Tuesday, February 9, 2021

महादेव का अदभुत शिवलिंगम - सोमेश्वर महादेव मंदिर अरेराज




मुजफ्फरपुर से गोपालगंज जाने के रास्ते में मैं खजुरिया मोड पर उतर गया हूं। मेरे पास दिन भर का समय है तो सोचा अरेराज और केसरिया होता चलूं। बस ने सुनसान फ्लाईओवर से पहले उतार दिया है। मैंने पूछा, मुझे अरेराज की बस कहां से मिलेगी। उन्होंने कहा फ्लाईओवर के नीचे थोड़ा पैदल चल कर जाएं। मैं करीब 400 मीटर पैदल चलकर फ्लाईओवर के नीचे बने चौराहे पर पहुंचा हूं। 


यहां पर लोगों ने बताया कि दाहिनी तरफ अरेराज की बस मिलेगी। खजुरिया से अरेराज 28 किलोमीटर है। बस में मेरे बगल में एक मुस्लिम भाई बैठे हैं। उनकी केसरिया मे पान की दुकान है। वे बताते हैं मैं प्रोपर्टी डिलिंग का भी काम करता हूं। बता रहे हैं बौद्ध तीर्थ स्थल होने के कारण केसरिया में जमीन के भाव खूब बढ़ रहे हैं।   

वे बता रहे हैं कि   अच्छी सड़कें बन जाने से हाल के सालों में सैलानियों की आवाजाही खूब बढ़ी है।  अब वहां से दिन रात पटना के लिए बसें मिल जाती हैं। उन्होंने आग्रह किया कि आप केसरिया भी जरूर पधारें।   
खजुरिया से अरेराज की सड़क गंडक नदी के किनारे किनारे चलती है।  रास्ते में भवानीपुर , संग्रामपुर, इजरा नवादा जैसे गांव आते हैं। कई जगह तो नदी का तटबंध सडक के बिल्कुल पास दिखाई देता है। इस बार बाढ़ का पानी सड़क तक आ गया था।   एक घंटे के सफर में बस अरेराज बस स्टैंड पहुंच चुकी है।

पूर्वी चंपारण जिले का अरेराज शहर प्रसिद्ध है प्राचीन सोमेश्वर महादेव मंदिर के लिए। इस मंदिर की श्रद्धालुओं में बड़ी आस्था है। ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना सोम यानी चंद्रमा ने स्वंय करवाई थी। ऐसा स्कंद पुराण में जिक्र आता है। इस ग्रंथ में पंचमुखी महादेव का जिक्र आता है। उनके नाम पर ही इसका नाम सोमेश्वरनाथ महादेव है।


कथा है कि जब देवी अहिल्या के प्रकरण में चन्द्रमा शापित हुए थे। तब अगस्त मुनि ने शाप से मुक्ति के लिए चंद्रमा को गंडकी नदी के तट पर स्थित अरण्यराज में गह्वर में शिवलिंग की स्थापना करने की सलाह दी थी। तब चंद्रमा ने यहां महादेव का लिंग स्थापित कर पूजना किया। इसके बाद ही चंद्रमा शाप से मुक्त हुए थे।


यह भी जनश्रुति है कि महाभारत काल में युधिष्ठिर ने राजपाट खोने पर इसी मंदिर पूरे श्रावण मास जलाभिषेक किया था। उसके बाद उनका राजपाट वापस हुआ था। वहीं जनकपुर से अयोध्या जाने के क्रम में माता जानकी ने पुत्र प्राप्ति के लिए भी पूजा अर्चना की थी। उसके बाद से यह मंदिर पुत्र प्राप्ति के लिए कामना करने वालों के बीच भी काफी प्रसिद्ध है।


सोमेश्वर महादेव का मंदिर परिसर बड़ा मनोरम है। मुख्य मंदिर बहुत विशाल नहीं है। पर मंदिर के गर्भ गृह में पहुंचने के लिए आपको कुछ सीढियां नीचे उतरनी पड़ती है। यहां स्थापित शिवलिंगम मुख्य धरातल से काफी नीचे है। ऐसा देश के बहुत कम शिव मंदिरों में देखा जाता है। मंदिर के गर्भ गृह में काफ कम जगह बै। इसमें श्रद्धालु पूर्वी द्वार से प्रवेश करते हैं और दक्षिण के द्वार से बाहर निकलते हैं। मंदिर के पास ही विशाल सरोवर है। हालांकि तालाब का पानी साफ नहीं है। सोमेश्वर नाथ मंदिर की श्रंगार पूजा भव्य होती है।

सोमेशवर महादेव के मंदिर के प्रवेश द्वार से ही मंदिर के पंडे आपको घेर लेते हैं। मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में पंडे स्थायी आसन लगाकर बैठे नजर आते हैं। वे आने वाले श्रद्धालुओं को जल की लुटिया और पूजन सामग्री देते हैं। इसे लेकर श्रद्धालु मंदिर में जाकर जलाभिषेक करते हैं। मंदिर जलाभिषेक कर बाहर निकलने पर आपको पंडे घेर लेते हैं जो आपको टीका चंदन लगाकर दक्षिणा की उम्मीद रखते हैं।


सावन माह में मेला – हर साल सावन के महीने में और साल के अन्य पर्व त्योहारों के अवसर पर लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। बड़ी संख्या में शिव के भक्त देश ही नहीं बल्कि समीपवर्ती नेपाल से भी यहां आते है। श्रावण मास में तो यहां पर विशाल मेला भी लगता है। यह उत्तर बिहार का प्रसिद्ध शिव मंदिर है। पर इस मंदिर का अभी कोई ट्रस्ट नहीं बना है। मंदिर अभी स्थानीय पंडों के कब्जे में नजर आता है।

-         विद्युत प्रकाश मौर्य -vidyutp@gmail.com  

     ( ARERAJ, CHAMPARAN, SHIVA TEMPLE, SOMESHWARNATH MAHADEV ) 



1 comment:

  1. मैं भी एक बार गया हूँ
    विशेष जानकारी के लिए आभारी हूं

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