Sunday, March 7, 2021

वैशाली नगर 14 मील की किलेबंदी में घिरा था



वैशाली को देखने की शुरुआत राजा विशाल के किले से। इसे गढ़ कहा जाता है। वैशाली में प्रवेश करने पर सबसे पहले बायीं तरफ विशाल गढ़ के लिए रास्ता जाता है। किले के पास एक सरोवर है। इस सरोवर को भी विकसित करके बोटिंग के योग्य बनाया जा सकता है। यह वैशाली में पर्यटन का नया आकर्षण बन सकता है।  


राजा विशाल के किले के अवशेष भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की ओर से संरक्षित स्मारक है। पर इसमें प्रवेश के लिए कोई टिकट नहीं है। किले के प्रवेश द्वार पर एक आईसक्रीम वाला खड़ा है। कुछ स्थानीय लोग भी अपने परिवार के साथ किले के अवशेष देखने पहुंचे हैं।


कौन थे राजा विशाल। दरअसल वैशाली को यह नाम महाभारत काल के इक्ष्वाकु वंशीय राजा विशाल के नाम पर मिला है। विष्णु पुराण में इस क्षेत्र पर राज करने वाले 34 राजाओं का उल्लेख मिलता है। ईसा पूर्व सातवीं सदी के उत्तरी और मध्य भारत में जिन 16 महाजनपदों के बारे में हैं इतिहास की पुस्तकों में पढ़ते हैं उनमें वैशाली का अति महत्त्वपूर्ण स्थान था। 


चीनी यात्री ह्वेनसांग के अनुसार पूरे वैशाली नगर का घेरा 14 मील यानी 20 किलोमीटर से अधिक था। अतीत में वैशाली नगर अति समृद्ध एवं सुरक्षित हुआ करता था। यह थोड़े-थोड़े अंतर पर बनी तीन दीवारों से घिरा था। नगर की इतनी मजबूत किलेबंदी तीनों दीवारों से इसलिए की गई थी ताकि शत्रु के लिए नगर के भीतर पहुंचना असंभव हो सके। 


दुनिया की प्राचीनतम संसद - वैशाली में स्थित राजा विशाल का गढ़ यहां आने वाले सैलानियों को भारत के लोकतांत्रिक प्रथा की याद दिलाता है। यह वास्‍तव में एक छोटा सा टीला है। इसकी परिधि एक किलोमीटर है। इसके चारों तरफ दो मीटर ऊंची दीवार दिखाई देती है। इसके चारों तरफ 43 मीटर चौड़ी खाई है। समझा जाता है कि यह देश ही नहीं बल्कि दुनिया की प्राचीनतम संसद है। इसका आकार 480 मीटर लंबा और 230 मीटर चौड़ा हुआ करता था। यह विशाल और भव्य भवन था। इस संसद में 7777 संघीय सदस्‍य हुआ करते थे। इनहें गण भी कहा जाता था। ये सभी लोग इकट्ठा होकर राज्य की तमाम समस्‍याओं को सुनते थे और उस पर बहस किया करते थे।


जनतंत्र की जन्मभूमि - वैशाली का यह वज्जि या लिच्छवी गणराज्य विश्व का प्रथम गणतंत्र माना जाता है। वास्तव में यह आठ छोटे-छोटे राज्यों का संघ था। इसमें मिथिला के विदेह और कुंडग्राम के ज्ञातृक की शाखाएं भी शामिल थी। बुद्ध के काल में यह शक्तिशाली राज्य हुआ करता था। बुद्ध के जीवन काल में मगध के राजा अजातशत्रु और वैशाली गणतंत्र के बीच लंबा संघर्ष चल रहा था।


कानून का शासन - कुश जातक में ओकाक को यहां का राजा बताया गया है। गणतंत्र की व्यवस्था में कुलीनों की एक समिति होती थी। यहां सारे बड़े फैसले सामूहिक रूप से लिए जाते थे। कहा जाता है कि एक ही मुकदमें की सुनवाई करने के लिए लिच्छवि गणराज्य में एक के बाद एक करके सात न्यायालय हुआ करते थे। बौद्ध ग्रंथों के मुताबिक यहां कानून द्वारा नागरिकों के सामाजिक जीवन को नियंत्रित किया जाता था। वज्जि शब्द से वज्जिका निकली है जो वैशाली और मुजफ्फरपुर जिले की बोल चाल की भाषा है।

-        विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 

(  VAISHALI, VAJJI DEMOCERTIC,  LIKSHWI REPUBLIC,  BUDDHA )

आगे पढ़िए - ऐतिहासिक अभिषेक पुष्करिणी के बारे में




2 comments:

  1. हमेशा यहाँ एक ही आइसक्रीम वाला रहता है।

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