Sunday, January 24, 2021

विलक्षण और खूबसूरत है अष्टापद तीर्थ जैन मंदिर

 


हस्तिनापुर के जैन मंदिरों में एक और विलक्षण और खूबसूरत मंदिर है अष्टापद तीर्थ जैन मंदिर। यह भव्य जैन मंदिर श्वेतांबर समुदाय का है।  अष्टापद तीर्थ की कुल ऊंचाई 151 फीट है। इसके चार प्रवेश द्वार हैं। यह गोलाकार मंदिर काफी दूर से भी सुंदर दिखाई देता है।


इस भव्य मंदिर का व्यास 160 फीट है। इसमें 108 फीट ऊंचे शिखर पर आठ पदों वाले जिनालय तीर्थ का निर्माण कराया गया है। यह हस्तिनापुर का नवीन मंदिर है। यह नए पर्यटक स्थल के रूप में विकसित हो रहा है। अष्टापद तीर्थ. यह वही पवित्र स्थान हैजहां ऋषभदेव ने मोक्ष प्राप्त किया था। अष्टापद का शाब्दिक अर्थ है आठ चरण।


जैन शास्त्रों के अनुसार चौबीसवें तीर्थंकर महावीर स्वामी ने अपने प्रथम शिष्य गौतम स्वामी से कहा- हे गौतम! जो अपने जीवन काल में स्वयं अष्टापद की यात्रा करता है, वह उसी भव में मोक्ष जाता है। यह सुनकर गौतम स्वामी अष्टापद की यात्रा को गए। ऐसी भी माना जाता है कि ऋषभदेव ने अंतिम समय पर हस्तिनापुर से ही अष्टापद की ओर विहार किया था।


तो ऐसे पावन तीर्थ में विलुप्त अष्टापद तीर्थ के आकार को इस मंदिर के रूप में मूर्त रूप दिया गया है।   इस मंदिर के अंदर सारे जैन तीर्थंकरों की मूर्तियों के दर्शन किए जा सकते हैं। इस भव्य मंदिर का निर्माण दिसंबर 2009 में पूरा हुआ। इसके निर्माण में लगभग 25 करोड़ रुपये की लागात आई थी। यह 20 वर्षों में बनकर तैयार हुआ।

मूर्तिकारों का शहर है   हस्तिनापुर   -   हस्तिनापुर शहर में प्रवेश करते ही आपको कई मूर्तिकारों के वर्कशॉप नजर आते हैं। वे लोग हर तरह की मूर्तियां ऑन डिमांड तैयार कर देते हैं। दिन भर शिल्पियों को यहां पर मूर्तियों को तराशते हुए देखा जा सकता है। दरअसल हस्तिनापुर का मूर्तिकला से पुराना संबंध रहा है। 


हस्तिनापुर ऊपरी गंगा घाटी के उत्खनित स्थलों में विषेश रूप से उल्लेखनीय है। उत्खनन के दौरान यहां से तांबे के उपकरण और बैल एवं घोड़े की मृण्यमूर्तियां भी मिली हैं। इससे प्रतीत होता है कि मूर्ति कला यहां की प्राचीन परंपरा रही होगी। तो  हस्तिनापुर आकर आप अपनी पसंद की पत्थर की मूर्तियां   बनवा सकते हैं। 


हस्तिनापुर के बारे में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपनी पुस्तक   द डिस्कवरी ऑफ इंडिया में लिखा है – दिल्ली और देहली कोई आधुनिक शहर नहीं है। बल्कि यह प्राचीन हस्तिनापुर शहर के पास स्थित है। जो कभी इंद्रप्रस्थ भी कहलाता था। (  Dilli or Delhi, not the modern city but ancient cities situated near the modern site, named Hastinapur and Indraprastha becomes the metropolis of India ) हालांकि जहां तक मेरी जानकारी है हस्तिनापुर में ऐतिहासिक तौर पर कोई पांडवकालीन अवशेष की प्राप्ति नहीं हुई है। 


हस्तिनापुर अभ्यारण्य    - करीब 2073 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले इस अभयारण्य एवं राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना सन 1986 में की गयी थी। यहां की समृद्ध जैव विविधता पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र है। इसके अलावा यहां सैलानी 350 से अधिक पक्षियों की विभिन्न प्रजातियां देखी जा सकती है। प्रकृति प्रेमी यहां वन्य जीवों तथा प्राकृतिक सौंदर्य छटा निहारने के लिए बड़े ही जोश और उत्साह से आते हैं।

गंगा नदी की धारा – हस्तिनानपुर में आप गंगा नदी के दर्शन भी कर सकते हैं। पर गंगा नदी की धारा मुख्य बाजार और मंदिरों से कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।


कैसे पहुंचे कहां ठहरें - मवाना से बिजनौर के मार्ग पर गणेशपुर से दाहिनी तरफ हस्तिनापुर का रास्ता मुड़ता है। वहां से हस्तिनापुर की दूरी महज पांच किलोमीटर है। हस्तिनापुर में रहने के लिए जैन धर्मशालाएं और कुछ सरकारी गेस्ट हाउस उपलब्ध है। आप मवाना या मेरठ रुककर भी हस्तिनापुर घूमने जा सकते हैं।

- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 

( ASHTAPAD JAIN TEERTH ,  MURTIKAR, HASTINAPUR ) 


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