने गोलियां बरसा कर उनकी हत्या कर दी। और एक शक्तिशाली आवाज हमेशा के लिए खामोश हो गई। जिसने कहा था मैं नहीं रहूंगी तो भी मेरे खून का एक एक कतरा इस देश को मजबूती प्रदान करेगा। यहां से चलते हुए बिक्रय केंद्र से पुस्तकें और कई तरह के स्मृति चिन्ह भी खरीद सकते हैं।

- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com

( INDIRA GANDHI, RAJEEV GANDHI,  SAFDARJANG  BANGLAW NO 01 )  


2 comments:

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  2. कमरे में लगे तीनों चेयर बेहद आधुनिक हैं, जोकि किसी भी हाल में उस जमाने के नहीं है खासकर ब्लैक कलर वाले।

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