Monday, April 12, 2021

एक अलग दिल्ली बसती है पहाड़गंज की गलियों में


नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से उतरने के बाद अगर आप प्लेटफार्म नंबर एक की तरफ बाहर आते हैं तो आपका साक्षात्कार पहाड़गंज नामक मुहल्ले से होता है। कभी यहां जरूर पहाड़ रहे होंगे तभी इसका नाम पहाड़गंज पड़ा। नई दिल्ली रायसीना रेंज की पहाड़ियों को काटकर बसी है। इसलिए यहां भी पहाड़ रहे होंगे। पर पहाड़गंज सदियों से अलग अलग जगह से आए लोगों की शरणस्थली रही है। 


पर पहाड़गंज में बड़ी संख्या में पाकिस्तान से आए हुए शरणार्थी लोग रहते हैं। सन 1947 में देश विभाजन के दौरान आए काफी लोग पहाड़गंज में बसे। पर उससे काफी पहले से पहाड़गंज में आने का लोगों का सिलसिला जारी था। यहां पर आज भी मुल्तान क्षेत्र के लोग बड़ी संख्या में हैं। इसलिए आपको यहां पर मुल्तान खानपान की खुशबू मिलती है। मुल्तानी मोठ कचौड़ी का स्वाद आप यहां पर ले सकते हैं।


अब दिल्ली में अनगिनत सपने लेकर आने वाले लोग भी अपना पहला डेरा पहाड़गंज में डालते हैं। क्योंकि नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के सामने इस मुहल्ले में कई सौ छोटे बड़े होटल और गेस्ट हाउस हैं। यहां पर आपको सस्ता डॉरमेटरी लिविंग भी मिल जाता है। तो अब पहाड़गंज की पहचान सस्ते होटलों और गेस्ट हाउस के लिए है। यहां पर आपको 300 रुपये प्रतिदिन से लेकर तीन सितारा होटल तक रहने के लिए मिल जाएंगे।


खरीदारी के लिए आदर्श जगह - पहाड़गंज का बाजार मध्यमवर्गीय खरीदादारों के लिए स्वर्ग जैसा है। यहां आप किताबेंआडियो-वीडियो सीडीसस्ते आभूषणबैगकपड़े  इत्रलकड़ी की मूर्तियों और हस्तशिल्प के सामान खरीद सकते हैं।


रेलवे स्टेशन के करीब होने के कारण यहां के बाजार में सस्ते बैग बेडशीटकुशन-कवर वॉल हैंगिंग आदि भी खूब बिकते हैं। यहां आभूषणों में आर्टिफिशियल नेकलेस, चूड़ियां   हर डिजाइनआकार और रंग में खरीदे जा सकते हैं।

पहाड़गंज के बाजार में देवी-देवताओं के लकड़ी के नक्काशीदार मूर्तियां, ब्रास का सामान और सजावटी वस्तुएं भी खरीदी जा सकती हैं। वहीं सुगंधित अगरबत्तियांधूप और थोक भाव में चाय पत्ती आदि भी खरीद सकते हैं।


मूर्तिकारों की गली – पहाड़गंज के एक इलाके का नाम है संगतराशन। दरअसल इस गली में कभी बड़ी संख्या में मूर्तिकार रहते थे। इसलिए इस गली का नाम संगतऱाश के नाम पर पड़ा। अभी भी नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से नबी करीम की ओर जाते समय रामनगर में आप मूर्तियों की बड़ी बड़ी दुकानें देख सकते हैं।

पहाड़गंज खाने पीने के लिए आदर्श जगह है। मुख्य सड़क पर छह टूटी चौक के आसपास स्ट्रीट फूड का आनंद लिया जा सकता है। बड़ी संख्या में राजस्थान के लोग इधर खाने-पीने के स्टाल लगाते हैं। एक चित्तौड़गढ़ के युवा यहां पर टमाटर और चना सूप की दुकान लगाए दिखाई दिए। उनके चना सूप का स्वाद काफी अच्छा है।


पहाड़गंज पर फीचर फिल्म - साल 2019 में पहाड़गंज नाम से एक फीचर फिल्म भी बनी। इसमें अभिनेत्री अपने प्यार केतलाश में हिंदुस्तान आती है। वह पहाड़गंज की गलियों में खाक छानती है। लौरा कोस्टा और राकेश रंजन की दिल्ली की पृष्ठभूमि पर बनी यह एक बेहतरीन फिल्म है। पहाड़गंज की गलियों में प्रवेश करने के लिए रामकृष्ण मार्ग मेट्रो स्टेशन सबसे मुफीद है।

- विद्युत प्रकाश मौर्य -vidyutp@gmail.com 

( PAHARGANJ, NEW DELHI, RAM KRISHNA ASHRAM MARG) 



No comments:

Post a Comment