Tuesday, December 1, 2020

राजदूत मोटरसाइकिल - कभी थी शान की सवारी

राजदूत मोटरसाइकिल। हमारे बचपन में एक मोटरसाइकिल हुआ करती थी राजदूत। वैसे तो एजडी और बुलेट भी थीं पर राजदूत आम लोगों की बाइक हुआ करती थी। सबसे लोकप्रिय। अपनी तमाम कमियों के बावजूद राजदूत का कई मामलों में जवाब नहीं था। इसकी एक मिनी बाइक भी हुआ करती थी -जीटीएस। हमारे घर राजदूत का आगमन हुआ फरवरी 1980 में। वह काले रंग की राजदूत मोटरसाइकिल थी। इसे हाजीपुर के डाकबंगला रोड पर  स्थित राजेश एजेंसी से खरीदा गया था। कीमत भी मुझे याद है 8,007 रुपये में। एसेसरीज लगवाने में थोड़ा खर्च और आया था। यह राजदूत 1989 तक हमारे साथ रही। उसके बाद दूसरी राजदूत खरीदी गई वह नीले रंग की थी। उसका भी लंबे समय तक साथ रहा।  सन 2009 में जब पिताजी हाजीपुर से  बैंक की नौकरी से रिटायर होने के बाद सासाराम में  रहने लगे तो वह बाइक भी साथ आई। पर बाद में उसे कोई रिश्तेदार ले गया। 

एक बार दिल्ली में चिड़ियाघर के बाहर दो लोग राजदूत मोटर साइकिल पर सवार मिल गए तो अपने बचपन की राजदूत याद आ गई। तो 175 सीसी की राजदूत बाइक में तीन स्पीड गियर हुआ करते थे। सबसे नीचे एक नंबर फिर न्यूट्रल उसके बाद दो और तीन। आजकल फोर स्ट्रोक की की बाइक में चार स्पीड गियर होते हैं। पर राजदूत टू स्ट्रोक की बाइक हुआ करती थी। इसकी अपनी कुछ परेशानियां थीं। हर बार पेट्रोल के साथ उचित मात्रा में मोबिल आयल मिलाना पड़ता था। अगर दो घंटे से ज्यादा समय से गाड़ी का इंजन बंद है तो इसे चोक लगाकर ही स्टार्ट करना पड़ता था। 

राजदूत की सर्विसिंग में भी ज्यादा समय लगता था। वर्कशॉप में जाने के बाद दिन भर लग जाते थे। मैं बचपन में सर्विसिंग के दौरान दिन भर बाइक के साथ वर्कशॉप में रहता था। इससे मुझे इसकी काफी मेकेेनिकल समझ हो गई थी।   
इसका एक फायदा यह हुआ है कि मैं बड़ी जल्दी बाइक चलाना सीख गया। क्योंकि मुझे स्टार्ट करना, क्लच, गियर, एक्सलरेटर, ब्रेक आदि के फंक्शन मालूम हो गए थे। तो चौथी कक्षा में पढते हुए मैंने राजदूत की जीटीएस बाइक और छठी में आने पर राजदूत 175 सीसी बाइक को चला दिया था।

राजदूत को एस्कार्ट्स कंपनी बनाती थी। इसका प्लांट फरीदाबाद में था। अस्सी के दशक में हाजीपुर की एजेंसी को हर महीने सिर्फ छह बाइक मिलती थी। सारी बिक जाती थी। 1985-86 में राजदूत खरीदने के लिए एक साल का नंबर भी लगने लगा था। पर बाद के दौर में हीरो होंडा समेत 4 स्ट्रोक की बाइक का बाजार बढ़ने के बाद राजदूत की लोकप्रियता कम होने लगी। जहां तक मेरी जानकारी है राजदूत भारत में 1962 से बन रही थी। कंपनी ने पोलैंड की बाइक एसएचएल एम 11 से तकनीक लेकर इस बाइक का निर्माण किया था। पर कंपनी ने सन 2000 से पहले इसका निर्माण बंद कर दिया। एस्कार्ट कंपनी अब जापान के सहयोग से 4 स्ट्रोक की बाइक यामहा बनाने लगी थी।


लोहा कभी पुराना नहीं होता - एक बार हाजीपुर में मुझे एक सज्जन मिले जो 1966 मॉडल की राजदूत मोटर साइकिल को 1990 में भी चला रहे थे। उन्होंने शान से कहा, लोहा कभी पुराना नहीं होता। वे हाजीपुर में डाक बंगला रोड पर  स्थित राजदूत के मैकेनिक गौरी शंकर के यहां उसकी सर्विसिंग कराने आते थे। अभी भी आपको ओएलएक्स पुराने राजदूत बेचने के विज्ञापन मिल जाएंगे। राजदूत के प्रशंसकों के क्लब भी हैं। पर तकनीकी तौर पर राजदूत फोर स्ट्रोक के बाइक जैसी कामयाब तो नहीं थी। इसका प्लग अक्सर शार्ट कर जाता था। हमें लंबी यात्राओं के दौरान बाइक की डिक्की में अतिरिक्त प्लग लेकर चलना पड़ता था। राजदूत का इंजन भी 40 से 50 हजार किलोमीटर के सफर के  बाद खुल जाता था। जबकि 4 स्ट्रोक की गाड़ियां बिना इंजन खुले एक लाख किलोमीटर तक चल जाती हैं।


कच्चे पक्के रास्तों का हम सफर-  इस राजदूत मोटर साइकिल से हमने गांव गांव का दौरा किया था। वैशाली जिले से चलकर भोजपुर रोहतास जिले में अपनी रिश्तेदारी में हम इस बाइक से घूमते थे। तब बिहार के गांव में सड़के नहीं थीं या बहुत खराब हाल में कच्ची सड़के थीं। राजदूत उबड़-खाबड़ सड़कों और खेतों, पगडंडियों से भी निकल जाती थी। छोटे मोटे गड्ढे से पार कर जाती थी। ऐसे रास्तों में स्कूटर कामयाब नहीं हो सकते थे। माइलेज की बात करें तो यह एक लीटर पेट्रोल में आदर्श स्थित में 40 से 45 किलोमीटर चली जाती थी।

दूध वालों की बाइक - जब मैं सन 1999 में पंजाब पहुंचा तो पता चला कि यहां पर राजदूत दूध वालों की लोकप्रिय बाइक है। गांव से शहर दूध बेचने वाले इसके दोनों तरफ दो विशाल कंटेनर लटकाकर दूध बेचने शहर आते थे। 175 सीसी का इंजन होने के कारण यह काफी माल ढोने में सक्षम थी।   अब तो दूध वाले 4 स्ट्रोक वाली बाइकों का भी इस्तेमाल करने लगे हैं। इन तमाम बातों के बीच राजदूत ने 70 से 90 के दशक तक भारत की बाइक इंडस्ट्री पर राज किया। इसके मुकाबले में कोई दूसरी बाइक खड़ी नहीं हो सकी।
-         विद्युत प्रकाश मौर्य – vidyutp@gmail.com

-         (RAJDOOT, ESCORTS, YAMHA, FARIDABAD, PUNJAB, BIHAR ) 

5 comments:

  1. मेरे पास बॉबी राजदूत (GTS) थी :-)

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    1. धन्यवाद, आपके पास उसकी कोई फोटो है तो साझा करें

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  2. वाकई में यह जानदार बाइक थी।
    आज भी इसका तोड नहीं है।
    थोडा अपडेट कर पुनः बाजार में उतारनी चाहिए थी।

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    1. जी बिल्कुल, उसका 4 स्ट्रोक वर्जन आना चाहिए था

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  3. मेरा हम सफर राजदूत 175सीसी
    बचपन क्या बाइक थी, 4स्टौक वर्जन आना चाहिए।
    कब तक जागी जिसे मक्केक गाड़ी भी कहा जाता है भाई यह मार्केट में कभी भी आए सबसे पहले मुझे बताना भाई

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