Tuesday, October 6, 2020

परशुरामेश्वर महादेव यानी पूरा महादेव – शिव का प्रचीन मंदिर


दिल्ली के दिलशाद गार्डन से भोपुरा चौक, वहां से बंथला फ्लाईओवर के नीचे से चिरोड़ी रोड पर। चिरोड़ी के बाद शुरू हो जाता है जिला बागपत। धौली प्याउ पुलिस चौकी के बाद रटौल, फिर ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे को नीचे से पार करके ढिकोली रोड पर चलते हुए दाहिनी तरफ चांदीनगर एयरफोर्स स्टेशन तीन किलोमीटर का बोर्ड नजर आता है। 

यहां से सड़क पर सीधे चलते हुए हम पहुंच जाते हैं ढिकौली के पास पांची गांव । पांची ढिकोली के बाद आता है पिलाना गांव। पिलाना से कुछ किलोमीटर चलने के बाद हम पहुंच जाते हैं मेरठ बागपत मार्ग पर। यहां से दाहिनी तरफ थोड़ी दूर चलने पर आता है सिंघावली अहीर थाना। 


यहां तिराहे पर बाईं तरफ वाली सड़क पर चलते हुए तीन किलोमीटर बाद पहुंच जाते हैं अमीनगर सराय। आसपास के लोग इस कस्बे को सिर्फ सराय कहते हैं।  सराय से बायीं तरफ वाली सड़क पर छह किलोमीटर चलने के बाद हम पहुंच जाते हैं पुरा महादेव।

अगर आप मेरठ की तरफ से आ रहे हैं तो मेरठ बागपत हाईवे पर बालेनी बस स्टॉप पर रुक जाएं। यहां से दाहिनी तरफ चलने पर चार किलोमीटर बाद पुरा महादेव के मंदिर पहुंच जाएंगे।

पुरा महादेव यानी परशुरामेश्वर महादेव। उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में बालोनी कस्बे पास स्थित ये मंदिर पौराणिक माना जाता है। इस मंदिर का संबंध भगवान परशुराम से है। इसलिए यहां स्थापित शिव को परशुरामेश्वर कहते हैं।

रंग बदलने वाला शिवलिंगम - श्री परशुरामेश्वर महादेव मंदिर में रंग बदलने वाला अनूठा शिवलिंग है। यहां जल चढ़ाने के लिए दूर दूर से शिवभक्त शिवरात्रि पर जल चढ़ाते हैं। पूरा महादेव मंदिर का परिसर बड़ा है। हालांकि मंदिर का भवन ज्यादा पुराना नहीं नजर आता है, पर आसपास के जिलों में इस मंदिर की बहुत मान्यता है।

कहा जाता है कि यहां भगवान परशुराम का निवास था। यहीं हरनंदी नदी के किनारे रह कर उन्होंने कठोर तप किया था। मान्यता है कि सबसे पहले भगवान परशुराम ने बागपत के पास स्थित पुरा महादेव मंदिर में कावड़ से गंगाजल लाकर जलाभिषेक किया था। जलाभिषेक करने के लिए भगवान परशुराम गढ़मुक्तेश्वर से गंगाजल लेकर आए थे।

परशुराम की तपस्या कथा - ऋषि जमदग्नि अपनी पत्नी रेणुका के साथ हिंडन नदी के किनारे कजरी वन में रहते थे। यहां पर एक दिन हस्तिनापुर के राजा सहस्रबाहु शिकार खेलते हुए पहुंचे। तब यहां ऋषि मौजूद नहीं थे। राजा रेणुका के रूप पर मोहित हुए और जबरन उसे अपने साथ हस्तिनापुर ले गए। पर एक दिन रानी ने रेणुका को बंधन मुक्त कर दिया। रेणुका वापस कजरी वन पहुंची तो ऋषि ने यह कहते हुए रखने से इनकार कर दिया कि वह पर पुरुष के साथ रहकर आई हैं। पर रेणुका जिद पर अड़ी रहीं। 

तब ऋषि ने अपने चारों बेटों को बुलाया और अपनी मां का सिर काटने का आदेश सुना दिया। चौथे बेटे परशुराम ने मां का सिर काट डाला। पर जमीन पर पड़े मां के सिर को देख परशुराम विचलित हो गए। उन्हे पश्चाताप हुआ। तो वहीं पर बैठकर शिव की तपस्या शुरू कर दी। कठोर तप के बाद प्रकट हुए। परशुराम ने मां को जिंदा कराने का वर मांगा। मां जीवित हो गईं। वहीं शिव ने परशुराम को एक फरसा दिया। इसी फरसे से परशुराम ने राजा अत्याचारी राजा सहस्रबाहु का वध किया।

सावन में विशाल मेला - इस गांव में भगवान शिव मंदिर के आसपास में सावन के चौदहवें दिन और फाल्गुन में मेले का आयोजन होता है। सावन के मेले के समय यहां लाखों लोगों की भीड़ जुटती है। हरिद्वार से आने वाले कावड़िये यहां जलाभिषेक करते हैं।
अब पुरा महादेव मंदिर के पास एक शनिधाम भी बन गया है। यहां पर शनि देव की विशाल प्रतिमा दूर से ही नजर आती है। मंदिर के आसपास हरे भरे खेत नजर आते हैं। पुरा महादेव के आसपास का ग्रामीण परिवेश मन मोह लेता है। 

कैसे पहुंचे – मेरठ से पुरा महादेव 32 किलोमीटर और बागपत शहर से 28 किलोमीटर है। गाजियाबाद से दूरी 50 किलोमीटर है। मेरठ बागपत हाईवे पर बालेनी कस्बा से मंदिर तीन किलोमीटर की दूरी पर है। मंदिर के पास बिल्कुल छोटा सा गांव है। मंदिर के पास एक गेस्ट हाउस भी बना हुआ है।
-         विद्युत प्रकाश मौर्य vidyutp@gmail.com
-         ( PURA MAHADEV, BAGPAT, SHIVA TEMPLE, PARSHURAM )




2 comments:

  1. बहुत अच्छी जानकारी दी है आपने..शुक्रिया

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