Thursday, April 22, 2021

दिल्ली में भी है त्रिपोलिया गेट


कई शहरों में ऐतिहासिक त्रिपोलिया गेट दिखाई देते हैं।  जयपुर में  पटना में इस तरह का नाम मिलता है। दिल्ली में भी इस तरह का त्रिपोलिया गेट मौजूद है। उत्तर पश्चिमी दिल्ली में शक्तिनगर से रूप नगर होते हुए गुड़ मंडी की तरफ जाते हुए ये ऐतिहासिक द्वार नजर आते हैं। यहां पर हमें 200 मीटर के अंतराल पर दो त्रिपोलिया गेट नजर आते हैं।


 त्रिपोलिया गेट दिल्ली के ऐतिहासिक द्वारों में से एक है।   यह त्रिपोलिया गेट अठारहवीं सदी में बना था। 1728-29 में बनवाया गया था। इस पर जो अभिलेख है उससे पता चलता है कि नाजिर महलदार खां ने इसका निर्माण कराया था।    महलदार खान के बारे में तथ्य  यह है कि वह मुहम्मद शाह के शासन काल में वजीर हुआ करता था। 

एक सराय भी थी - दिल्ली करनाल रोड से सब्जी मंडी को जोड़ने वाली सड़क पर एक सराय भी हुआ थी। यह गुड़ की सराय के नाम से जानी जाती थी। इसे मुगल काल में बनवाया गया था। यह ज्यादातर ईटों से निर्मित है। 


घोड़ों का विश्राम गृह - दरअसल त्रिपोलिया गेट का इलाका  मुगलकाल में व्यापारियों के आवाजाही का बड़ा केंद्र हुआ करता था। त्रिपोलिया गेट के पास इससे सटा हुआ एक क्षतिग्रस्त स्मारक नजर आता है। इसे सैनिकों व घोड़ों के विश्राम के लिए बनवाया गया था।


 त्रिपोलिया गेट आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) संरक्षित इमारत है। तेज ट्रैफिक के कारण इस गेट को नुकसान हो रहा था। रात में बड़ी गाड़ियों की वजह से गेट के मेहराब टूट जा रहे थे। इस कारण इसके दो गेट से ट्रैफिक को रोका गया है।


इस  त्रिपोलिया गेट के पास सड़क तो काफी चौड़ी है। पर इसके  आसपास कई  बैंड बाजा कंपनियों के दफ्तर देखे जा सकते हैं। आसपास के लोग लोग यहां पर शादियों में बैंड बाजा बुकिंग के लिए आते हैं। यहां  से थोड़ा आगे बढ़ें तो गुरुद्वारा  नानक प्याउ पहुंच सकते हैं।



पर दिल्ली  का ये ऐतिहासिक दरवाजा उपेक्षा का शिकार है। इसके तीन गेट में  से एक से ही आवाजाही  होती है। बाकी के दो दरवाजों के आसपास अतिक्रमण होने के कारण भी वाहन नहीं जा पाते। 
- विद्युत  प्रकाश  मौर्य  vidyutp@gmail.com
(TRIPOLIA GATE, DELHI, RANA PRATAP BAG, GUR KI MANDI)

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