Saturday, March 27, 2021

सौराठ सभा - मिथिला क्षेत्र की अनूठी पंरपरा


आजकल वर-वधु की तलाश करनी हो तो लोग अखबारों के मेट्रोमोनियल पेज या ऐसी वेबसाइट का सहारा लेते हैं। पर आपको पता है कि बिहार के मिथिला में योग्य वर की तलाश के लिए एक अनूठी परंपरा सदियों से चली आ रही है। हम बात कर रहे हैं सौराठ सभा की। हालांकि हाल के सालों में उसकी लोकप्रियता पहले जैसी नहीं रही। 


बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र में अनूठी परंपरा का नाम है सौराठ सभा। यह हर साल लगने वाली एक विशाल सभा है। इस सभा में योग्य वर का चयन वहां आए कन्याओं के पिता करते हैं। सौराठ सभा मधुबनी जिले के रहिका प्रखंड के सौराठ नामक गांव में लगती है। इसका दायरा  22 बीघा जमीन फैला हुआ है। इसे सभागाछी के नाम से भी जाना जाता है।


सौराठ सभा अतीत में मैथिल ब्राह्मणों के लिए वरदान हुआ करती थी। शादी के लिए इच्छुक वर व वधू के घरवाले जुटते थे। आषाढ़ में लगने वाली इस सभा में देश-विदेश से बड़ी संख्या में ब्राह्मण पहुंचते थे। यहीं वैवाहिक संबंध तय होते थे। इस सभा में बिना तामझाम और दहेज के शादियां होती थी।


अनूठी पंजी प्रथा सौराठ सभा में वंश परिचय को लिपिबद्द करने वाली अनूठी पंजी प्रथा सदियों से चली आ रही है। यहां पर सिद्धांत प्रथा के तहत वर-वधू के वंश वृक्षों का मिलान किया जाता है। इसमें सात पीढिय़ों तक देखा जाता है कि गोत्र और मूल नहीं मिल पाएं। इसके बाद ही शादी की अनुमति दी जाती है। यह पंजी प्रथा आज भी  चालू है। अब पंजीकार हाईटेक हो गए हैं। उनके पास मोबाइल  फोन और कंप्यूटर भी हैं। 


चौदहवीं सदी में हुई शुरुआत - इस सभा की शुरुआत 1310   ईस्वी में हुई थी। शुरुआती दौर में पंजी प्रथा का प्रचलन नहीं था। लोग छिटपुट रूप से वंश परिचय रखते थे। वैवाहिक निर्णय स्मरण के आधार पर किए जाते थे। बाद में राजा हरिसिंह देव के समय में पंजी प्रबंधन की शुरुआत हुई। पंजीकार लोगों का वंश परिचय लिखित रूप से रखने लगे। बाद में यहां लोगों के रहने के लिए कमरे बनाए गए। सभा गाछी के पास एक विशाल सरोवर का निर्माण हुआ। धीरे-धीरे सौराठ सभा की ख्याति बढ़ने लगी।


 
हमारे साथी और मिथिला के प्रसिद्ध सरीसब पाही ग्राम के निवासी यज्ञनाथ झा कहते हैं कि सौराठ सभा का उद्देश्य दहेज मुक्त विवाह था। यह मिथिला के सामाजिक तानाबाना का लोकप्रिय नमूना हुआ करता था। सौराठ सभा को लेकर कई तरह की किवंदंतियां भी हैं। कहा जाता है कि जब इस सभा में कई हजार मैथिल ब्राह्मण के साथ जुट जाते थे तो पास के विशाल वृक्ष के सारे पत्ते झुक जाते थे।

सौराठ सभा के बारे में हमने पहली बार बिहार के स्कूल के पाठ्य पुस्तकों में पढ़ा था। इस बार की मुजफ्फरपुर यात्रा में वरिष्ठ पत्रकार और दैनिक भास्कर मुजफ्फरपुर के संपादक कुमार भावानंद जी से मुलाकात में इस सभा की परंपरा को हमने याद किया। वे हाल में सभा गाछी का दौरा करके लौटे थे। 

हालांकि अब सौराठ सभा पहले जैसी नहीं होती । ज्यादा पढ़े लिखे और संपन्न लोग अब इस सभा में आने में  रुचि नहीं दिखाते।  इसलिए सभा की लोकप्रियता में कमी आई है। कोरोना महामारी के कारण साल  में 2020 में सभा  का आयोजन नहीं हो सका।  पर इस तरह की अनूठी पंरपराओं को सहेज कर रखे जाने की जरूरत है।

- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 

( SAURATH SABHA, MITHILA, VIVAH, SABHA GACHHI, MADHUBANI, BIHAR ) 

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