Sunday, February 7, 2021

मुजफ्फरपुर के गोपालगंज - एनएच 27 पर चीनी मिलों की याद

गरीबनाथ मंदिर से लौटते हुए पुरानी बाजार में विष्णु वैभव  मुझे दाता मुजफ्फर शाह और दाता कंबल शाह की मजार दिखाते हैं। सड़क के बीचों-बीच बनी ये मजार सूफी संत मुजफ्फर शाह की  है। उनके नाम पर ही इस शहर का नाम मुजफ्फरपुर पड़ा। हर साल उनकी याद में   शहर में उर्स का आयोजन होता है।  शहर के हर वर्ग   के लोग दाता  कंबल शाह का सम्मान करते हैं। इस मौके पर कव्वाली  का भी आयोजन होता है।

मुजफ्फरपुर में दिसंबर की सर्द सुबह है। उस पर बारिश की हल्की बूंदों ने सर्दी में थोड़ा सा और रस घोल दिया है। ऐसे में मैं निकल पड़ा हूं अगली मंजिल की ओर। विष्णु वैभव के परिवार से विदा लिया। विष्णु अपनी बाइक से मुझे छोड़ने के लिए बैरिया बस स्टैंड  की ओर चले। 

रास्ते में महेश प्रसाद सिंह साइंस कॉलेज नजर आया। इसी कॉलेज में हमलोगों ने मई की गरमी में 1989 में आईएससी की परीक्षाएं दी थीं। ये परीक्षा लगातार हुई थी। दोनो पालियों में। सेंटर पर बड़ी कड़ाई थी। थोड़ी देर में हमलोग बैरिया बस स्टैंड पर थे। यहां से गोपालगंज के लिए बसें हर आधे घंटे पर मिलती हैं। मुझे एक बस में बिठाकर विष्णु चले गए। इस वादे के साथ फिर जल्द मिलेंगे।

मुझे बैरिया बस स्टैंड को देखकर  थोड़ी निराशा होती है। बिहार के दूसरे बड़े शहर के इस  विशाल बस स्टैंड में यात्री सुविधाओं का घोर अभाव है। बस स्टैंड का  कोई मुक्कमल भवन, प्रतीक्षालय, कैंटीन, शौचालय आदि का इंतजाम नहीं है।  कई दशक से यहां बस स्टैंड  संचालित है पर इसका विकास नहीं किया गया है। इस मामले में हमें  दक्षिण भारत के राज्यों खास तौर पर  कर्नाटक से काफी कुछ सीखने की जरूरत है। 


 थोड़ी देर में बस चल पड़ी। चांदनी चौक के बाद मुड़कर एनएच 27 पर सरपट भाग रही है। रास्ते में नजर आया कांटी में मुजफ्फरपुर थर्मल पावर स्टेशन। उत्तर बिहार का प्रमुख विद्युत उत्पादन केंद्र है। वैसे अब बिहार में बिजली की स्थिति काफी अच्छी हो गई है। हमारे बचपन में गांव में तो मुश्किल से दो चार घंटे ही बिजली आती थी। अब तो 22 घंटे रहती है। 


कांटी में बस खुराक लेने के लिए रुकी।  रिलायंस का पेट्रोल पंप है जो कई साल बाद फिर से चालू हो गया है। इस पेट्रोल पंप  के बगल में एक अच्छा होटल और एक सुंदर देवी का मंदिर भी है।  मां छिन्नमस्तिका देवी का मंदिर।   मंदिर बड़ा ही सुंदर बना हुआ दिखाई दे रहा है।  प्रवेश द्वार पर दो शेर बने हुए हैं।



 इसके आगे मोतीपुर आया। यहां पर बहुत पुराना चीनी मिल है। इस चीनी मिल में 1933 में उत्पादन शुरू हुआ था। पर यह चीनी मिल इन दिनों बंद पड़ा है। साल 2011 से ही इसकी चिमनियां धुआं नहीं उगल रहीं। कभी यह बिहार का सबसे बड़ा शुगर मिल हुआ करता था। राजनैतिक उदासीनता के कारण यह बड़ा उद्योग हासिये पर चला गया है।


इसके बाद हमारी बस पूर्वी चंपारण जिले में प्रवेश कर गई है। चकिया में बस थोड़ी देर के लिए रुक जाती है। यहां पर ड्राईवर महोदय के नास्ता करने का पड़ाव है। चकिया में भी एक चीनी मिल हुआ करती है जो सालों से बंद पड़ी है। मतलब कि ये इलाका बिहार का गन्ना बेल्ट हुआ करता था। बिहार विधान सभा 2020 के हाल में हुए संपन्न हुए चुनाव में चकिया चीनी मिल को चालू कराना भी मुद्दा बना था। उत्तर बिहार में कुल 15 चीनी मिलें हुआ करती थीं। अब इनमें से ज्यादातर बंद पड़ी हैं।


बस का अगला पड़ाव पीपरा कोठी है। यहां से मोतीहारी के लिए रास्ता बदल जाता है। वहीं एनएच 27 गोपालगंज की ओर बढ़ जाती है। रास्ते में कुछ हरे भरे गांव के बाद आता है खजुरिया। खजुरिया पूर्वी चंपारण जिले का आखिरी कस्बा है। इसके बाद नारायणी नदी पर बना डुमरिया घाट पुल आया। इस पुल को पास करने के बाद बस गोपालगंज जिले में प्रवेश कर जाती है। पर इस पुल का अभी निर्माण चल रहा है। इसलिए इसका एक लेन ही चालू है। कई बार इस पुल पर लंबा जाम लग जाता है। पर आज रास्ता साफ है।


हम मोहम्मदपुर नामक कस्बे से गुजर रहे हैं। रास्ते में झंझवां नामक एक गांव आता है। इस गांव के एक इंजीनियर राजेश कुमार कभी हमारे साथ मुजफ्फरपुर में रहते थे। इसके बाद बरहिमा बाजार। फिर आया कोइनी मोड़। बस में ज्यादा भीड़ नहीं है। रास्ते में कुछ लोग उतर चढ़ रहे हैं। बस बाइपास छोड़ चुकी है। अब गोपालगंज शहर में प्रवेश कर रही है। 


मैं आंबेडकर चौक पर उतर गया हूं। गोपालगंज के सिनेमा रोड पर थोड़ी देर पैदल चलता रहा। शहर में  पूरा चाकचिक्य नजर आ रहा है। यह मुझे हाजीपुर, छपरा और सीवान से बेहतर शहर लग रहा है। इसी दौरान सासामुसा की तरफ जाने वाला शेयरिंग ऑटोरिक्शा मिल गया जिसने मुझे बसडीला उतार दिया।


-         -  विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmaill.com 

-          (MUZAFFARPUR, BAIRIA BUS STAND, KANTI  THARMAL, MOTIPUR SUGAR MILL, CHAKIA, PIPRA KOTHI, KHAJURIA, DUMARIA GHAT PUL, GANDAK RIVER, GOPALGANJ )

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