Thursday, February 11, 2021

अरेराज - दुल्हा-दुल्हन पहुंचते हैं महादेव का आशीर्वाद लेने


अरेराज के मंदिर परिसर में मैं देख रहा हूं कि जगह-जगह शादी के जोड़े  दुल्हा-दुल्हन बैठे हुए हैं। उनके साथ बैठे पुरोहित संस्कार करा रहे हैं। मुझे लगा कि यहां सामूहिक विवाह का आयोजन हो रहा है। पर अभी तो खरमास चल रहा है। इस समय भला शादी कैसे हो सकती है। मैं एक पूजारी से अपनी शंका रखता हूं। 


वे बताते हैं कि शादी नहीं हो रही है, बल्कि शादी के बाद दुल्हा दुल्हन यहां माथ लगाने आते हैं। हां माथ लगाना मतलब महादेव का आशीर्वाद लेना। इसके लिए दुल्हा दुल्हन शादी वाली परिधान में ही सजधज कर मंदिर आते हैं। यहां पर वे लोग विधि पूर्वक पूजन कराते हैं फिर नव जीवन में प्रवेश करने के लिए अपने घर के लिए वापस लौटते हैं। अरेराज के सोमेश्वरनाथ मंदिर में श्रद्धालु शादी विवाह,  जनेउ, मुंडन के अवसर पर भी बाबा दर्शन करने जरूर आते हैं। तो यूं समझिए कि मंदिर में सालों भर मेले जैसा माहौल रहता है।

पामरिया नृत्य से पूजन -   लगभग   विलुप्त   हो   चुके पामरिया नृत्य  के  माध्यम   से   भगवान   शिव  को   प्रसन्न  करने  की   परंपरा आज भी   अरेराज   में   जीवित   है।   मंदिर में केसरिया प्रखंड के खजुरिया के लोक नर्तक आते हैं। वे लोग अपने नृत्य से भगवान को प्रसन्न करते हैं। साथ ही जिस महिला श्रद्धालु की मन्नत पूरा हो जाती है, उस महिला श्रद्धालु के आंचल पर पामरिया नृत्य कर भगवान को खुश करते हैं। मान्यता है कि भगवान शिव गीत और संगीत के आदि के भी देवता हैं। इसलिए पमारिया नृत्य के माध्यम से भगवान शिव को प्रसन्न करने की परंपरा इस मंदिर में सदियों से चली आ रही है। 


अरेराज मंदिर से बाहर निकल कर वापस बस स्टैंड की तरफ चल पड़ा हूं। एक दुकान पर लकड़ी की खड़ाऊं और सब्जी काटने वाली फसूल बिकती नजर आती है। मैं उसकी तस्वीरें लेता हूं तो दुकानदार  कहते हैं कि मेरी भी तस्वीर ले लिजिए। 


अरेराज प्रखंड स्तर का शहर का है, पर इसका बाजार काफी बड़ा है। आसपास के लोगों के खरीददारी के लिए प्रमुख बाजार है। शहर के बीच में तालाब के पास प्रखंड का नया कार्यालय बना है। यह विशाल भवन किसी जिला मुख्यालय सा प्रतीत होता है। मैंने अभी तक बिहार में इतना भव्य प्रखंड कार्यालय नहीं देखा है। बिहार में काफी चीजें बदल रही हैं। पर अरेराज का पुराना नाम अरण्यराज हुआ करता था। मतलब ये पूरा क्षेत्र जंगल हुआ करता था।

अरेराज में अब खाने पीने के लिए अच्छे रेस्टोरेंट और रहने के लिए अच्छे होटल भी उपलब्ध हैं। जल्द ही ये शहर हाजीपुर सुगौली रेलवे लाइन से जुड़ जाएगा तब यहां रेलगाड़ी से भी  पहुंचा जा सकेगा। अभी तो आप बापू धाम मोतिहारी रेलवे स्टेशन से यहां पहुंच सकते हैं। मैं बस स्टैंड पहुंच गया हूं। पटना की ओर जाने वाली बस चलने को तैयार है।


कैसे पहुंचे – मोतीहारी शहर से अरेराज की दूरी 28 किलोमीटर है। आप यहां मुजफ्फरपुर, हाजीपुर, वैशाली और गोपालगंज से भी पहुंच सकते हैं। अरेराज बस स्टैंड से मंदिर की दूरी दो किलोमीटर है। शहर में बैटरी रिक्शा चलते हैं। वे दस रुपये में बस स्टैंड से मंदिर पहुंचा देते हैं।   

-         विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 

( (ARANYA RAJ , ARERAJ, CHAMPARAN, SHIVA TEMPLE ) 

 


 

2 comments:

  1. बिहार में अभी परम्पराएं जीवित हैं, देख कर मन को सुकून मिलता है.

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