Wednesday, December 9, 2020

सर्द रात में गोल्डेन टेंपल मेल से जालंधर तक का सफर

वह नौ दिसंबर 1999 की सर्द रात थी। मेरठ सिटी रेलवे स्टेशन से पत्रकारों का एक समूह गोल्डेन टेंपल मेल में सवार हुआ। यह सफर बहुत लंबा नहीं था,  पर यादगार था। कई लोगों के जीवन में बदलाव लाने वाले सफर। सबके मन में रोमांच था। एक नए राज्य में जाकर पत्रकारिता करने का। कई लोग तो पहली बार ही पंजाब जा रहे थे। हालांकि मैं इससे पहले 1993 में सदभावना रेल यात्रा के दौरान पंजाब के कई शहरों में घूम चुका था। मुझसे मेरठ में साक्षात्कार में रामेश्वर पांडे और राजेश रापरिया जी ने पूछा हम आपको पंजाब भेजेंगे। मैंने कहा, मैं उस राज्य में घूम चुका हूं और मुझे वहां जाकर अच्छा लगेगा।

हम सब लोगों की मेरठ में एक महीने से ज्यादा समय की ओरिएंटेशन ट्रेनिंग हो चुकी थी। इस दौरान हमारे शिक्षक वरिष्ठ पत्रकार विजय विनीत हमें कंप्यूटर सीखा रहे थे। क्योंकि यह वह दौर था जब पत्रकारों का कार्य कागज कलम से पूरी तरह कंप्यूटर पर शिफ्ट हो रहा था। यानी खबरें लिखना, संपादन और पेजमेकिंग सब कुछ कंप्यूटर पर।  उन्होंने हमें हिंदी टाइपिंग के लिए इनस्क्रिप्ट कीबोर्ड ही सीखने की सलाह दी, क्योंकि यह रेमिंगटन की तुलना में  आसान है। 

तो नए पुराने सभी पत्रकारों के लिए कंप्यूटर सीखना जरूरी था। अमर उजाला ने पंजाब के लिए पत्रकारों की बहाली के लिए राष्ट्रव्यापी प्रवेश परीक्षा और साक्षात्कार का आयोजन किया था। अखबार में छपे विज्ञापन पर हजारों लोगों ने आवेदन किया था। उसमें से 500 लोग प्रवेश परीक्षा के लिए बुलाए गए। लिखित परीक्षा पास करने वाले साक्षात्कार के लिए बुलाए गए। जो पहला 10 लोगों का बैच चयनित हुआ उसमें मैं भी था। नवंबर महीने में मेरठ में अलग अलग चरणों में 50 के करीब लोग पंजाब के लिए योगदान दे चुके थे।

इस दौरान अमर उजाला ने पहले हमें दिल्ली रोड पर अंबर होटल में ठहराया था। वहीं होटल में हमारा परिचय शिव कुमार विवेक जी से हुआ जो नई दुनिया इंदौर से आए थे। विजय शंकर पांडे और नवीन श्रीवास्तव कोलकाता से आए थे। किशोर झा और कुमार भावानंद हमसे पहले से ज्वाएन करके उसी होटल में रह रहे थे। प्रवेश परीक्षा और साक्षात्कार के दौरान मेरा परिचय सुधीर राघव से हुआ। मैं सुधीर राघव और अमिताभ श्रीवास्तव अंबर होटल और उसके बाद मेरठ के घंटा घर के पास स्थित पाल होटल में एक महीने से ज्यादा समय तक एक ही कमरे में रहे। इस दौरान घंटा घर के पास एक मारवाड़ी बासा में हमलोग रात्रि भोजन के लिए जाया करते थे। इसी दौरान एक दिन मेरठ के जाने माने फोटोग्राफर ज्ञान दीक्षित के पास जाना हुआ। उन्होंने मेरी और सुधीर राघव की यादगार पोट्रेट फोटो खींची।

मेरठ अमर उजाला में प्रशिक्षण के दौरान खेल पत्रकार पद्मपति शर्मा, फीचर में काम कर रहे वरिष्ठ पत्रकार योगेंद्र कुमार लल्ला से परिचय हुआ। ट्रेनिंग के दौरान हमारे दिन मस्ती में गुजर रहे थे। हमलोग कुछ घंटे टाइपिंग अभ्यास करते फिर कुछ घंटे अमर उजाला की लाइब्रेरी में बैठकर पढ़ाई करते।

इस बीच कई पुराने साथी ओम प्रकाश तिवारी, ह्रदय नारायण मिश्र, पुरुषोत्तम शर्मा, अरविंद शर्मा, संतोष कुमार सिंह ने भी अमर उजाला मेरठ योगदान दे दिया था। मेरठ में हमारे दिन अच्छे कट रहे थे। इसी बीच एक दिन हमें पंजाब कूच करने का फरमान जारी कर दिया गया।

मैंने रेलवे स्टेशन जाकर अपने कई साथियों का आरक्षण करा लिया। नौ दिसंबर की रात पंजाब मेल में सर्वश्री अजय शुक्ला, अनिल पांडे, नवीन पांडे, नवीन श्रीवास्तव, विजय शंकर पांडे, इष्टदेव सांकृत्यायन ( पांडे), राजीव तिवारी, अमिताभ श्रीवास्तव, धर्मेंद्र प्रताप सिंह,  सुधीर राघव समेत कई साथी सवार हुए। ये ट्रेन मुंबई से दिल्ली होकर वाया मेरठ अमृतसर जाती है। रात नौ बजे के बाद हमलोगों ने स्लिपर क्लास में जगह ली। पर किसी की आंखों में नींद नहीं थी। सारी रात गप्पे लड़ाते हुए कटी। अनिल पांडे के ठहाके और अजय शुक्ला जी अनुभव जन्य ज्ञान की बातें। इस बीच ट्रेन अंबाला क्रॉस करके पंजाब में प्रवेश कर गई। राजपुरा, खन्ना जैसे स्टेशन रात में गुजर रहे थे।

सर्द रात में पंजाब के जगमग गांव देखकर अनिल पांडे ने कहा, मुफ्त की बिजली है, जितनी जलाओ। दरअसल उन दिनों पंजाब में बादल सरकार ने बिजली मुफ्त दे रखी थी। सबके लिए। पंजाब  सबसे बड़े शहर लुधियाना को पार करके हमारी ट्रेन सुबह पांच बजे जालंधर पहुंची। अनिल पांडे अमृतसर चले गए क्योंकि उनकी पोस्टिंग गुरदासपुर जिले के बटाला में हुई थी। हम सब लोग जालंधर सिटी स्टेशन के बाहर आए तो अमर उजाला की एक वैन हमारा इंतजार कर रही थी। हम सब लोगों को कपूरथला रोड पर स्पोर्ट्स एंड सर्जिकल गुड्स कांप्लेक्स ले जाया गया जहां अमर उजाला का नया प्रेस लगा था। प्रेस के ठीक पीछे एक भवन में हमारे रहने का अस्थायी इंतजाम किया गया था।

रात भर के जगे हमलोग जाकर डारमेटरी हॉल के खाटों पर सो गए। दोपहर में हमारी नींद खुली तो मैं और सुधीर राघव शहर की ओर निकले। कंपनी बाग चौक पर कोआपरेटिव बैंक में कार्यरत अपने पुराने साथी अमरीक सिंह जी से मिला। उन्होंने हमें छोले भठूरे खिलाए। अमरीक भाई ने कपूरथला रोड में बस्ती बावा खेल में रहने वाले कुछ साथियों का पता दिया। जो रहने के लिए मकान तलाशने में हमारी मदद करेंगे।

-      - विद्युत प्रकाश मौर्य vidyutp@gmail.com 
( (MEERUT CITY, MTC, JALLANDHAR CITY, JRC, AMAR UJALA, 1999 ) 
अमर उजाला का मेरठ दफ्तर । 



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