Saturday, December 5, 2020

आओ करें किताबों से दोस्ती - दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी


पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के सामने स्थित दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी दिल्ली के लोकप्रिय पुस्तकालय में से एक है। तो इस विशाल लाइब्रेरी  के अंदर  आपको हर उम्र के लोग पढ़ाई करते हुए मिल जाएंगे। बच्चे भी, कॉलेज के छात्र भी बुजुर्ग भी।  दिल्ली के दिल में मौजूदगी  इसका महत्व और बढ़ा देती है।

दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी की स्थापना साल 1951 में की गई थी। लाइब्रेरी का उद्घाटन भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के द्वारा 27 अक्टूबर 1951 को किया गया। इस पुस्तकालय को यूनेस्को द्वारा वित्तीय सहायता मिलती है। यह भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अधीन आता है। इसकी शुरुआत पुरानी दिल्ली में एक छोटे से पुस्तकालय के तौर पर हुई थी। पर अब यहां पुस्तकों का विशाल संग्रह है। दिल्ली में रहने वाली कई पीढ़ियां यहां से पुस्तकें पढ़कर अपनी प्रतिभा को निखार चुकी हैं। डीपीएल के पास तमाम ऐसी पुस्तकों का संग्रह है जो अब अप्राप्य हैं।

1944 में डालमिया के दान से बना भवन - दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी का भवन आईकोनिक है। पुस्तकालय बनाने की परियोजना 1944 में ही आरंभ हो गई थी। इस भवन की आधारशिला 5 फरवरी 1944 को रखी गई थी। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान ब्रिटिश आर्मी के कमांडर इन चीफ फील्ड मार्शल सर क्लाउड आउचिनलेक के आग्रह पर इस भवन के निर्माण के लिए सेठ रामकृष्ण डालमिया ने बड़ा दान किया था। इस भवन पर लगे पत्थर में इस बात की जानकारी दी गई है। आउचिनलेक 1947 तक भारत में ब्रिटिश आर्मी के कमांडर इन चीफ रहे।

दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी में लिंग, जाति, भेद, धर्म के भेदभाव के बिना सभी लोगों को मुफ्त में प्रवेश दिया जाता है। यहां कोई भी जाकर बैठकर किताबें पढ़ सकता है। दिल्ली के निवासी  हैं तो आपके लिए सदस्यता भी निःशुल्क हुआ करती थी। हां दिल्ली से बाहर के लोगों को सदस्य बनने के लिए सुरक्षा राशि जमा करनी पड़ती है। पर साल 2020 में मामूली सदस्यता के लिए शुल्क का प्रावधान कर दिया गया है।

समय-समय पर कई आयोजन कर लाइब्रेरी प्रतिभाओं को निखारने का भी काम करता है। समय के साथ डीपीएल में नई नई सुविधाएं जोड़ी गई हैं। यहां पर हाईस्पीड इंटरनेट कनेक्शन के अलावा डीवीडी, सीडी, आडियो, वीडियो कैसेट, ग्रामोफोन  रिकॉर्ड का संग्रह है। अब यहां ब्रेल लाइब्रेरी, मोबाइल लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं भी दी जाने लगी हैं। 

देश के चार प्रमुख पुस्तकालयों में एक - दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी भारत की संसद द्वारा पुस्तकों और समाचार पत्रों (सार्वजनिक पुस्तकालयों) के वितरण से संबंधित अधिनियम 1954 (1956 में संशोधित) के तहत चार प्राप्तकर्ता पुस्तकालयों में से एक है। इस अधिनियम के तहत दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी भारत में प्रकाशित पुस्तकों की एक प्रति मुफ्त में प्राप्त करने की अधिकारी है।

दिल्ली में 36 डीपीएल की शाखाएं - डीपीएल में स्कूली बच्चों के लिए अलग से सेक्शन बनाया गया है। वहां बच्चों  की अभिरुचि के अनुरूप पुस्तकें संग्रह में रखी गई हैं। अब पाठकों की सुविधा के लिए दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी ने दिल्ली के अलग अलग हिस्सों में अपनी 36 शाखाएं भी खोल रखी हैं।

अब एनसीआर में भी विस्तार -  साल 2019 में दस मार्च को दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में भी अपनी सेवाएं देनी आरंभ कर दी है।    इसकी शुरुआत दिल्ली से  सटे नोएडा से की गई है।

पुस्तकालय की सदस्यता – दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी का सदस्य बनने के लिए अगस्त 2020 से फीस का प्रावधान कर दिया गया है। अब एनसीआर के रहने वालों को 100 रुपये की फीस देनी होगी। वहीं बीपीएल कार्ड धारकों को 25 रुपये सदस्यता शुल्क के तौर पर चुकाना होगा।

खुलने का समय – पुस्तकालय के खुलने का समय आम दिनों में सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक है। वहीं रविवार और अवकाश के दिन सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे तक खुलता है। 

दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी की कुल शाखाएं : 36
बैठने की कुल क्षमता लगभग - 1900
कुल सदस्यता संख्या -  1 लाख 87 हजार से अधिक।
डीपीएल में पुस्तकों का कुल संग्रह: 20 लाख से अधिक।
-- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
( DELHI PUBLIC LIBRARY, BOOKS, OLD DELHI RAILWAY SATATION ) 




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