Wednesday, February 17, 2021

थावे की प्रसिद्ध मिठाई पैड़किया का स्वाद


चाचा जी के श्राद्ध कर्म में दो दिन गोपालगंज में गुजरा। हालांकि मैं मृतक भोज के खिलाफ हूं पर परिवार के सदस्यों के इच्छा के अनुरूप सब कुछ हुआ। अपनी इस बिहार यात्रा के दौरान गांव में कई तरह के बदलाव देख रहा हूं। पंजाब की तरह यहां भी मोबाइल आटा चक्की और धान कुटने वाली चक्कियां बन गई हैं। ट्रैक्टर के इंजन के साथ बनी ये चक्कियां आपके घर के दरवाजे पर पहुंच जाती हैं और आपके आर्डर के मुताबिक धान कूट कर निपटारा कर देती हैं। पहले हमलोग बैलगाड़ियों में धान को लाद कर पड़ोस के गांव के मिल तक ले जाते थे अब उसकी जरूरत ही नहीं रही। तो ये तकनीक का बदलाव है।

हमें 18 दिसंबर की सुबह पटना के लिए प्रस्थान करना था। पर इस बार इच्छा हुई कि गोपालगंज आना हुआ है तो थावे में प्रसिद्ध शक्ति स्थल भवानी माता के दर्शन कर लिए जाएं। तो हमलोग चल पड़े थावे के लिए। मंदिर के ठीक पहले थावे में छोटा सा बाजार है। पर इस बाजार में मुख्य रूप से थावे की स्थानीय मिठाई पेड़किया की दुकानें हैं।


थावे का पेड़किया लाजवाब मिठाई है। यह रसदार भी होता है और सूखा भी। जाहिर है कि दोनों के स्वाद में थोड़ा अंतर होता है। मूल रूप से इसमें खोवा भरा जाता है। यही सूजी या आटे के आधार पर बनाया जाता है। यहां पर वनस्पति में बने मिठाई की दरें 160 रुपये किलो है तो घी में बनी पेड़किया की दरें 250 से 300 रुपये किलो के बीच है। थावे के पेड़किया के दीवाने दूर दूर तक हैं। जिसे इसका स्वाद लग गया वह पैक कराकर अपने साथ ले जाता है।


यह मिठाई बिहार के शेष इलाके में मिलने वाली चंद्रकला या बनारस के प्रसिद्ध मिठाई लौंगलता की तरह ही है। इस मिठाई ने थावे की पहचान कुछ इस कदर बना दी है कि अब तो थावे का मतलब हो गया है पेड़किया।

थावे मंदिर के मार्ग में कई सारी दुकानें हैं जो पेड़किया बनाती हैं। पर इनमें गौरी शंकर के नाम से कई सारी दुकानें दिखाई देती हैं। सबके साईनबोर्ड पर लिखा दिखाई देता है  गौरी शंकर की शुद्ध मिठाई की दुकान।




तो ये गौरी शंकर कौन थे। वे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने अपनी मिठाई की दुकान खोली। बाद में उनके भाई और बच्चे अपनी अपनी दुकानें अलग करते गए। सबने इस विरासत को भुनाया। तो गौरी शंकर मिठाई की दुकानें कई दिखाई देने लगी हैं।   गौरीशंकर साह मूल रूप से सीवान जिले के जीरादेई थाना क्षेत्र के नरेंद्रपुर गांव के रहने वाले थे।


 उन्होंने सन 1947 में ठीक उसी साल जब देश आजाद हुआ था, एक साधु की सलाह पर पेड़किया बनाने का काम शुरू किया था। लोग  बताते हैं कि अपने पिता की मृत्यु के बाद गौरीशंकर साह अपने चार भाइयों के साथ थावे के विदेशी टोला निवासी अपने मामा बुनिलाल साह के यहां रखकर मिठाई का कारोबार शुरू किया। तब वे ये गांव-गांव में घूम कर गट्टा मिठाई बेचा करते थे। 



खाली समय में स्टेशन के पास दुकान खोल कर मिठाई बेचने लगे। इसी दौरान एक साधु  से उनकी मुलाकात हुई। साधु ने उन्हें आर्शीवाद देते हुए शुद्ध घी मिठाई बनाने की सलाह दी। इसके बाद गौरीशंकर पेड़किया बनाकर बेचने लगे। उनका यह कारोबार चल निकला। अब उनके परिवार के लोगों ने अलग अलग नाम से भी पेड़किया की दुकाने जमा ली हैं। वे दूसरी मिठाइयां भी बनाते हैं पर मांग सबसे ज्यादा पेड़किया की ही होती है।


ऐसे बनता है पेड़किया – पेड़किया में खोवा, मैदा, चीनी और शुद्ध घी का मिश्रण होता है। यह मिठाई सेहत के लिहाज से भी ठीक मानी जाती है। लोग सुबह के नाश्ते में एक पेड़किया खाते हैं।  इसका घी लोगों की सेहत ठीक रखता है।

 - विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com

( THAWE,SWEETS, PAIRAKIYA,  KHOWA ) 

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