Thursday, January 14, 2021

दादी-पोती का मकबरा - हौज खास



दक्षिण दिल्ली में हौज खास।  आप हौज खास से होकर अनगिनत बार गुजरे होंगे। पर क्या है हौज खास। दिल्ली के मानचित्र पर यह यह एक सुंदर ऐतिहासिक दर्शनीय स्थलों में शामिल है। स्थानीय लोग तो यहां खूब पहुंचते हैं पर दूर के सैलानी कम आते हैं। तो चलिए चलते हैं हौज खास की ओर। अगर मेट्रो रेल से आ रहे हैं तो ग्रीन पार्क मेट्रो उतरें। ठीक एम्स के बाद वाला मेट्रो स्टेशन। यहां से बाहर निकलने पर पर सड़क के उत्तरी तरफ फ्री चर्च के पास पहुंचे। यहां से एक सड़क अंदर की ओर जा रही है। पर यहां कोने पर ही एक ऐतिहासिक इमारत नजर आती है। दादी पोती का मकबरा।


यहां हमें दो मकबरे दिखाई देते हैं। इनमें से एक बड़ा है तो दूसरा छोटा। इस मकबरे को दादी-पोती का मकबरा क्यों कहते हैं इसके पीछे कई दंत कहानियां हैं। हौजखास में रहने वाले लोगों के मुताबिक इस पार्क में दादी पोती खेला करती थीं इसलिए इसके अंदर स्थित मकबरे को दादी और पोती का नाम दे दिया गया।


अनगढ़े पत्थरों से निर्मित और पलस्तर किए गए इन मकबरों की खास बात यह है कि पोती के मकबरे को पहले बनवाया गया था और बाद में दादी का मकबरा बनवाया गया। दादी पोती मकबरे की निर्माण शैली के जानकार बताते हैं कि इसे मध्य काल में बनवाया गया था। दोनों स्मारकों का निर्माण 1321 से लेकर 1526 के बीच हुआ होगा। हालांकि यह पता नहीं कि इन मकबरों में कौन दफन है। पर माना जाता है कि इनमें बड़ा वाला मकबरा मालकिन का है और छोटा वाला मकबरा सहायिका का।


दादी पोती के मकबरे से थोड़ा सा ही आगे चलने पर बायीं तरफ एक और ऐतिहासिक इमारत हमें नजर आती है। इसको देखकर मैं रुक जाता हूं। इस इमारत का नाम है बारह खंभा। यह भी एक मकबरा ही है इसकी इमारत बारह खंभो पर टिकी है। इसका निर्माण माना जाता है कि लोदी काल से पूर्व हुआ होगा।



दिल्ली के   कनाट प्लेस  से  आईटीओर  की तरफ जाने  वाली मार्ग का नाम बारहखंभा रोड है। पर यहां पर कोई बारह खंभा वाली इमारत दिखाई नहीं देती।  पर हमें  हौज खास में बारहखंभा नामक ये छोटी सी इमारत दिखाई दे जाती है। 



छोटी गुमटी संकरी गुमटी बारहखंभा के ठीक सामने दो और ऐतिहासिक इमारतें स्थित है। इसे संकरी गुमटी और छोटी गुमटी नाम दिया गया है। वास्तव में छोटी गुमटी की 15वीं सदी में बनी किसी स्मारक का  प्रवेश द्वार है। पर वह इमारत कौन सी थी इसका नहीं पता। शायद अब वह इमारत नष्ट हो गई हो। इसके आगे छोटी गुमटी दिखाई देती है। इन ऐतिहासिक इमारतों के आसपास अब हौज खास में संभ्रात कालोनी बस गई है। यह दिल्ली के सबसे महंगे इलाकों में शामिल है। 


ओड़िया समाज का जगन्नाथ मंदिर – इसी सड़क पर थोड़ी दूर आगे चलने पर एक विशाल सफेद सुंदर मंदिर नजर आता है। यह दरअसल ओड़िया समाज का मंदिर है। यह पुरी के जगन्नाथ मंदिर की अनुकृति है। इस मंदिर का प्रबंधन ओडिया समाज देखता है। मंदिर बाहर से बड़ा सुंदर नजर आता है।

इसी सड़क पर आगे चलते रहिए। ग्रीन पार्क अरविंदो मार्ग से कोई एक किलोमीटर अंदर जाने के बाद आप हौज खास विलेज के पार्किंग के पास पहुंच जाते हैं। यहां एक तरह डियर पार्क का प्रवेश द्वार है तो दूसरी तरफ पार्किंग है। हौज खास गांव में बाहरी वाहनो का प्रवेश निषेध है। उन्हे वाहन पार्किंग में लगाकर पैदल ही गांव की तरफ जाना होता है।

-           विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmaill.com (  DADI POTI TOMB, BARAH KHANBA, CHOTI GUMTI, HAUZKHAS) 

हौजखास मार्ग पर स्थित बारहखंभा का आंतरिक दृश्य। 





No comments:

Post a Comment