Saturday, January 2, 2021

दिल्ली का प्रचीन हनुमान मंदिर



दिल्ली के सबसे प्राचीन मंदिरों की बात की जाए तो उसमें हनुमान मंदिर का भी नाम आएगा। जब कनॉट प्लेस के आसपास जंगल हुआ करता था तब भी हनुमान मंदिर का अस्तित्व था। कभी वन क्षेत्र में स्थित ये मंदिर आज दिल्ली केंद्र में स्थित सबसे लोकप्रिय मंदिरों में से है। यह मंदिर बाबा खड़ग सिंह मार्ग पर स्थित है। यही रास्ता आगे गुरुद्वारा बंग्ला साहिब की ओर चला जाता है। 


तुलसीदास ने यहीं रची थी हनुमान चालीसा - यह माना जाता है कि यहां स्थित हनुमान जी स्वंयभू हैं। मतलब इसकी स्थापना किसी ने नहीं की। यहां  स्थित हनुमान जी की मूर्ति के माथे पर बालचंद्र अंकित है। यह  अपने आप में अदभुत  है। यह भी माना जाता है कि महाकवि तुलसी दास ने अपनी दिल्ली यात्रा के समय इस मंदिर में हनुमान जी के दर्शन किए थे। यह भी कहा जाता है कि यहीं पर उन्होंने हनुमान चालीसा की रचना की थी।



किसी आक्रमणकारी ने हमला नहीं किया -  तमाम मुस्लिम आक्रमण में भी इस मंदिर पर किसी ने भी हमला नहीं किया। इस मंदिर की वर्तमान इमारत आमेर के कछवाहा राजा मान सिंह ने (1540 -1614) ने बनवाई थी। वे अकबर के समकालीन थे। इसके बाद 1724 में जयपुर के राजा सवाई जय सिंह ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया। उन्होंने ही दिल्ली में जंतर मंतर का भी निर्माण कराया था।


इस हनुमान मंदिर में खास तौर पर मंगलवार और शनिवार को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। बड़े बड़े व्यापारी और राजनेता भी मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं। भक्त यहां हनुमान जी को मोदक और लड्डू चढ़ाते हैं। इस मंदिर में दिल्ली के कई वरिष्ठ लोग पहुंचते हैं। मुझे याद है वरिष्ठ पत्रकार बच्चन श्रीवास्तव हर मंगलवार और शनिवार को कई घंटे इस हनुमान मंदिर में गुजारते थे। 


हनुमान मंदिर के आसपास दो और छोटे-छोटे मंदिर हैं। एक मंदिर  दक्षिण भारतीय  शैली का भी है। मंदिर के बाहर सुंदर सा बाजार नजर आता है। यहां दिन भर रौनक बनी रहती है। इस बाजार में खास तौर पर मेंहदी रचाने वाली महिलाएं आपको बैठी नजर आएंगी। मंदिर परिसर में फूलों का भी बाजार लगता है। यह दिल्ली का प्रसिद्ध फूल बाजार है।



मंदिर के आसपास आपको भविष्य बांचने वाले ज्योतिषी भी अपनी दुकान सजाए मिल जाएंगे। मंदिर के आसपास देर रात तक रौनक रहती है। मंदिर के ठीक सामने सड़क पार करने के लिए अंडर पास बना है। इस अंडर पास में भी हाट बाजार है। मतलब की दिल्ली में टाइम पास के लिए यह सुंदर जगहों में से एक है।



हां अगर आप हनुमान मंदिर गए हैं तो स्ट्रीट फूड का स्वाद लेना न भूलें। मंदिर के आसपास खाने पीने की कई दुकाने हैं। पर इन दुकानों के बीच कचौड़ी सब्जी वाली दुकानें खास तौर पर लोकप्रिय हैं। एक कचौड़ी और साथ में आलू की सब्जी 20 रुपये में। तो 40 रुपये में दो कचौड़ी की प्लेट। कई लोगों के लिए यह अच्छा नास्ता हो जाता है। यहां पर कचौड़ी की तीन-चार दुकाने हैं। इनमें काकू कचौड़ी वाले अपने स्वाद के लिए जाने जाते हैं। मंदिर के ठीक बगल में मोहन सिंह पैलेस है। इस पैलेस के अंदर भी कुछ खाने पीने के विकल्प मौजूद हैं।



मंदिर के ठीक नीचे बेसमेंट में खादी हाट भी है। यहां पर आप खादी ग्रामोद्योग के उत्पाद छूट पर खरीद सकते हैं। सड़क के उस पार जाएं तो अलग अलग राज्यों के इंपोरियम आपका स्वागत करते हैं। बिहार से लेकर गुजरात, महाराष्ट्र, नगालैंड, त्रिपुरा सभी राज्यों के स्टोर यहां पर हैं। इन स्टोर से आप संबंधित राज्यों के उत्पाद खरीद सकते हैं।


मौसम के मिजाज के साथ हनुमान मंदिर के आसपास खाने पीने का अंदाज भी बदलता है। गरमी के दिनों में  इधर आप लस्सी का भी मजा  ले सकते हैं।  ठंडे स्वाद के साथ तरोताजा होकर  मिट्टी के  करुए में लस्सी पीते हुए आपको बनारस याद  आ सकता है। 

 
लस्सी पीकर जी भर जाए तो आसपास में घूमिए और थोड़ी बहुत खरीददारी भी कर लिजिए।  हां  हनुमान मंदिर के  आसपास साधुओं  और भिखारियों का भी जमावड़ा लगा रहता है। कुछ लोग  तो ये भी बताते हैं कि यहां भिखारियों का बड़ा रैकेट चलता है। यहां पर बैठने वाले भिखारी श्रद्धालुओं से मिलने वाले धन से  अच्छी कमाई करते हैं।  आप उनसे थोड़ा सावधान ही रहें। 

 - vidyutp@gmail.com 

(HANUMAN TEMPLE, BABA KHARAG SINGH MARG, DELHI, KAKU KACHAORI WALE, LASSI  ) 



1 comment:

  1. रोचक... मैं अक्सर इधर जाता रहता हूँ..मेरे एक मित्र भी हर हफ्ते शनिवार को इधर हाजिरी लगाते हैं....आभार....

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