Thursday, April 8, 2021

पहली पातशाही द्वारा स्थापित हुआ गुरुद्वारा नानक प्याउ


पश्चिमी दिल्ली के अशोक विहार के करीब प्रताप बाग में स्थित है गुरुद्वारा नानक प्याउ। इस गुरुद्वारे का संबंध प्रथम पातशाही गुरुनानक देव जी से है। जब
1505 में गुरु   नानक   देव जी पहली बार दिल्ली आए थे, तब उन्होंने इस   गुरुद्वारे    की स्थापना की थी।   
इस तरह से यह दिल्ली का सबसे प्राचीन गुरुद्वारा है।

तब दिल्ली में सिकंदर लोदी का शासन हुआ करता था। इसी दौरान श्री गुरु नानक देव जी का जब दिल्ली में आगमन हुआ तो वह जीटी रोड के पास सब्जी मंडी के बाहर एक बाग में रुके। यहां बाग में एक कुआं हुआ करता था। गुरू जी अपने शिष्य मरदाना के साथ यहां कीर्तन करते। इस दौरान जो भी चढ़ावा आता था वे उसे यहां आनेवाले राहगीरों में बांट देते। जीटी रोड के पास होने के कारण यहां राहगीरों का आना जाना लगा  रहता था। 


बाग में स्थित कुएं के पानी से राहगीरों के लिए एक प्याउ की स्थापना की गई। प्याउ के साथ ही लंगर की भी शुरुआत की गई। गुरुनानक देव जी जब तक यहां पर रहे वे हिंदू और मुस्लिम दोनों कौम के लोगों में सम्मान पाते रहे। कहा जाता है अपनी दिल्ली प्रवास के दौरान उन्होंने एक मरे हुए हाथी को अपने प्रताप से जीवित कर दिया था।


यह बात जब बादशाह को पता चली तो वह गुरु के प्रताप से चकित हो गया। कुछ दिन बाद बादशाह का भी एक हाथी मर गया। उसने गुरुनानक देव जी को उस हाथी को भी जिंदा करने को कहा, पर गुरु जी ने ऐसा करने से मना कर दिया।    गुरुनानक देव जी के समय से यहां प्याउ और लंगर की जो परंपरा चली वह अभी तक कायम है। इसलिए यहां स्थापित गुरुद्वारे का नाम ही नानक प्याउ पड़ गया।


गुरु जी के समय के कुआं को यहां आज भी देखा जा सकता है। श्रद्धालु उस पवित्र कुआं का दर्शन करते हैं और इसके जल को ग्रहण करते हैं। काफी लोग इसके जल को अपने साथ प्रसाद के तौर पर ले भी जाते हैं। अब यहां पर विशाल गुरुद्वारा का निर्माण किया गया है। इस गुरुद्वारा में आने वाले श्रद्धालुओं के वाहनों के लिए अंडरग्राउंड विशाल पार्किग उपलब्ध है। गुरुद्वारा के मुख्य भवन के अलावा विशाल लंगर हॉल बना हुआ है।


नानक प्याउ गुरुद्वारा परिसर में एक विशाल सरोवर भी है। दिल्ली में गुरुद्वारा बंगला साहिब के बाद यह दूसरा गुरुद्वारा है जहां पर सरोवर भी है। इस गुरुद्वारा का प्रबंधन दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंध समिति देखती है। इस गुरुद्वारा में हर रोज 5 से 10 हजार लोग लंगर छकते हैं। गुरुपरब और अन्य त्योहारों के मौके पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।


गुरुद्वारा नानक प्याउ की ओर से कई सामाजिक कार्य भी संचालित किए जाते हैं। गुरुद्वारा की ओर से मेडिकल डिस्पेंसरी का संचालन किया जाता है जहां पर लोगों को मुफ्त दवाएं और डॉक्टर की सलाह प्राप्त होती है। इसके अलावा गुरुद्वारा कमेटी द्वारा बच्चों के लिए स्कूल और मैरेज हॉल का भी संचालन किया जाता है।


कैसे पहुंचे – गुरुद्वारा नानक प्याउ दिल्ली के राणा प्रताप बाग में स्थित है। यह अशोक विहार, रुप नगर, शक्तिनगर, मॉडल टाउन और आजादपुर के निकट स्थित है। मेट्रो रेल का निकटतम स्टेशन आजादपुर हो सकता है।

-         विद्युत प्रकाश मौर्य – vidyutp@gmail.com 

  ( GURUDWARA NANAK PAYAU, WATER, DELHI ) 


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