Saturday, January 16, 2021

विशाल झील और फिरोजशाह तुगलक का मकबरा


हौज खास में डियर पार्क के पास एमसीडी की पार्किंग है। हालांकि ये पार्किंग काफी महंगी है। बाइक के लिए पहला घंटा 40 रुपये उसके बाद 20 रुपये घंटा। इस पार्किंग से हौज खास गांव की गलियों से होते हुए आप हौज खास स्मारक के प्रवेश द्वार तक पहुंच जाते हैं। अब इसमें प्रवेश के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने टिकट लगा दिया है। आप ये टिकट ऑनलाइन भी बुक कर सकते हैं। ये स्मारक सातों दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक खुला रहता है।

तो मध्य काल में निर्मित हौज खास किला दिल्ली कि सबसे प्राचीन इमारतों में से एक है। इस किले का निर्माण 1284 अलाउद्दीन खिलजी द्वारा किया गया था। इस किले को बनाने की शुरुआत अलाउद्दीन खिलजी द्वारा जलाशय और परिसर बनाने के साथ की गई थी। हौज मतलब फारसी में पानी की टंकी यानी जलाशय से है। खास मतलब शाही यानी राज परिवार के लिए।


हौज खास परिसर में एक मदरसा, एक झील, मस्जिद और फिरोजशाह तुगलक के मकबरे और छह मंडप बने हैं। फिरोजशाह तुगलक को मध्यकालीन इतिहास का सबसे प्रबुद्ध शासक माना जाता है। उसने दिल्ली की पांचवा शहर फिरोजाबाद बसाया था, जिसे अब फिरोजशाह कोटला के नाम से जाना जाता है। यह आईटीओ के पास स्थित है। फिरोजशाह ने देश में सैकड़ों नगर बसाए। कहा जाता है कि उसके नाम पर 350 से ज्यादा नगर बसे हैं। इस महान शासक के नाम पर मंडी हाउस के पास फिरोजशाह रोड है। पर इस शासक की मकबरा स्थित है हौज खास के इसी ऐतिहासिक स्मारकों के बीच में।


यहां पर फिरोजशाह के मकबरे के अलावा विशाल मध्यकालीन मदरसे के भवन को देखा जा सकता है। फिरोजशाह ने दिल्ली को इस्लामिक शिक्षा का बड़ा केंद्र बनाने की कोशिश की थी। यह उसके काल का एक धार्मिक विश्वविद्यालय हुआ करता था। इस मदरसे के पास एक छोटी मस्जिद और छह गुंबददार मंडप बने हुए हैं। तीन मंडप एक परिसर में तो तीन मंडप दूसरे परिसर में देखे जा सकते हैं। ये सभी 1352 से 1354 ईस्वी के आसपास के बने हुए हैं। 



उसके समय के निर्मित भवन बड़े मजबूत भी हैं। यहां पर भवनों की तीन स्तरीय संरचना देखी जा सकती है। इसमें लंबे गलियारे भी बने हुए हैं। इसके साथ बागीचों का भी निर्माण कराया गया था। यह सब मिलाकर बड़ा ही सुंदर नजारा पेश करते हैं। सबसे नीचे झील उसके दो तरह एल टाइप संरचना में ये स्मारक बने हैं। शाम को यहां पर डूबते हुए सूरज को देखना बड़ा भला लगता है। 


विशाल शाही जलाशय हौज खास जलाशय का निर्माण सिरी गांव के निवासियों को पानी की सप्लाई के लिए किया गया था। खिलजी के शासन में यह हौज-ए-अलई के रूप में जाना जाता था। पर फिरोजशाह तुगलक के शासन काल में इस जलाशय की फिर से खुदाई कराकर इसे उन्नत रूप प्रदान किया गया।


इस पानी के टैंक का क्षेत्रफल करीब 50 हेक्टेयर यानी 123 एकड़ में था।  इसकी चौड़ाई 600 मीटर और लंबाई 700 मीटर थी। वहीं यह करीब 4 मीटर गहरी हुआ करती थी। परंतु समय के साथ हुए अतिक्रमण के कारण इसके आकार में कमी आई है। 


सन 2004 में दक्षिण दिल्ली नगर निगम ने हौज खास के जलाशय का जीर्णोद्धार करवाया। अब इसमें सालों भर पानी रहता है। इसके चारों तरफ अब सुंदर वाकिंग ट्रैक बनाया गया है। इस पर लोग टहलते नजर आते हैं। जलाशय के साथ टहलते हुए आनंद की अनुभूति देता है। वहीं हौज खास के किले के मुंडेर से जलाशय का नजारा किया जा सकता है।



कैसे पहुंचे – अगर कहीं से भी मेट्रो  रेल से आ रहे हैं तो ग्रीन पार्क मेट्रो स्टेशन उतर जाइए। वहां से पैदल चलते जाइए कोई एक किलोमीटर तक  या फिर आटो रिक्शा करके हौज खास विलेज पहुंचिए। जैसी आपकी श्रद्धा और क्षमता।

-           विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com  

     ( HAUZKHAS, POND,  FIROZSHAH TUGKAK, DDA, SOUTH DELHI ) 

 


5 comments:

  1. रोचक....जल्द ही इधर जाया जाएगा....

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  2. हौज खास में प्राचीन स्मारक है, यह मालूम है, पर पूरी जानकारी न थी; जबकि हौज़ ख़ास के पास ही रहती हूँ। अब जाकर देखूँगी। धन्यवाद व शुभकामनाएँ।

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