Thursday, October 8, 2020

जीवनदायिनी हरनंदी (हिंडन) नदी की दुर्दशा



गाजियाबाद के लोग उसे हिंडन नदी के नाम से जानते हैं। पर उसका असली नाम हरनंदी है। पूरा महादेव मंदिर से कल्याणपुर मार्ग पर एक किलोमीटर से भी कम चलने पर हरनंदी नदी पर बना पुल आता है। इस पुल पर गर्मी में खरबूजे और सब्जियां बेचने वाले कुछ लोग दुकानें लगाकर बैठे हैं। पर हरनंदी को यहां देखकर भी मन दुखी हो जाता है। ठहरा हुआ काला जल। पानी में प्रवाह नहीं। इसके लिए जिम्मेदार कौन है। 

हिंडन या हरनदी या हरनंदी का उदगम स्थल सहारनपुर जिले के टंका गांव में माना जाता है। शाकुंभरी देवी के पास जो दो छोटी छोटी धाराएं दिखाई देती हैं वह भी हिंडन की ही धाराएं हैं। शिवालिक पर्वत माला से यह नदी जहां से निकलती है वहां एक खूबसूरत झरना गिरता है। वहां पानी अत्यंत निर्मल है। अगस्त 2017 में मेरठ के प्रोफेसर उमर सैफ और मेरठ मंडलायुक्त रहे डॉक्टर प्रभात कुमार ने आठ किलोमीटर की पदयात्रा करके हिंडन के उदगम स्थल तक की यात्रा की थी। मोहन वन क्षेत्र से आखिरी गांव कालूवाल टोंगिया आखिरी गांव है। यहां से आठ किलोमीटर चलने पर बरसनी झरना के पास हरनंदी का उदगम स्थल है। यहां पर नदी का पानी अत्यंत निर्मल है। पोरका टांडा तक इस नदी का पानी एकदम निर्मल है।

यहां निकलकर यह नदी की कुल 280 किलोमीटर का सफर तय करके यमुना में समाहित हो जाती है। यह मुजफ्फनगर, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर जिले से होकर गुजरती है। रास्ते में इसमें कृष्ण, धमोला, नागदेवी, चाचाराओ और काली नदी जैसी छोटी-छोटी नदियां भी मिलती हैं।
आजकल इसका पानी इंसानों के पीने लायक तो नहीं है। बल्कि ऐसा है कि पशु पक्षियों के पीने लायक भी नहीं है। पानी में ऑक्सीजन की मात्रा काफी कम हो गई है। गाजियाबाद शहर में पहुंचकर तो इसका इतना बुरा हाल हो जाता है कि यह शहर के गंदे नाले की तरह ही नजर आती है।

औद्योगिक कचरा डाले जाने के कारण नदी के जल में आर्सेनिक, सायनाइड, क्रोमियम, लोहा, सीसा, पारा जैसे जहर खतरनाक मात्रा में मौजूद हैं। हिंडन में प्रदूषण की शुरुआत सहारनपुर जिले से ही शुरू हो जाती है। चीनी मिलों और डिस्टलरी का अवशिष्ट जल इसमें मिलने लगता है। सहारनपुर में नदी के साथ जो दुर्गति होती है उसका सिलसिला आगे भी जारी रहता है। नदी जल में 6 मिली ग्राम प्रति लीटर घुलित ऑक्सीजन का होना जरूरी है। पर हिंडन में इसकी मात्रा दो मिलीग्राम के आसपास रह गई है।
गाजियाबाद में राजनगर एक्सटेंशन के पास हिंडन नदी। 

गाजियाबाद में मोहन नगर के पास हिंडन एयरबेस इस नदी के नाम पर बना हुआ है। इसी के बगल में करहेड़ा गांव और नए बस रहे टाउनशिप एरिया राजनगर एक्सटेंशन के बगल से ये नदी गुजरती है। पर यहां पर नदी के दोनों तरफ कचरा अत्यंत जहरीला पानी नजर आता है।

गाजियाबाद से लेकर नोएडा तक के हिस्से में तो हिंडन के डूब क्षेत्र में कब्जा करके कॉलोनियां और आवास बनाने का काम भी शुरू हो चुका है। एक आकलन है कि दस हजार से ज्यादा अवैध निर्माण हिंडन के डूब क्षेत्र में हो चुके हैं।

म देश के तमाम छोटी छोटी नदियों के साथ जो बुरा व्यवहार लगातार कर रहे हैं इसका खामियाजा हमें कभी न कभी भुगतना पड़ सकता है। हो सकता है आने वाले समय में हमें इसका खौफ झेलना पड़े। प्रशासन और लोगों ने मिलकर हिंडन को जीवित करने का बीड़ा उठाया है। इसके लिए निर्मल हिंडन शोध समिति का गठन किया गया है। पर पता नहीं कब निर्मल हो सकेगी हरनंदी।
-         विद्युत प्रकाश मौर्य vidyutp@gmail.com
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4 comments:

  1. लेख में हमारी कई जिज्ञासाओं का समाधान मिला, जो नोएडा-दिल्ली जाते समय इस नदी की दुर्दशा देखकर उठती थी।

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