Saturday, March 13, 2021

बासोकुंड – भगवान महावीर की जन्मस्थली


वैशाली में कोल्हुआ से थोड़ा पहले सड़क दो हिस्सों में बंटती दिखाई देती है। एक रास्ता कोल्हुआ की ओर चला जाता है तो दूसरा रास्ता बासोकुंड की ओर। थोड़ी दूर सड़क पर चलने पर दाहिनी तरफ बासोकुंड ग्राम का प्रवेश द्वार नजर आता है। इस प्रवेश द्वार से लगभग एक किलोमीटर अंदर जाने पर महावीर स्वामी की जन्मस्थली में आप पहुंच जाते हैं। यहां पर एक विशाल मंदिर का निर्माण कराया गया है। मंदिर से पहले वाहनो के लिए एक निजी पार्किंग भी है।  


वैशाली जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी की जन्मस्थली है। इसलिए यह जैन धर्म का भी पवित्र तीर्थ है। महावीर स्वामी की जन्मस्थली बासोकुंड में है। इसका पुराना नाम कुंडग्राम हुआ करता था। देश भर से जैन श्रद्धालु इस पवित्र भूमि के दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं।


महावीर   स्वामी का जन्म इच्छवाकु वंशीय राजा सिद्धार्थ और रानी त्रिशला के घर 599 ईसा पूर्व हुआ था। इस तरह वे बुद्ध के समकालीन थे। इनके पिता राजा सिद्धार्थ ज्ञातृक कुल के सरदार थे और माता त्रिशला लिच्छिवी राजा चेटक की बहन थीं। वे ज्ञातृ वंश के थे। उनका गोत्र था कश्यप।  


श्वेतांबर परंपरा के अनुसार उनका विवाह भी हुआ था। महावीर की पत्‍नी का नाम यशोदा और पुत्री का नाम अनोज्जा प्रियदर्शनी था। हालांकि दिगंबर परंपरा उन्हे  ब्रह्मचारी मानता है। काल खंड के हिसाब से बुद्ध के समकालीन ही थे। तीस वर्ष की आयु में महावीर ने संसार से विरक्त होकर राज वैभव त्याग दिया। वे संन्यास धारण कर आत्मकल्याण के पथ पर निकल पड़े।



महावीर स्वामी को 42 वर्ष की आयु में महावीर स्वामी को जुम्भियग्राम के निकट ऋजुपालिका नदी के तट पर साल वृक्ष के नीचे कैवल्य (सर्वोच्च ज्ञान) प्राप्त हुआ।  पावापुरी में 72 वर्ष की आयु में उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई।   महावीर स्वामी की जन्मस्थली पर सफेद रंग के भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया है।


महावीर  स्वामी के जन्मस्थली पर बने मंदिर की संरचना वृताकार है। दो मंजिले इस मंदिर की प्रथम मंजिल पर गर्भ गृह के अंदर श्वेत रंग की महावीर स्वामी की विशाल प्रतिमा है। मंदिर का निर्माण भगवान महावीर स्मारक समिति द्वारा करवाया गया है। मंदिर परिसर में जगह जगह जैन धर्म के संदेश लिखे गए हैं। इस मंदिर का निर्माण कार्य अभी भी जारी नजर आ रहा है। इसे और भी भव्य रूप प्रदान किया जा रहा है।


बिहार में महावीर स्वामी के जीवन से जुड़े दो प्रमुख तीर्थ स्थल हैं वैशाली महावीर स्वामी की जन्म स्थली तो पावापुरी उनकी निर्वाण स्थली। देश भर से जैन श्रद्धालुओं का सालों भर यहां आगमन होता रहता है।


महावीर स्मारक -  भगवान महावीर के जन्म के 2555 वर्ष बाद देश के प्रथम राष्ट्रपति डाक्टर राजेंद्र प्रसाद यहां पधारे। साल 1955 ( विक्रम संवत 2012)  में उनके द्वारा यहां पर महावीर स्मारक की स्थापना की गई।

बिहार के तत्कालीन राज्यपाल रामनाथ कोविंद ( वे  बाद में देश के राष्ट्रपति बने) का आगमन यहां 20 अप्रैल 2016 को हुआ। यहां पर उन्होंने मान स्तंभ का शिलान्यास किया।


अतिशय युक्त प्रतिमा - वैशाली में दूसरा प्रमुख जैन तीर्थ स्थल बौना पोखर ग्राम में है। श्री महावीर स्वामी की अतिशय युक्त प्रतिमा बौना पोखर में है। यहां पर जैन समाज द्वारा एक शिक्षण केंद्र की भी स्थापना की गई है। इसका नाम प्राकृत जैन शोध संस्थान है। इसे डिम्ड यूनीवर्सिटी का दर्जा प्राप्त है।

- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 

( MAHAVIR SWAMI, JAIN TEMPLE,  BASO KUND, VAISHALI, MUZAFFARPUR )



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