Thursday, December 3, 2020

कहां गए अब वो सर्कस के जीवंत शो


कुछ साल पहले  पूर्वी दिल्ली के कड़कड़डूमा मैदान में  जब  द  ग्रेट रॉयल सर्कस का  कैंप लगा तो मैं बेटे को सर्कस दिखाने ले गया। साल में एक आध बार दिल्ली  एनसीआर में कोई सर्कस आ जाता है। पर अब नई पीढ़ी के लोग सर्कस  कम ही देखते हैं।   बचपन में हमारे  छोटे से शहर या कस्बे में सर्कस आ जाता था तो उसकी गली-गली में चर्चा होती थी।  रात को उसकी लाइटिंग दूर से नजर आती थी। सर्कस के आसपास दिन में मेला लग जाता था। 

सर्कस। नाम सुनते ही रोमांच होता है। मैंने पहला सर्कस देखा था 1979 में। वह था जेमिनी सर्कस। पटना के हार्डिंग पार्क में लगा था। हमलोग वैशाली जिले से स्टीमर से गंगा पार कर पटना पहुंचे थे। एक दिन रुक कर सर्कस का शो देखा था। तब सर्कस देखने का रोमांच हुआ करता था। पर अब सर्कस के शो शहरों में कम आते हैं। मोबाइल वीडियो गेम की दुनिया में सर्कस इतिहास बनते जा रहे हैं। किसी जमाने में देश में 300 से ज्यादा सर्कस कंपनियां हुआ करती थीं। आजकल सिमट कर दस से 12 रह गई हैं।



दो साल बाद 1981 में वैशाली जिले के छोटे से शहर महुआ में डायमंड सर्कस का शो देखा। महुआ में यह  सर्कस कई महीने तक चला। इसके बाद मुजफ्फरपुर में 1983 में अमर सर्कस देखा। यह सिकंदरपुर मैदान में लगा हुआ था।  तब यहां छात्रों का आई कार्ड दिखाने पर  40 फीसदी तक टिकट में छूट भी मिलती थी।

साल 2014 में दिल्ली के कड़कड़डूमा मैदान में बेटे को सर्कस दिखाने ले गया। यह था द ग्रेट रॉयल सर्कस। हालांकि साल 2002 के बाद सर्कस में जानवरों का शो दिखाने पर पाबंदी लग गई है। पर सर्कस देखने में आज भी वही रोमांच आता है। पर महानगरों में नई पीढ़ी के लोग सर्कस कम देखने जाते हैं। अब शो की कुर्सियां खाली नजर आती हैं।  





बात जेमिनी सर्कस की। यह बड़ा ही लोकप्रिय सर्कस हुआ करता था। सन 1951 में गुजरात के बिलिमोरा में स्थापित जेमिनी सर्कस को आप राजकपूर की लोकप्रिय फिल्म मेरा नाम जोकर में भी देख सकते हैं। इस फिल्म का लंबा हिस्सा जेमिनी सर्कस के साथ सूट हुआ था। फिल्म की कहानी सर्कस कलाकारों के जीवन के भावनात्मक पक्ष को भी बड़ी गहराई से उभारती है। बाद में 1989 में आई कमल हासन की फिल्म अप्पू राजा की भी जेमिनी सर्कस के साथ शूटिंग हुई है। कमल हासन इस फिल्म को शूट करने के लिए डेढ़ महीने जेमिनी सर्कस के साथ रहे।




मुझे सन 1979 में देखे गए जेमिनी सर्कस के तमाम दृश्य आज भी आंखों के सामने याद आते हैं। हर थोड़ी देर पर नन्हा जोकर आता था। उसके करतब हंसा कर लोटपोट कर देते थे। मौत का कुआं और शो के अंत में जालियों के अंदर जिमनास्टों के करतब रोमांचित करते थे। रात की रोशनी में ये शो गजब के लगते थे। तब हाथी भी कई करतब दिखाते थे। जेमिनी सर्कस के उदघोषक  उस दिन बीच बीच में बता रहे थे कि 18 दिन तक पटना में और शो चलने वाला है। इसके बाद यह सर्कस ओडिशा के भुवनेश्वर में चला जाएगा।

कभी अत्यंत लोकप्रिय रहा जेमिनी सर्कस अब किस हाल में है, आपको पता है। आजकल जेमिनी सर्कस वाले भी सर्कस की घटती लोकप्रियता से काफी निराश हैं। घाटे में चलने के कारण कई नामचीन सर्कस तो अब बंद हो चुके हैं। पर जो चल रहे हैं, उनके कलाकारों में भी निराशा है।  उन्हें पहले जैसा वेतन सुविधाएं नहीं मिलती।



कलाबाज और द ग्रेट रेमन सर्कस -  महान अभिनेता देवानंद की 1977 में आई फिल्म कलाबाज भी सर्कस पर केंद्रित है। इस फिल्म की शूटिंग द ग्रेट रेमन सर्कस के साथ की गई है। इस फिल्म की शुरुआत ही सर्कस के इंट्रो के साथ होती है। फिल्म की अभिनेत्री जीनत अमान हैं। ग्रेट रेमन सर्कस की स्थापना 1920 में हुई थी। यह देश के प्राचीनतम सर्कस में से एक है।    


मेरी इच्छा होती है आज भी थोड़े अंतराल पर सर्कस का शो देखने की, क्योंकि यह लाइव शो  होता है।  ऐसा एहसास और कहां मिलेगा।   पर अब शहरों में सर्कस कम ही आते हैं। लोगों ने सर्कस की उपेक्षा तो की ही है, केंद्र और राज्य सरकारें भी सर्कस को लेकर ज्यादा फिक्रमंद नहीं हैं। आपको पता है देश में सिर्फ केरल सरकार है ऐसी है जो सर्कस के कलाकारों के पेंशन देती है।

- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 

( GAMINI CIRCUS, THE GREAT REMON CIRCUS, AMAR CIRCUS ) 
फिल्म अप्पू राजा में कमल हासन। 

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