Monday, March 29, 2021

रजत जयंती वर्ष की एक यादगार शाम


उजाले अपनी यादों को हमारे साथ रहने दो,  न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए...कुछ हसीन यादें सफर का पाथेय होती हैं।  वे ऊर्जा दे जाती हैं।  मौका अगर खास हो तो कहना ही क्या।   तो ऐसा ही एक मौका था 28 फरवरी 2021 का।  हम लोग जिस  संस्थान से पढ़कर निकले  थे  जीवन पथ पर संघर्ष करने, वह एक बार फिर बुला रहा था।   मौका था रजत जयंती वर्ष का। इस शाम को यादगार बनाने हमारे 11 साथी दुबारा मिले। वैसे तो हमारी कक्षा में कुल 37 लोग थे। उनमें से 30 लोग संपर्क में हैं। पर कई लोग नहीं पहुंच सके।



भारतीय जन संचार संस्थान यानी इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन के 1995-96 सत्र के हिंदी पत्रकारिता पाठ्यक्रम में हम काशी हिंदू विश्वविद्यालय से कुल पांच लोग चयनित होकर पहुंचे थे। मैं विद्युत प्रकाश मौर्य, मोहनीश मोनी, राजीव रंजन झा, ब्रजेश कुमार सिंह और दयाशंकर गुप्ता। 


यहां आकर कई और नए दोस्त मिले। संतोष कुमार दूबे, अमिष श्रीवास्तव, सुनील कुमार झा, प्रेम प्रकाश, बिनय सौरभ, नलिन कुमार, नलिनी रंजन, आनंद प्रकाश सिंह, अनिल कुमार सिंह, प्रमोद कुमार राउत, इरशादुल हक, सैय्यद शादाब मुज्जतबा, राकेश कुमार सिंह, मनोज कुमार खारी, अजय नंदन, नीरज कुमार, प्रमोद कुमार प्रीतम संपर्क में हैं। पांच छात्राएं भी थी हमारी कक्षा में रश्मि किरण, रश्मि अस्थाना, मधु पासवान, सीमा पठानिया और सुशीला कुमारी। अजेय कुमार, सर्वेश कुमार, भगत राम, योगेश कुमार से संपर्क नहीं हो सका है।


कुछ दिनों पहले आईआईएमसी एलुमिनाई एसोसिएशन से रितेश भाई और साधना का फोन आया कि आपके बैच के 26 साल हो गए हैं और इस बार के मीट में रजत जयंत उत्सव पर आप सबको सम्मानित किया जाएगा। स्मारिका में आप सबका परिचय भी प्रकाशित होगा। रजत जयंती सम्मेलन मे हिंदी पत्रकारिता के अलावा हमारे सत्र के अंग्रेजी पत्रकारिता, विज्ञापन एवं जनसंपर्क, अंग्रेजी पत्रकारिता ढेंकानाल परिसर के कुछ छात्र भी पहुंचे थे। 


इन 25 सालों में सबके पास अपनी अपनी उपलब्धियां थी। कुछ लोग पत्रकारिता में शीर्ष पदों पर जा पहुंचे हैं तो कुछ पत्रकारिता से इतर क्षेत्रों में भी झंडे गाड़ रहे हैं। उन सब पुराने दोस्तों से मिलना उनके साथ कुछ घंटे गुजारना बहुत नई ऊर्जा से लबरेज करता है। 


कुछ साल पहले हम हिंदी पत्रकारिता के मित्रों ने दिल्ली हाट में मिलने का कार्यक्रम रखा था तब कुल 23 लोग वहां पहुंच गए थे। वह मिलन भी बड़ा यादगार रहा था। इस बार के समारोह में आईआईएमसी के महानिदेशक संजय द्विवेदी ने सभी साथियों को सम्मानित किया। सम्मान में हमें गमछा, दो बैग, दो टी शर्ट आदि यादगारी के स्वरूप में मिले। यहां पर हमारी मुलाकात प्रोफेसर गोविंद सिंह जी से भी हुई। वे हमारे सत्र में हमें पढ़ाने आते थे। तब वे नवभारत टाइम्स में संपादकीय पृष्ठ पर हुआ करते थे। इन दिनों वे आईआईएमसी में डीन अकादमिक के पद पर आ गए हैं। 



हम सभी लोगों को मंच से अपने अनुभव साझा करने का भी मौका मिला। इस दौरान हमारे साथी संतोष कुमार दूबे ने कहा, 25 साल तो धरती पर कई जीवों की कुल उम्र भी नहीं होती। हम अपने शिक्षण संस्थान से निकले की रजत जंयती मना रहे हैं। यह बड़ा गर्वान्वित करता है। 


पर आईआईएमसी के अंगरेजी पत्रकारिता की शुरुआत 1970-71 बैच से हुई थी। इस बैच के एक टिक्कू साहब भी यहां आए हुए थे। उनसे मिलना बड़ा सुखद रहा। इस उम्मीद के साथ हम अपने अपने घर को रवाना हुए कि जिंदगी रही तो हम भी स्वर्ण जयंती वर्ष में फिर मिलेंगे। सब्बा खैर...

विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 

( IIMC, HINDI JOURNALISM, SILVER JUBLEE MEET ) 



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