Wednesday, March 3, 2021

नारायणी नदी पर सबसे पुराना और सुंदर घाट - सीढ़ी घाट


हाजीपुर के कौनहारा घाट के आसपास का इलाका ऐतिहासिक तौर पर साधुओं के मठ और ऋषिओं की तपस्थली रही है। कौनहारा घाट से थोड़ा उत्तर चले तो कौशल्या घाट पड़ता है। इसके पास पुराना हजुरी मठ है। इससे भी थोड़ा उत्तर चलें तो सीढ़ी घाट आता है। हाजीपुर मे नारायणी नदी पर सबसे पुराना और सुंदर घाट है सीढ़ी घाट। इस सीढ़ी घाट के साथ हमारी असंख्य स्मृतियां जुड़ी हुई हैं। कई साल हमलोगों ने परिवार के साथ इस घाट पर आकर छठ पर्व में हिस्सा लिया है।

आजकल नमामि गंगे परियोजना के तहत हाजीपुर में नारायणी नदी के तट पर पक्के घाट बनाने का सिलसिला जारी है। पर सीढ़ी घाट हाजीपुर का सबसे पुराना पक्का घाट है। लाल रंग का सुंदर प्रवेश द्वार। इसके बाद पानी तक उतरने के लिए पक्की सीढ़ियों के कारण इस घाट का नाम सीढ़ी घाट पड़ा है। इसी घाट पर बायीं तरह विशाल तिसीऔता कांप्लेक्स है। इसमें मेरे पिता जी के दोस्त कामेंद्र मोहन का आवास है। आज उनसे कई सालों बाद मिलना हुआ।


दरअसल सीढ़ी घाट का निर्माण वैशाली जिले क पातेपुर प्रखंड के तिसिऔता ग्राम के जमींदार परिवार के द्वार कराया गया था। सीढ़ी घाट पर बने प्रवेश द्वार पर बीच में इसके निर्माण का वर्ष अंकित है। सन 1940 ईस्वी। नाम लिखा है – श्याम सुंदर घाट। हालांकि लोग इसे सीढ़ी घाट ही कहते हैं।


सीढ़ी घाट की दीवारों पर कुछ सुंदर म्युरल बनाए गए हैं। बंसी बजाते हुए कान्हा, राम भक्त हनुमान। प्रथम पूज्य श्री गणेश, मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामज का दरबार, अशोक वाटिका में सीता और हनुमान आदि तस्वीरें इस घाट पर देखी जा सकती हैं। दीवारों पर राम धुन अंकित की गई है – रघुपति राघव राजा राम। पतित पावन सीताराम। जय रघुनंदन जय घनश्याम।  घाट की दीवारों पर लिखी इबारत में लोगों को यहां आने और सभी सुख पाने की कामना की गई है। घाट के दोनों तरफ दो सुंदर झरोखे बने हैं जहां से आप नदी की जल धारा का नजारा कर सकते हैं। घाट पर महिलाओं के लिए स्नान के बाद वस्त्र बदलने के लिए कमरे का भी निर्माण कराया गया है।


दूसरी तरफ लिखा गया है – श्री गंगा के करकमलों में यह घाट समर्पित है भाई, आप सभी के चरणों में इसलिए विनय करता हूं,  स्नान करें जलपान करें। पर ध्यान धरें श्री ठाकुर जी का...

भाव यह है कि घाट का निर्माण का आमजन की सुविधा के लिए करवाया गया था। कुछ साल पहले कामेंद्र मोहन जी के प्रयासों से इस घाट पर गंगा आरती की शुरुआत की भी गई। देवोत्थान एकादशी के मौके पर 2019 में यहां भव्य आरती का आयोजन किया गया।

सीढ़ी घाट से सामने नजर दौड़ाएं तो नारायणी नदी के उस पार सोनपुर का मेला क्षेत्र नजर आता है। दाहिनी तरफ नजर ले जाएं तो ब्रिटिश काल बना हुआ आईकोनिक रेल सह सड़क पुल नजर आता है।


अब नमामि गंगे परियोजना के तहत पक्के घाट और रेलिंग का निर्माण भले ही कराया जा रहा हो पर सीढ़ी घाट जैसे सुंदर और सुरूचिपूर्ण घाट का निर्माण आज के दौर में मुश्किल है। यह हमारे पुरखों की सुंदर विरासत है, जिसपर सारा शहर गर्व करता है। सीढ़ी घाट पर कुछ वक्त गुजारने के बाद लंबे समय बाद श्री कामेंद्र मोहन चाचा जी के सानिध्य में थोड़ा वक्त गुजारने का अवसर प्राप्त हुआ। उनके घर सुस्वादु नास्ते के बाद मैं चला पड़ा आगे की ओर।

-         विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 

( ( SIDHI GHAT, SHYAM SUNDER GHAT, HAJIPUR ) 

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