Tuesday, March 23, 2021

मिलिए लालू प्रसाद यादव के इस अनूठे प्रशंसक से


कन्हौली में मैं अपने बचपन के दोस्त संजय कुमार की कपड़े की दुकान पर बैठा था कि एक टाटा नैनो कार आकर रूकी। इस कार की छत पर दो विशाल लालटेन लगे थे। चारों तरफ राष्ट्रीय जनता दल का चुनाव चिन्ह लालटेन चस्पा था। इस कार को ड्राईव कर रहे थे नटवर राय। वे निकल कर दुकान पर आए। पास के मानपुरा गांव के रहने वाले नटवर राजद और लालू प्रसाद यादव के अनूठे प्रशंसक हैं।

 उनकी कार पर लालटेन को देखकर कोई पुलिस वाला ट्रैफिक वाला उनसे कुछ नहीं पूछता। वे कहते हैं जिस दिन लालू प्रसाद जेल से बाहर आएंगे उस दिन ही मैं अपना जन्मदिन मनाऊंगा। लालू प्रसाद की तारीफ में वे अपने अंदाज में कई तरह से कसीदे पढ़ते हैं। राजनेताओं के ऐसे भक्त आपको बिहार में ही मिल सकते हैं। भले  ही लालू यादव और उनकी पार्टी  सत्ता में नहीं है लेकिन जनता के बीच उनकी धमक कायम है। 


पटना से दिल्ली 10 घंटे में   -    कन्हौली से पटना की राह पर हूं। कन्हौली के बाद रानीपोखर आया। उसके बाद बिरना लखन सेन। फिर बेलकुंडा। इसके बाद सेंदुआरी गांव फिर दिग्घी कलां फिर हाजीपुर। दिग्घी कलां में मुजफ्फरपुर से आने वाला नेशनल हाईवे महुआ की तरह आ रही सड़क से मिल जाता है। दिग्घी में रेलवे फ्लाईओवर बन जाने से सफर पहले से आसान हो गया है। महात्मा गांधी सेतु पर आज फिर जाम नहीं मिला।


शाम को राजेंद्र नगर से मेरी ट्रेन है दिल्ली के लिए। यह संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस ही है पर स्पेशल के नाम से चल रही है। मेरा वेटिंग टिकट कनफर्म हो चुका है। मैं राजेंद्र नगर स्टेशऩ पहुंचने पर देख रहा हूं कि यहां बैग सेनेटाइज करने के लिए मशीन लगी है। प्रति बैग 10 रुपये वसूले जा रहे हैं। दिल्ली मेट्रो में यह काम फ्री में हो रहा है। रेलवे स्टेशन में प्रवेश करते समय सबको मास्क लगाने को कहा जा  रहा है। पर पूरे बिहार में कई जिलों से गुजरते हुए मुझे कहीं कोई मास्क लगाए नहीं दिखाई दिए लोग। 


कोरोना काल में भी बड़े बेतकल्लुफ हो चुके हैं बिहार के लोग। पर रेलवे स्टेशन पर आने पर सावधानी दिखाई दे रही है। मेरी ट्रेन प्लेटाफार्म नंबर दो पर है। अपने सीट पर आकर लेट गया हूं। अब एसी में भी कंबल नहीं मिल रहा है। तो अपना कंबल लेकर चलना पड़ रहा है। ट्रेन ठीक 7.15 बजे राजेंद्र नगर से चल पड़ी है। पटना जंक्शन पर 5 मिनट के ठहराव के बाद वहां से भी 7.50 में चल पड़ी। दीनदयाल नगर ( मुगल सराय ) में ट्रेन एक घंटे से ज्यादा  पहले पहुंच चुकी है। यहां प्लेटफार्म नंबर सात पर ट्रेन डेढ़ घंटे आराम फरमाती रही।


अगली सुबह सात बजे से पहले हमारी ट्रेन नई दिल्ली जंक्शन को छू रही थी। यानी 11 घंटे में पटना से दिल्ली। अगर मुगलसराय का डेढ घंटा घटा दें तो दस घंटे से कम का सफर रहा। राजधानी एक्सप्रेस से भी कम समय में। अगर पटरियों पर ज्यादा रेलगाड़ियों का बोझ नहीं हो तो यह संभव है। 


यानी हमें बुलेट ट्रेन की कोई खास जरूरत नहीं अगर समान्य ट्रेनें ही समय से चलने लगें और उनकी गति में थोड़ा इजाफा हो जाए। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बन जाने के बाद में मुख्य रेल लाइन से मालगाड़ियों का दबाव कम हो जाएगा तो मेल एक्सप्रेस ट्रेनों को खाली ट्रैक मिल सकेगा। साथ ही इनकी गति में इजाफा होगा। पटना से दिल्ली 1000 किलोमीटर है। यह दूरी महज आठ घंटे में तय हो सकती है। इसमें हमारे वर्तमान लोकोमोटिव (इंजन) और डिब्बे ही सक्षम हैं।

- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com  

( PATNA TO DELHI, SAMPOORN KRANTI EXP) 

 


4 comments:

  1. लालू प्रसाद यादव के यह प्रशंसक रोचक हैं। रही मास्क की बात तो कुछ दिनों पहले गुडगाँव था और अब देहरादून हूँ लेकिन मास्क को लेकर दोनो ही जगह के लोगों को उदासीन देखा। खैर, आपका यह सफर रोचक रहा। दिल्ली में स्वागत है।

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