Sunday, April 4, 2021

गुरुद्वारा रकाब गंज - यहां हुआ था गुरु तेग बहादुर का अंतिम संस्कार

 


दिल्ली के बिल्कुल केंद्र में स्थित है गुरुद्वारा रकाब गंज। यह केंद्रीय सचिवालय के बिल्कुल पास है।   गुरुद्वारा रकाब गंज संसद भवन के नजदीक होने के कारण हाई सिक्योरिटी जोन में रहता है। सिख इतिहास में गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब का काफी महत्व है।


जहां आज गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब स्थित है उसी स्थल पर  सिखों के नौवें गुरु तेग बहादुर जी के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार हुआ था। दिल्ली के चांदनी चौक पर स्थित शीशगंज गुरुद्वारा जहां स्थित हैं वहां गुरु तेग बहादुर शहीद हुए थे ।  तो रकाबगंज गुरुद्वारा में उनका अंतिम संस्कार हुआ था।

 गुरु तेग बहादुर की याद में   गुरुद्वारा रकाबगंज का निर्माण सन   1783   में हुआ था। इसके तैयार होने में कुल   12   वर्षों का समय लगा था। गुरुद्वारे को बनवाने की इजाजत उस वक्त के मुगल शासक शाह आलम द्वितीय ने दी थी।

गुरु तेग बहादुर का औरंगजेब ने साल   1675   में 11 नवंबर को दिल्ली के चांदनी चौक पर क्रूरता से सिर कलम करवा दिया था। उनके सिर विहीन शरीर को व्यापारी लखी राय वंजारा ने चांदनी चौक से बड़ी चतुराई से प्राप्त किया और उसे अपने घर ले आए। कहा जाता है कि वह गुरु जी के शरीर को रुई से लदी गाड़ी में छिपा कर ले गए। उन्होंने गुरू जी का अंतिम संस्कार करने के लिए अपने पूरे घर को ही आग के हवाले कर दिया। तो जहां पर अभी गुरुद्वारा रकाब गंज है वहां लखी राय बंजारा का घर हुआ करता था।


लखी राय वंजारा   की याद -   लखी राय वंजारा   की सिख इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका है। उनका जन्म 4 जुलाई 1580 को हुआ था। उनका निधन 1680 में 100 साल की उम्र में हुआ। लखी राय शाह बंजारा दिल्ली के एक अमीर व्यापारी थे। उनके पास बड़ी संख्या में ऊंट, हाथी, घोड़े और खच्चर हुआ करते थे। वे यादव राजपूत परिवार से आते थे। उनके पुरखे भी सिख गुरुओं में अपार आस्था रखते थे। लखी राय वंजारा ने पंजाब के राजपुरा के पास एक सराय की स्थापना की थी। इस जगह का नाम आज भी सराय वंजारा है।


तो फिर आते हैं गुरुद्वारा रकाब गंज। दिल्ली के गोल डाकघर से केंद्रीय सचिवालय की तरफ चलने पर दाहिनी तरफ गुरुद्वारा का विशाल परिसर नजर आता है। गुरुद्वारा में गुरुघर के अलावा विशाल सत्संग हॉल और लंगर हॉल बना हुआ है। गुरुद्वारा में एक हॉल का नाम लखी वंजारा के नाम पर रखा गया है। गुरुद्वारा रकाब गंज में गुरुग्रंथ साहिब के नीचे गुरु तेगबहादुर की स्मृतियां हैं। यहां आने वाले श्रद्धालु इसके दर्शन करते हैं और शीश झुकाते हैं।


सिख त्योहारों के मौके पर गुरुद्वारा में खूब रौनक रहती है। तब यहां विशेष लंगर लगाए जाते हैं। परिसर में कई बार छोटा मोटा बाजार भी लगा रहा है। यहां पर आप सिख धर्म से जुड़ी स्मृतियां, पुस्तकें, कपड़े आदि प्राप्त कर सकते हैं।


गुरुद्वारा रकाब गंज में इन दिनों दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का मुख्यालय भी स्थित है। यह कमेटी दिल्ली के प्रमुख गुरुद्वारों का कामकाज देखती है। गुरुद्वारा में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के परिसर में निःशुल्क पार्किंग का भी इंतजाम है। वैसे आप यहां पर दिल्ली के किसी भी कोने से डीटीसी की बसों से पहुंच सकते हैं। केंद्रीय टर्मिनल आने वाली हर बस यहां से होकर गुजरती है। 


- विद्युत प्रकाश  मौर्य - vidyutp@gmail.com 

( GURUDWARA RAKABGANJ,  SIKH TEMPLE, YADAV LAKHI RAI VANJARA, GURU TEG BHADUR ) 

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