Friday, February 5, 2021

हर किसी की सुनते हैं बाबा गरीबनाथ

 


मुजफ्फरपुर में है बाबा गरीबनाथ का मंदिर।   बाबा गरीबनाथ धाम जागृत शिव-स्थल माना जाता है। उत्तर   बिहार    के श्रद्धालुओं में इस मंदिर के प्रति बड़ी आस्था है। सालों भर मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। भीड़ भाड़ वाले बाजार में स्थित इस मंदिर का परिसर हाल के दिनों में और बेहतर हो गया है। यह मंदिर मुजफ्फरपुर शहर के बीचोंबीच स्थित है।  


बाबा गरीबनाथ शिवलिंग का प्राकट्य कब हुआ इसकी सही-सही जानकारी उपलब्ध नहीं हैं।   
 पर कथा के मुताबिक शिवलिंग जहां प्रकट हुआ वह क्षेत्र पहले जंगल हुआ करता था। मंदिर प्रांगण में स्थित जिस कल्पवृक्ष जिनकी पूजा की जाती है वह शिवलिंग के प्राकट्य से भी ज्यादा पुराना माना जाता है।

 धार्मिक और ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार बाबा गरीबनाथ धाम का तीन सौ साल पुराना है। दस्तावेज के की बात करें तो 1812 ईस्वी में इस स्थान पर छोटे मंदिर में बाबा की पूजा-अर्चना होती रही थी। ऐसी मान्यता है कि सात पीपल का पेड़ यहां के घने जंगल में थे। पेड़ को काटे जाने के समय अचानक खून जैसे लाल पदार्थ निकलने लगा। फिर यहां विशालकाय शिवलिंग प्रकट हुआ। बाद में जमीन मालिक को रात में बाबा ने स्वप्न दियाइसके बाद यहां पर विधिवत पूजा-अर्चना की जाने लगी।

 


मान्यता है कि बेहद ही गरीब आदमी के बेटी के विवाह के लिए घर में कुछ भी नहीं था, लेकिन बाबा के दर्शन के बाद सारे सामानों की आपूर्ति अपने-आप हो गई। इसके बाद से लोगों के बीच गरीबनाथ धाम के रूप में बाबा की प्रसिद्धि हो गई। 


सावन में कांवर यात्रा - हर साल श्रावण मास में कांवरिओं द्वारा सोनपुर से गंगाजल लाकर बाबा पर अर्पित करने की तीव्र शुरुआत सन 1960 के आस-पास से की गई। सन 2000 में झारखंड राज्य बनने के बाद गरीबनाथ में कांवर लेकर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ गई है। 


सावन में लोग पहलेजा घाट से गंगा नदी से जल लेकर पैदल चलकर यहां पहुंचते हैं। यात्रा का मार्ग पहलेजा घाट
, सोनपुर, हाजीपुर से होकर रहता है। हाजीपुर से श्रद्धालु वाया भगवानपुर, गोरौल या फिर वाया महुआ भी पहुंचते हैं।   
यह लगभग 70 किलोमीटर की पदयात्रा होती है।

सन 2006 में ट्रस्ट के हवाले -     सन   2006 ईस्वी में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पार्षद ने मंदिर का अधिग्रहण किया और मंदिर की व्यवस्था के लिए ग्यारह सदस्यों का एक ट्रस्ट बनवाया गया। अब मंदिर का भव्य और विशाल गुंबद बनाया गया है। मंदिर में तमाम तरह के संस्कारों के लिए दरें तय कर दी गई हैं। मंदिर में विवाह समेत तमाम संस्कार कराए जाते हैं। मंदिर में दर्शन के लिए आपको पंडों के चक्कर में नहीं फंसना पड़ता है।


खुलने का समय - मंदिर खुलने का समय सुबह  बजे से दोपहर 12 बजे तक है। इसके बाद दोपहर 2:30 से रात्रि 10 बजे तक मंदिर खुला रहता है। मंदिर में आरती प्रातः   5   बजे और रात्रि   9   बजे होती है।


कैसे पहुंचे मुजफ्फरपुर रेलवे स्टेशन से सरैयागंज पहुंचे। यहां से मंदिर थोड़ी दूरी पर स्थित है। मंदिर के आसपास पुरानी बाजार, पड़ाव पोखर आदि इलाके आते हैं। रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी कोई पांच किलोमीटर है। मंदिर के आसपास दिन भर रौनक रहती है।https://www.garibnathdham.in/ 

विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 

( GARIBNATH TEMPLE, MUZAFFARPUR, MHADEV SHIVA, BOLBAM, PAHLEJA GHAT) 

No comments:

Post a Comment