Saturday, April 24, 2021

क्या संभव है जीरो बजट मे ट्रैवेल

 

क्या शून्य बजट में यात्राएं हो सकती हैं। यह सवाल कई सैर सपाटा से जुड़े हुए साथी पूछ रहे हैं। कुछ का जवाब हां में है तो कुछ का जवाब ना में है। पर मुझे लगता है कि बिल्कुल की जा सकती है जीरो बजट यात्राएं। एक मित्र ने  सवाल किया तो मैंने उत्तर  कुछ यूं दिया - ऐसी यात्राओं के लिए आपको खुद को ईश्वर के हवाले कर देना होगा। 


इसका मतलब कुछ यूं समझिए कि आपकी यात्रा का खर्च दूसरे उठाएं। मांग कर खाएं, लिफ्ट लेकर यात्राएं करें। स्वाभिमान को मार कर भिक्षाटन कर चलते रहें। इससे मन निर्मल होगा। आत्मा पवित्र होगी। और आप धीरे धीरे परिव्राजक बनते जाएंगे। साधुत्व को प्राप्त होंगे। संत ज्ञान मिल जाएगा।


आधुनिक युग में एक शब्द चल रहा है हिचहाइकिंग। मतलब लिफ्ट मांग कर घूमना।  देश में विदेश में कई ऐसे लोग हैं जो हिचहाइकिंग करके घूम रहे हैं। वे लोग सड़क पर खड़े होकर लिफ्ट मांगते हैं। जाहिर कई बार आपको हो सकता है कि घंटों तक लिफ्ट नहीं मिले। 


वैसे देश-विदेश में अपनी कुछ यात्राओं में हमने भी लिफ्ट मांगी हैं। कुछ ऐसे मौके आए जब कोई सार्वजनिक वाहन नहीं मिल रहा था तो ऐसे वक्त में लिफ्ट मांगना भी काम आ गया। पर हिचहाइकिंग भी एक तरह से भिक्षाटन करके घूमने जैसा ही है। कई बार राह चलते जान पहचान  हो जाने पर भी लोग लिफ्ट दे  देते हैं। जैसे भूटान की राजधानी थिंपू में एक इंजीनियर ने हमें अपनी कार में लिफ्ट दे दी थी।


वैसे कुछ समझदार लोग  जीरो बजट ट्रैवेल का  मतलब  ये  लगाते हैं कि  बहुत कम खर्चे में घूमना। इतना ही खर्च करना जितना आप घर में रहने के दौरान  खर्च करते हैं।   जैसे आप घर में रहते हैं तभी आपका खाना नास्ता, मकान किराया  , बिजली बिल आदि में तो खर्च होता ही है।  तो यात्रा में भी उतना ही खर्च करें।

मतलब यात्रा के दौरान आप 200 से 300 रुपये के होटल धर्मशाला में रहने की आदत डालें। कहीं अगर मुफ्त में रहने का मौका मिल जाए तो इसका लाभ उठाएं । किसी शहर में दोस्त रिश्तेदार रहते हों तो उनके घर को ठिकाना बनाएं। 


इस तरह खाने नास्ते में भी बजट कम रखें।  जैसे  गुरुद्वारा या मंदिरों के लंगर में भोजन कर लें। बडे  स्टार होटल में खाने की  जगह स्ट्रीट फूड का आनंद लेते हुए आगे बढ़ते रहें।  खाने के लिए कई संस्थाओं या मंदिरों की रियायती कैंटीन का भी लाभ उठाएं।  इस तरह आप कम खर्च में  सफर जारी रख सकते हैं।


छात्र जीवन में इस तरह का जीरो बजट ट्रैवल का प्लान हमने कई बार बनाया था।   मैं एक परीक्षा देने  भोपाल गया तब अपने मित्र प्रिय अभिषेक अज्ञानी के घर कुछ दिन रुका। इस दौरान रोज लोकल बसों से भोपाल की सैर करता था। इसमें मेरा बहुत कम खर्च आया पर  पूरा भोपाल देख डाला। 


किसी नए शहर में घूमने के लिए अगर छोटा शहर  हो पैदल पैदल ही घूमिए।  अगर बड़ा शहर है तो लोकल बसों का यानी सार्वजनिक परिवहन का सहारा लें।   अगर बसों का दिन भर का पास बनता हो तो उसका लाभ उठाएं। इससे  आप कम खर्च में पूरा शहर देख लेंगें।  दिल्ली में महज 50 रुपये का पास खरीदकर आप दिन भर दिल्ली  में घूम सकते हैं।

- विद्युत प्रकाश मौर्य- vidyutp@gmail.com 

( ZIRO BUDGET TRAVEL ) 

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