Tuesday, February 23, 2021

पटना का गायघाट गुरुद्वारा – पहली पातशाही की याद


पटना को ये सौभाग्य प्राप्त है कि इस धरती को कई सिख गुरुओं का आशीर्वाद प्राप्त है। पटना में महात्मा गांधी सेतु पर पहुंचते ही आपको पुल के बगल में एक गुरुद्वारा नजर आता है। गायघाट का यह गुरुद्वारा ऐतिहासिक है। यह गुरुद्वारा सिख धर्म के पहले गुरु गुरुनानक देव जी की याद दिलाता है। यह माना जाता है कि गुरुनानक देव जी अपनी उदासियों के क्रम में यहां 1509 ईस्वी में पधारे थे। यहां पर उन्होंने अच्छा वक्त गुजारा था। अपने आशीर्वाद से उन्होंने यहां के लोगों को उपकृत किया था। इसलिए सिख इतिहास में यह गुरुद्वारा काफी अहम स्थान रखता है।

जहां पर यह गुरुद्वारा स्थित है पहले भक्त जैतामल का आवास हुआ करता था। पेशे से व्यापारी जैतामल गुरु की शिक्षाओं से काफी प्रभावित हुए। बाद में उन्होंने अपना घर बाद में धर्मशाला के लिए दान में दे दिया था। पटना के आलमगंज के पास स्थित इस गुरु घर को गुरुद्वारा पहिला बाड़ा के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है कि भगत जैतामल जब ज्यादा वृद्ध हो गए तो रोज गंगा स्नान  करने नहीं जा पाते थे। तब उन्होंने गुरु महाराज को याद किया। उनके लिए गुरुनानक देव जी ने अपने प्रताप से गाय के रुप में गंगा जी को उसके घर तक ला दिया था। यह गाय ही उन्हें हर रोज गंगा स्नान कराती थी। इसी कथा के नाम पर इस इलाके का नाम गाय घाट पड़ गया।  


बाद में 1666 में नवम पातशाही गुरुतेग बहादुर भी बंगाल यात्रा से लौटते समय यहां पधारे थे। वे भक्त जैतामल की कुटिया में पहुंचे। जिस खिड़की से उन्होंने भक्त जैतामल की कुटिया में प्रवेश किया उसे खिड़की साहिब कहा जाता है। कहा जाता है कि भक्त जैतामल को उनके अंदर गुरुनानक देव की छवि दिखाई दी। उनकी मौजूदगी में ही भक्त जैतामल को मुक्ति मिली। इसी स्थान पर यह गुरुद्वारा निर्मित किया गया है। 


गुरुद्वारा का ऐतिहासिक महत्व - इस गुरुद्वारे का ऐतिहासिक महत्व इस मायने में भी है कि यहां पर गुरुनानक देव जी के साथ हमेशा रहने वाले भाई मरदाना के रबाब को संरक्षित करके रखा गया है। गुरुनानक देव के मुसलिम शिष्य मरदाना बहुत अच्छे गायक होने के साथ रबाब भी बजाते थे। यहां पर माता गुजरी द्वारा इस्तेमाल की गई चक्की भी संरक्षित करके रखी गई है। यहां पर वह पेड़ भी है जहां नवम पातशाही गुरु तेग बहादुर ने अपना घोड़ा बांधा था। तब गुरुतेग बहादुर ने पटना में चार महीने तक प्रवास किया था।


गायघाट का यह गुरुद्वारा पटना के प्रसिद्ध गुरुद्वारा हरिमंदिर साहिब से चार किलोमीटर की दूरी पर है। यह गुरुद्वारा सिख सरकिट का प्रमुख हिस्सा है। सिख श्रद्धालुओं में गायघाट गुरुद्वारा को लेकर बड़ी आस्था है। पटना आने वाले श्रद्धालु इस गुरुद्वारे में भी मत्था टेकने आते हैं।

गायघाट के गुरुद्वारा में हर साल गुरुनानक देव के जन्मदिन पर गुरु पर्व का आयोजन बड़े ही धूमधाम से किया जाता है। तब यहां दीवान सजते हैं। अखंड पाठ, विशाल लंगर और भव्य नगर कीर्तन का भी आयोजन किया जाता है।

-         विद्युत प्रकाश मौर्य – vidyutp@gmail.com

-         ( GAI GHAT GURUDWAR, PATNA SAHIB, GURU NANAK DEV, GURU TEG BHADUR )



No comments:

Post a Comment