Monday, October 26, 2020

सयाजीराव गायकवाड लाइब्रेरी और वो हसीन शामें


काशी हिंदू विश्वविद्यालय में पढ़ाई के वक्त लंबा वक्त बीएचयू के सेंट्रल लाइब्रेरी में गुजरता था। इसका नाम सयाजीराव गायकवाड लाइब्रेरी है। कुल पुस्तक संग्रह में देश के बड़े पुस्तकालयों में शुमार है। तब गूगल नहीं था। किसी भी लेख लिखने के लिए शोध करने के लिए लाइब्रेरी मुफीद जगह थी। पत्रकारिता के शुरुआती दौर में इस लाइब्रेरी का मैगजीन सेक्शन मेरे काफी काम आया।  पुराने रेफरेंस तलाश करने के लिए मैं यहां घंटो बैठता था।


पुस्तकालय का दो मंजिला विशाल भवन है। यह भवन भी नागर शैली में बना है। पढ़ाई करते करते भूख लगे तो बाहर निकलकर बीएचयू विश्वनाथ मंदिर के पास की दुकानों पर थोड़ी सी पेट पूजा और फिर वापस लाइब्रेरी के टेबल पर। कई बार तो रात के 10 बज जाते थे पुस्तकालय में। तब पुस्तकालय सारी रात नहीं खुलता था। कई बार पढ़ाई के साथ कुछ अच्छे दोस्त मिल जाते। फिर शाम और यादगार हो जाती। मंदिर के बाहर आम के पेड़ के नीचे चाय की चुस्की फिर पढ़ाई। बीएचयू के ठीक मध्य में विश्वनाथ मंदिर और मल्टी परपस हॉल के बीच में पुस्तकालय की विशाल इमारत स्थित है।


तो आइए जानते हैं इस विशाल लाइब्रेरी के बारे में। सयाजीराव गायकवाड पुस्तकालय  काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ( बीएचयू) का मुख्य पुस्तकालय है। इसको यहां पर केन्द्रीय पुस्तकालय भी कहते हैं। इसकी स्थापना बीएचयू की स्थापना के एक साल बाद यानी 1917 में हुई थी। पर इसके वर्तमान भवन का निर्माण 1941 में हुआ। यह ब्रिटिश संग्रहालय की तर्ज पर बनाया गया है। इसके निर्माण के लिए बड़ौदा (वडोदरा) के महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ से दान प्राप्त हुआ था। उस समय महाराजा ने दो लाख रुपये का बड़ा दान दिया था। सयाजी राव गायकवाड बीएचयू के कुलाधिपति भी रहे।


दरअसल सयाजीराव गायकवाड देश में पुस्तकालय आंदोलन के बड़े प्रणेता थे। सार्वजनिक पुस्तकालय व्यवस्था की व्यापक परिकल्पना बड़ौदा के इस शासक ने पेश की थी। अपने साम्राज्य के हर जिले में 1893 में सामुदायिक शिक्षा का अनिवार्य कार्यक्रम चलाने वाले गायकवाड ने 1907 में अपने पूरे साम्राज्य में सभी लड़कों और लड़कियों के लिए शुरुआती शिक्षा अनिवार्य कर दिया था। उन्होंने 1910 में सार्वजनिक पुस्तकालय की व्यवस्था पेश की, क्योंकि उन्हें यह महसूस हुआ कि सार्वभौम शिक्षा के लिए मुफ्त सार्वजनिक पुस्तकालय का होना बहुत जरूरी हैं। 

उन्होंने अपने राज्य में अलग से लाइब्रेरी विभाग बनाया और एक अंग्रेज विद्वान डब्ल्यू ए. बोर्डन को राज्य के पुस्तकालयों का पहला पूर्णकालिक निदेशक नियुक्त किया। अपनी राजधानी बड़ौदा में उन्होंने एक सेंट्रल लाइब्रेरी बनाई। इसमें उनके निजी संग्रह की करीब 20 हजार पुस्तकों सहित लगभग 90 हजार पुस्तकें शुरुआत में रखी गईं। उन्होंने शिक्षा को कितना महत्व दिया इससे पता चलता है कि जब भारत परतंत्र था उस समय सयाजीराव गायकवाड के राज्य में 97 प्रतिशत से भी अधिक साक्षरता दर थी। वे स्वयं वर्ष में तीन महीने विदेशो में जाकर वहां की शिक्षा व्यवस्था देखते थे। बाद उसे अपने यहां अमल में लाते थे।
पब्लिक लाइब्रेरी मूवमेंट के संस्थापक वडोदरा के महाराजा सयाजीराव गायकवाड का जन्म 11 मार्च, 1863 को हुआ था। उनका मूल नाम गोपालराव गायकवाड था। वे एक चरवाहे के बेटे थे। गायकवाड का मतलब होता है गाय चराने वाले। इस महान शासक की मृत्यु 6 फरवरी, 1939 को हुई।

बात फिर बीएचयू के सेंट्रल लाइब्रेरी की। लाइब्रेरी में प्रवेश करते ही आप विशाल गोलाकार अध्ययन कक्ष से रूबरू होते हैं। इसकी आंतरिक भव्यता देखते बनती है। पुस्तकाल में मौजूद ज्यादातर पुस्तकों की अपनी बाइंडिंग होती है। साल 2020 के अपडेट के मुताबिक यहां कुल 9 लाख 37 हजार 756 वाल्यूम का संग्रह है। परिसर मे स्थित अन्य सहायक और विभागीय लाइब्रेरी का संग्रह जोड़ लिया जाए तो कुल 13 लाख से ज्यादा पुस्तकों का संग्रह है। तो ऐसी अनूठी है बीएचयू की लाइब्रेरी।

डिजिटल लाइब्रेरी  - साल 2018 में बीएचयू के सेंट्रल लाइब्रेरी ने नई सुविधा शुरू की। अब बीएचयू के विद्यार्थी और शिक्षक विश्वविद्यालय द्वारा डिजिटल लाइब्रेरी के जरिये सब्सक्राईब किए गए ऑनलाइन जर्नल्स को अपने घर से भी पढ़ सकते है। शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को दिए गए यूजर आईडी एवं पासवर्ड से इस सुविधा का लाभ लिया जा सकता है। वहीं साल 2019 में बीएचयू के लाइब्रेरियन प्रोफेसर एचएन प्रसाद को बेस्ट लाइब्रेरियन के अवार्ड से सम्मानित किया गया।
-         विद्युत प्रकाश मौर्य – vidyutp@gmail.com  
-         ( BHU LIBRARY, SYAJI RAO GAYAKWAD, VARANASI, COLORS OF BANARAS)


1 comment:

  1. अपने आप में बहुत खास है ये लाइब्रेरी, बढिया प्रस्तुति

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