Tuesday, October 20, 2020

यहां हुआ रावण का जन्म – इस गांव में दशहरे में रावण नहीं जलता


उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर  जिले के ग्रेटर नोएडा  क्षेत्र में एक गांव है बिसरख। इसे रावण
   के गांव   के तौर पर भी जाना जाता है।  मान्यता के अनुसार गांव में कई दशकों से   रावण   के पुतले का दहन नहीं किया जाता। दशहरे में जहां पूरा देश रावण के पुतलों का दहन कर बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव मनाता है, वहीं बिसरख गांव की तस्वीर थोड़ी अलग होती है। यहां पौराणिक असुर राज के जीवन और शिक्षाओं का जश्न मनाया जाता है। यहां के लोगों के लिए आज भी रावण बाबा हैं। पूजनीय हैं। 



बिसरख गांव के एक कोने में स्थित है प्राचीन शिव मंदिर। कहा जाता है कि लंकापति रावण इस गांव में पैदा हुए थे। इस मंदिर को रावण मंदिर के तौर पर भी जाना जाता है। गांव के विजय भाटी बताते हैं कि रावण के पिता का आश्रम हुआ करता था बिसरख में। इसी आश्रम में रावण का जन्म हुआ। रावण के भाई कुबेर, कुम्भकर्ण और विभीषण भी यहीं पर जन्मे थे। यह भी माना जाता है कि बाल्यकाल से ही शिव भक्त रावण ने शिव की कठिन उपासना की। उन्होंने यहीं पर शिव मंत्रावली की रचना भी की थी। जिस मंदिर में यह शिवलिंग स्थापित है, वहां पौराणिक काल की मूर्तियां बनी हुई हैं। बिसरख गांव में विभिन्न स्थानों पर खुदाई में अब तक 25 से ज्यादा शिवलिंग निकल चुके हैं।


वैसे तो गांव में कोई रावण का मंदिर नहीं है। पर गांव के प्राचीन शिव मंदिर को लोग रावण मंदिर के तौर पर जानते हैं। इस मंदिर में प्राचीन शिवलिंग है। ऐसी मान्यता है कि इस शिवलिंग की स्थापना ऋषि विश्रवा ने स्वयं की थी। यह अष्टभुजी शिवलिंग है। कहा जाता है इस तरह का शिवलिंगम कहीं दूसरा नहीं है। इस प्राचीन मंदिर का अब जीर्णोद्धार किया जा रहा है। इसका प्रवेश द्वार और परिसर को भव्य बनाया जा रहा है। मंदिर में एक विशाल गैलरी बनाई गई है। इस गैलरी में ऋषि विश्रवा की प्रतिमा स्थापित की गई है। इसके साथ कई और देवी देवताओं की मूर्तियां भी स्थापित की गई हैं।



रावण के पिता थे ऋषि विश्रवा। वे पौलत्स्य मुनि के पुत्र थे। वह भगवान शिव का अनन्य भक्त थे। तो रावण का जन्म हुआ यहां पर ऋषि के आश्रम में। उनका बचपन बिसरख में ही बीता। तो गांव के लोगों के लिए वह बेटा है गांव का। तो भला उसका पुतला कैसे जला सकते हैं। गांव के लोग तो रावण पर गर्व करते हैं। अब गांव के लोग एक अलग से रावण का मंदिर बनाने पर भी विचार कर रहे हैं।

दरअसल विश्रवा ऋषि के नाम पर ही इस गांव का नाम बिसरख पड़ा। सरकारी दस्तावेजों में इस गांव का नाम बिसरख जलालपुर है। संभवतः जलालपुर मुगलकाल में जुडा होगा। गांव में गूजर और दलित बिरादरी के लोगों की अच्छी संख्या है। बिसरख गांव कभी नोएडा से दूर हुआ करता था। पर अब शहर के विस्तार ने गांव के शहरी सीमा में ले लिया है। गांव के आसपास ग्रेटर नोएडा वेस्ट के विशाल अपार्टमेंट बन चुके हैं।



कैसे पहुंचे - बिसरख गांव पहुंचने के लिए आप ग्रेटर नोएडा वेस्ट के गौड़ चौक (चार मूर्ति चौक) से सूरजपुर जाने वाली सड़क पर आगे बढ़े। सुपरटेक इकोविलेज वन के पास बिसरख गांव आ जाता है। चौराहे से दाहिनी तरफ मुड़कर गांव में  पहुंच जाएंगे। बिसरख गांव में कोतवाली है। कोतवाली से मंदिर की दूरी आधा किलोमीटर है।  

-    विद्युत प्रकाश मौर्य -vidyutp@gmail.com 

( ( RAVAN , BISRAKH, GREATER NOIDA, SHIVA TEMPLE) 

 


 

 

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