Saturday, February 13, 2021

केसरिया - दुनिया का सबसे बड़ा और विशाल बौद्ध स्तूप


अरेराज से पटना जाने वाली बस में बैठा हूं। बस खजुरिया से आगे बढ़ती हुई केसरिया पहुंचती है। खजुरिया मोड पर लोगों ने बताया था कि यहां से केसरिया की दूरी महज 10 किलोमीटर है। खजुरिया नेशनल हाईवे नंबर 27 पर है। यहां से आप अरेराज और केसरिया दोनों जगह सुगमता से जा सकते हैं। 


खजुरिया के बाद हुसैनी, नया गांव फिर केसरिया बाजार आ जाता है। खजुरिया से केसरिया तक आटो रिक्शा से भी पहुंचा जा सकता है। केसरिया बाजार में बस से काफी लोग उतरते हैं। पर मैं बस कंडक्टर से आग्रह  करता हूं कि मुझे बौद्ध स्तूप के पास उतरना है। केसरिया बौद्ध स्तूप केसरिया बाजार से दो किलोमीटर आगे साहेबगंज रोड पर है। तो मैं बस से ठीक स्तूप के सामने उतर जाता हूं।

मुझे थोड़ा अफसोस हो रहा है कि वैशाली जिले में अपना लंबा वक्त गुजारने के बाद भी मैं यहां पर इतनी देर से क्यों पहुंचा हूं।  वैसे केसरिया पूर्वी चंपारण जिले में है। पर यह मुजफ्फरपुर के साहेबगंज शहर से 11 किलोमीटर की दूरी पर है। वहीं वैशाली से इसकी दूरी 50 किलोमीटर है। केसरिया बौद्ध धर्म के पावन तीर्थ स्थलों में से एक है। 


मेरी आंखों के सामने केसरिया का विशाल बौद्ध स्तूप है। कहा जाता है कि भगवान बुद्ध अपने आखिरी दिनों में जब महापरिनिर्वाण ग्रहण करने कुशीनगर जा रहे थे तो उस यात्रा के दौरान वह एक दिन के लिए केसरिया में ठहरे थे। बुद्ध जिस स्‍थान पर पर वह ठहरे थे वहीं पर सम्राट अशोक ने उनकी याद में विशाल स्‍तूप का निर्माण करवाया था। इसे विश्‍व का सबसे बड़ा स्‍तूप माना जाता है। 


1998 खुदाई में पता चला - पर यह विशाल स्तूप 1998 से पहले ज्यादा लोगों के ध्यान में नहीं था। पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा केसरिया में उत्खनन के बाद दुनिया का सबसे ऊंचे बौद्ध स्तूप के बारे में पता चला। इसके मिलने के बाद बिहार ने अपने अतीत का एक विशाल गौरव फिर से प्राप्त कर लिया।


केसरिया के बौद्ध स्तूप की ऊंचाई  अभी भी 104 फीट है। हालांकि अतीत में यह स्तूप और भी ऊंचा था। इंडोनेशिया स्थित विश्व प्रसिद्ध बोरोबदुर (जावा) बौद्ध स्तूप की ऊंचाई 103 फीट है। इस तरह से केसरिया विश्व का सबसे चा स्तूप है। ये दोनों ही स्तूप छह तल्ले वाले हैं। इनके प्रत्येक दिवाक खंड में बुद्ध की मूर्तिया स्थापित की गई हैं। स्तूप में लगी ईंटों की पहचान मौर्य कालीन के तौर  पर हुई है। स्तूप में स्थापित सभी बुद्ध मूर्तियां विभिन्न मुद्राओं में है। हालांकि इनमें से कई बुद्ध मूर्तियां खंडित हो गई हैं।


इस स्तूप के बारे में 1861-62 में  कनिंघम ने लिखा है कि केसरिया का यह स्तूप 200 ईस्वी से 700 ईस्वी के बीच में कभी बना होगा। वहीं चीनी यात्री फाहियान के अनुसार केसरिया के देउरा स्थल पर भगवान बुद्ध कुशीनगर जाने के क्रम में अपने साथ आए वैशाली के भिझुकों को अपना भिक्षा पात्र प्रदान किया था।


आज केसरिया के विशाल बौद्ध स्तूप को देखने बड़ी संख्या में स्थानीय सैलानी तो पहुंचते ही हैं, विदेशों से हजारों  पर्यटक एवं बौद्ध भिक्षुक रोजाना पहुंचते हैं।  मैं केसरिया बौद्ध स्तूप की चारों तरफ से परिक्रमा करता हूं। स्तूप को हर ओर से निहारने की कोशिश करता हूं।


स्तूप भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की ओर से संरक्षित है। फिलहाल प्रवेश के लिए कोई टिकट नहीं है। पर बिहार सरकार की ओर से इसके चारों तरफ बाउंड्री करा दी गई है। प्रवेश द्वार पर पेयजल और शौचालय का निर्माण कराया गया है। यहां सुरक्षा गार्ड और बिहार पुलिस के जवान भी तैनात रहते हैं। स्तूप के ऊपर किसी को भी चढ़ने की मनाही है। पहले काफी लोग ऊपर चढ़ने लगते थे। अब पुलिस ऐसा करने वालों को रोकती है।

-         विद्युत प्रकाश मौर्य -vidyutp@gmail.com 

     ( KESARIA, CHAMPARAN, BUDDHA ) 



 

2 comments:

  1. बहुत अच्छी जानकारी दी है जी। 🙏🙏

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