Sunday, April 18, 2021

दिल्ली का तिलिस्मी किला-मालचा महल

 


दिल्ली के रिज यानी वन क्षेत्र में स्थित मालचा महल किसी तिलिस्म किले जैसा प्रतीत होता है। वैसे तो यह फिरोजशाह तुगलक द्वारा निर्मित चार शिकार महलों में से एक हैपर यहां पहुंचने का रास्ता थोड़ा मुश्किल है। दिल्ली के सबसे पॉश इलाके चाणक्यापुरी में एक सड़क का मार्ग है मालचा मार्ग। यह सड़क सरदार पटेल मार्ग में आकर मिल जाती है। यहीं पर बापूधाम बस स्टाप है। और एक कोने पर हिमाचल सदन है।


मालचा मार्ग को पार करने के बाद दूसरी तरफ आपको जंगल दिखाई देता है। इस जंगल में एक रास्ता जाता हुआ दिखाई देता है। इस रास्ते पर एक बोर्ड लगा है। दिल्ली भू  केंद्र यानी अर्थ स्टेशन का। इसी सड़क पर चलते जाएं। आप अपनी बाइक या साइकिल से अंदर जा सकते हैं। अगर समूह में हैं तो पैदल भी जा सकते हैं। अकेले पैदल जाना ठीक नहीं होगा। क्योंकि रास्ते में बंदरों का आतंक है।  मैं  अपनी बाइक  से जा रहा हूं अकेला।  रविवार की दोपहर का  समय है। 


एक किलोमीटर चलने के बाद बायीं और मुड़ते रास्ते में भू केंद्र दिखाई देता है पर मालचा महल नहीं दिखता। मैं भू केंद्र पर तैनात संतरी के पास जाकर मालचा महल के बारे में पूछता हूं। वह बताते हैं कि आप वापस जाइए। सौ मीटर पीछे एक बैरिकेड दिखाई देगा। उसी के अंदर घुस जाइए। थोड़ी दूर चलिए आप अपनी मंजिल तक पहुंच जाएंगे।


वाकई रास्ते को बैरिकेड लगाकर बंद क्यों किया गया है समझ में नहीं आया। पर इसके अंदर चलकर तकरीबन सौ मीटर ही चलने पर मालचा महल नजर आने लगा। 


तो हम फिरोजशाह तुगलक की चौथी शिकारगाह में पहुंच गए हैं जो अब भी जंगल में ही हैं। उनके तीन शिकारगाह में एक बाडा हिंदुराव अस्पताल में है, दूसरा भूली भटियारी का महल करोलबाग के पास है तो तीसरा कुशक महल तीन मूर्ति भवन के पास है। फिरोजशाह तुगलक ( 1309-1388) ने इसका निर्माण सन 1325 के आसपास करवाया था।

मालचा महल बाहर से भले ही विरान और टूटी फूटी इमारत नजर आती हो पर अंदर से यह काफी बुलंद है। इसकी आंतरिक बनावट अभी भी मजबूत दिखाई देती है। सारे कमरे अच्छी हालत में है। बीच विशाल हॉल है। चारों तरफ से कमरे में रोशनी आने के लिए झरोखे बने हुए हैं। इमारत का निर्माण एक ऊंचे चौबारे पर किया गया है। अब सीढ़ियों से चढ़कर इसकी छत पर चलिए। इसकी छत अभी भी बहुत अच्छे हालत में है। छत से दिल्ली का बडा ही भव्य नजारा दिखाई देता है। चारों तरफ हरे भरे जंगल है। नजर और थोड़ी दूर ले जाएं तो राष्ट्रपति भवन और चाणक्यपुरी की विशाल इमारतें नजर आती हैं।


बेगम विलायत महल का कब्जा रहा – 1985 में इसमें लखनऊ नवाब वाजिद अली शाह के खानदान की बेगम विलायत महल कब्जा करके रहने लगीं। यहां तक न बिजली पहुंची थी न पानी। यहीं पर एक दिन उनका निधन हो गया। मालचा महल में आने से पहले विलायत महल ने लंबे समय तक नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक का वीआईपी वेटिंग रूम कब्जा कर रखा था। पर साल 2017 से इस महल में कोई नहीं रहता। विलायत महल के खानदान के अंतिम व्यक्ति की भी मौत हो चुकी है। जब तक विलायत महल और उनके बेटे प्रिंस अली राजा यहां रहे किसी भी आम आदमी को यहां आने की इजाजत नहीं थी। पर अब लोग यहां पहुंचने लगे हैं।


कुछ लोग मालचा महल को भुतहा मानते हैं तो कुछ इसे दिल्ली  की सबसे डरावनी जगह कहते हैं। पर अभी तक यह महल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के कब्जे में नहीं है। इसलिए इसका रखरखाव नहीं होता। यहां पहुंचने के लिए कोई संकेतक नहीं लगाए गए हैं। रास्ते को बंद रखा गया है। पर हर रविवार को कुछ उत्साही युवा इस महल को देखने के लिए पहुंच ही जाते हैं।

- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 


( MALCHA MAHAL, DELHI, CHANKYAPURI, FOREST, FIROJSHAH TUGLAK ) 

 

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