Thursday, November 5, 2020

दूध पीयो, कसरत करो, नित्य जपो हरिनाम

 


काशी हिंदू विश्वविद्यालय में प्रवेश करने के बाद मेडिकल चौराहे से दाहिनी तरफ वाली सड़क पर मुड़े। मेडिकल कॉलेज और हॉस्पीटल के बाद मालवीय भवन आता है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय में मदन मोहन मालवीय जितने साल तक वाइस चांसलर रहे, इसी आवास में रहे। बाद में उनकी स्मृति में ये भवन उनके नाम कर दिया गया। पर यह सिर्फ भवन नहीं है। यहां पर मालवीय जी के जीवन से जुड़ा हुआ एक संग्रहालय है।  महामना अपने पास आने वाले विद्यार्थियों को हमेशा संदेश दिया करते थे -  दूध पीयोकसरत करोनित्य जपो हरिनाममन लगाय विद्या पढ़ो, पुरे होंगे सब काम। मतलब साफ है कि मालवीय जी पढ़ाई से पहले सेहत को प्राथमिकता दिया करते थे। उनके जमाने में बीएचयू में एक गौशाला भी हुआ करती थी।

24 घंटे खुले रहते थे द्वार - जब तक मालवीय जी बीएचयू के वीसी रहे, उनके आवास के दरवाजे छात्रों के लिए 24 घंटे खुले रहते थे। छात्र कभी भी अपनी समस्याएं लेकर उनके पास चले जाते थे। वे उनको कभी निराश करके नहीं लौटाते थे। कभी ऐसा नहीं हुआ कि किसी गरीब छात्र के पास फीस भरने के लिए पैसे नहीं हैं तो उसकी पढ़ाई रुक गई हो।

मालवीय भवन में विशाल सभागार - साथ ही एक विशाल सभागार का निर्माण कराया गया है। इस सभागार में सालों भर छोटे बड़े आयोजन होते रहते हैं। पांच साल बीएचयू का छात्र रहते हुए हमने कई बार इस सभागार में होने वाले कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। कई बार तो मैं यहां के कार्यक्रमों का आयोजक बन गया। प्रथम वर्ष का छात्र रहते हुए गुरुवर राकेश पांडे की प्रेरणा से एक संस्था बनाई – सामाजिक विचार मंच। इस बैनर के तले मालवीय भवन में एक सेमिनार करा डाला। विषय था – खाड़ी युद्ध हमारी चुनौतियां और दायित्व। इसमें वक्ता थे, प्रोफेसर हरिहर नाथ त्रिपाठी, सुबेदार सिंह जैसे लोग। आयोजन सफल रहा। छात्रों की अच्छी भागीदारी रही।

योगासन में डिप्लोमा पाठ्यक्रम -  इसी मालवीय भवन में हमारे समय में योगासन में एक सार्टिफिकेट और डिप्लोमा पाठ्यक्रम भी संचालित होता था। यह अंशकालिक कोर्स हुआ करता था। छात्र जीवन में मैंने भी इस पाठ्यक्रम में नामांकन लिया था। हालांकि कुल कक्षा में मेरी उपस्थिति कम होने के कारण मुझे प्रमाण पत्र नहीं मिल पाया था। 

यहां हमने राष्ट्रीय सेवा योजना के कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। कई बार इस सभागार के मंच में लघु नाटकों में भी हिस्सा लिया था। मालवीय भवन के सभागार में कभी मनोज तिवारी का कार्यक्रम होता था, तो बाहर से आने वाले तमाम विद्वानों की बौद्धिक संगोष्टी। यहीं पर मुझे कई राष्ट्रीय नेताओं और आध्यात्मिक संतों को सुनने का मौका मिला।
दत्तोपंत ठेंगडी, वीरेश्वर उपाध्याय जैसे कई नाम हैं। दो सौ से तीन सौ लोगों के जुटान वाले कार्यक्रम के लिए ये सभागार आदर्श है। इसमें आयोजन करने के लिए बिना शुल्क आवंटन होता था। हां माइक ( ध्वनि विस्तारक यंत्र) लगाने के लिए बीएचयू के प्रॉक्टर से अनुमति लेनी पड़ती थी। 

फिर छीड़ी बात फूलों की – महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की जयंती के उपलक्ष्य में 19 से 26 दिसंबर तक विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन होता है। मालवीय भवन का विशाल उद्यान है। इसमें हर साल दिसंबर 25 और 26 दिसंबर को फूलों की प्रदर्शनी लगती है।

25 दिसंबर को मालवीय जी का जन्मदिन होता है। प्रदर्शनी में तमाम उद्यान और निजी लोग हिस्सा लेते हैं। श्रेष्ठ फूलों को पुरस्कार भी दिया जाता है। इन फूलों की प्रदर्शनी में घूमने का सुख यूं होता था मानो स्वर्ग की क्यारी में विचरण कर रहे हों। वह गीत याद आता है – फिर छिड़ी बात फूलों की... रात है या बारात फूलों की...

-         - विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
-         ( BHU DAYS, MALVIYA BHAWAN, RANG BANARAS )

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