Wednesday, March 17, 2021

वैशाली के ऐतिहासिक हिंदू मंदिर – चतुर्मुख महादेव


वैशाली का महत्व सिर्फ बौद्ध और जैन तीर्थ स्थलों के लिए ही नहीं है, बल्कि यहां पर कई ऐतिहासिक हिंदू मंदिर भी हैं। विशाल गढ़ के अवशेष के दूसरी तरफ एक किलोमीटर की दूरी पर चौमुखी महादेव मंदिर स्थित है। इसका शिवलिंगम अदभुत है। यह मंदिर कमन छपरा ग्राम में स्थित है। इसे गुप्तकालीन बताया जाता है।

 इस मंदिर के शिवलिंग में ब्रह्मा, विष्णु, महेश और सूर्य की आकृतियां एक साथ देखी जा सकती है। मंदिर के बाह्य भवन को नया रंग रूप प्रदान किया गया है। पर इसका शिवलिंगम काफी पुराना है। इस तरह का शिवलिंगम विश्व में कहीं भी अन्यत्र नहीं है। काले पत्थरों की बनी यह अदभुत कृति है।


मंदिर के आसपास का वातावरण काफी मनोरम है। सावन माह की सोमवारी को इस मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। इस मंदिर का नाम श्री विक्रमादित्य चतुर्मुख महादेव धाम रखा गया। वैशाली से मंदिर की ओर जाने वाले मार्ग पर लगे बोर्ड पर इसका नाम यही लिखा गया है।

वैशाली के इतिहास के जानकार डॉक्टर अतुल कुमार सिंह कहते हैं कि वैशाली नगर के चार कोनों पर चार प्राचीन शिव मंदिर स्थापित किए गए थे। इनमें से तीन मंदिरों की खोज अभी बाकी है। कोल्हुआ के अशोक स्तंभ और स्तूप को 1958 की खुदाई में प्राप्त किया गया था। यह माना जाता है कि नारायणी नदी के किनारे स्थित वैशाली को कई बार नदी में आई बाढ़ का कोपभाजन बनना पड़ा होगा। इस क्रम में वैशाली की कई ऐतिहासिक स्मारक अभी जमीन के अंदर दबे हुए हो सकते हैं। साल 2020 में आई बाढ़ का पानी भी कोल्हुआ के ऐतिहासिक स्मारकों और केसरिया के बौद्ध स्तूप तक पहुंच गया था।

 

 

पद्मश्री केडी दीवान की याद – वैशाली पहुंचने पर मुझे पद्मश्री केडी दीवान की याद आई। दीवान साहब का वैशाली जिले में बहुत सम्मान था। वैसे तो हरियाणा के नीलोखेडी के रहने वाले थे पर उन्होंने वैशाली को अपना कार्यक्षेत्र बनाया। यहां पर उन्होंने छोटे किसानों को खेती किसानी का प्रशिक्षण देने के लिए संस्थान की स्थापना की।

 सन 1971 में स्थापित उनकी संस्था वैशाली एरिया स्माल फार्मर्स एसोसिएशन ( वास्फा) आज भी किसानों की मददगार बनी हुई है। उनके कार्यो का सम्मान देने के लिए सन 1986 में भारत सरकार द्वारा उन्हें पद्मश्री से नवाजा गया। 

कृष्णदेव दीवान का जन्म 22 फरवरी 1918 को पाकिस्तान के डेरा गाजी खान में हुआ था। वे कृषि स्नातक थे। स्वतंत्रता के बाद उनका परिवार हरियाणा में आकर रहने लगा। वे जब सत्तर के दशक में बिहार आए तो वैशाली के ही होकर रह गए। 


हाजीपुर में नेहरु युवा केंद्र की सलाहकार समिति की बैठक में दीवान साहब से दो बार मेरी मुलाकात हुई थी। पहली मुलाकात में मैंने उन्हें अपना विजिटिंग कार्ड दिया था। जब वे जिलाधिकारी कक्ष में दूसरी बार की बैठक में आए तो मेरा कार्ड संभाल कर रखा था और मुझसे बातें करने के लिए मुझे तलाश रहे थे। दीवान साहब 27 सितंबर 2002 को इस दुनिया को छोड़ कर चले गए। उस महान आत्मा को नमन।


वैशाली जिले में जुगाड़ वाहन – वैशाली की सड़कों पर इस बार मुझे जुगाड़ वाहन भी चलते हुए नजर आए। मैंने एक जगह रोककर इस मालवाहक जुगाड़ के बारे में दरिआफ्त की। किसान ने बताया कि पुराने विक्रम के इंजन का इस्तेमाल करके ये वाहन तैयार किया गया है। खूब शानदार फर्राटा भरता है।

-         विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com

( ( VAISHALI SHIVA TEMPLE, CHATURMUKH MAHADEV, KD DIWAN ) 



 

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