Monday, December 21, 2020

आइए करें महादेव के बारह ज्योतिर्लिंग के दर्शन




शिव महापुराण के कोटि रूद्र संहिता के अन्तर्गत महाशिव के ज्योतिर्लिंग के बारह स्वरूपों का उल्लेख किया गया है, जिन्हें सुनने मात्र से पाप दूर हो जाते हैं। तो आइए करते हैं शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों के दर्शन। 

1 सोमनाथ - ( गुजरात ) - गुजरात के अरब सागर के तट पर स्थित सोमनाथ मंदिर यानी द्वादश ज्योतिर्लिंग में पहला शिवलिंगम। अदभुत मनोरम वातावरण। मानो सागर की लहरें दिन रात शिव का नमन कर रही हों। गुजरात के शहर सोमनाथ में स्थित इस मंदिर के बारे में कहा जाता है सागर की लहरों के किनारे इसका निर्माण स्वयं चंद्रमा ने कराया था। सोमनाथ को सोमेश्वर भी कहते हैं यानी सोम (चंद्र) के नाथ ( ईश्वर)। इतिहास में सोमनाथ मंदिर कई बार बना और कई बार टूटा। आजकल जो भव्य सोमनाथ मंदिर है इसे देश आजाद होने के तुरंत बाद सरदार वल्लभभाई पटेल और अन्य नेताओं ने जन सहयोग से बनवाया।



2 मल्लिकार्जुन स्वामी - ( आंध्र प्रदेश)  शिव के बारह ज्योतिर्लिंग में दूसरे स्थान पर आते है आंध्र प्रदेश के करनूल जिले में स्थित श्रीशैलम के मल्लिकार्जन स्वामी। इसे दक्षिण में दिव्य क्षेत्रम माना जाता है। यहां पहुंच कर अद्भुत शांति और आनंद की अनुभूति होती है। सालों भर देश दुनिया से बड़ी संख्या में लोग श्रीशैलम पहुंचते हैं। घने जंगल से गुजरने के बाद नल्ला मल्ला के पर्वतों पर शिव विराजते हैं।

3 महाकाल ( उज्जैन ) - मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर उज्जैन में क्षिप्रा नदी के तट पर महाकाल का मंदिर स्थित है। बारह ज्योतिर्लिंग में तीसरे स्थान पर आते हैं महाकाल। देश भर से लोग महाकाल के दर्शन के लिए आते हैं। दक्षिणामुखी होने के कारण महाकाल की पूजा को बड़ा फलदायी माना जाता है।
देश के सभी बारह ज्योतिर्लिंगों में सिर्फ महाकाल की प्रतिमा ही दक्षिणमुखी है। राजनेताफिल्मी सितारे और उद्योगपति सभी महाकाल की कृपा चाहते हैं। यहां आने वाले श्रद्धालु क्षिप्रा नदी में स्नान करने के बाद महाकाल का पूजन करते हैं।


4 ओंकारेश्वर ( खंडवा, मध्य प्रदेश ) - मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र में खंडवा जिले में स्थित शिव का ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग देश भर में स्थित 12 ज्योतिर्लिंगों में चौथे स्थान पर आता है। यहां सुरम्य वादियों के बीच नर्मदा नदी के तट पर स्थित है शिव का मंदिर ओंकारेश्रर। ओंकारेश्वर में नर्मदा और कुबेर नदियों के बीच एक विशाल टापू बन गया है। इसी टापू पर बना है ओंकारेश्वर मंदिर। 



5 केदारनाथ ( उत्तराखंड ) - केदारनाथ का मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है। मंदिर तीन तरफ से पहाड़ों से घिरा है। एक तरफ है करीब 22 हजार फीट ऊंचा केदारनाथ शिखरदूसरी तरफ है 21600 फीट ऊंचा खर्चकुंड और तीसरी तरफ है 22700 फुट ऊंचा भरतकुंड। इस ज्योतिर्लिंग  के बारे में कहा जाता है कि हिमालय के केदार श्रृंग पर भगवान विष्णु के अवतार महातपस्वी नर और नारायण ऋषि तपस्या करते थे।


6 . भीमाशंकर ( महाराष्ट्र)  - शिव का 12ज्योतिर्लिंग में भीमाशंकर छठे नंबर पर है। डाकिन्या भीमाशंकर मतलब डमरू वाले देवता का मंदिर। डमरु वाले तो हैं ही शिव। भीमाशंकर ग्राम पंचायत भोरागिरीतहसील खेड जिला पुणे में पड़ता है। मंदिर इतनी ऊंचाई पर है कि यहां से संपूर्ण कोंकण क्षेत्र का नजारा दिखाई देता है। किसी समय में यहां आना मुश्किल हुआ करता था। जंगली जीव ज्यादा दिखाई देते थे। पर पहाड़ियां वन औषधियों से भरी हुई हैं। 



7 काशी विश्वनाथ -  ( वाराणसी) उत्तर प्रदेश में गंगा के तट पर बसी काशी को तीनो लोकों से न्यारी कहा गया है। यहां दशाश्वमेध घाट के पास है काशी विश्वनाथ का मंदिर। काशी विश्वनाथ का स्थान बारह ज्योतिर्लिंग में सातवें स्थान पर आता है। कहा जाता है इस नगरी का प्रलयकाल में भी लोप नहीं होता। उस समय भगवान शिव इस नगरी को अपने त्रिशूल पर धारण कर लेते हैं।

8. त्रयंबकेश्वर - ( नासिक, महाराष्ट्र ) भगवान शंकर के बारह ज्योतिर्लिंग में आठवें स्थान पर आता है त्रयंबकेश्वर। त्रयंबकेश्वर मंदिर महाराष्ट्र में नासिक शहर से 36 किलोमीटर दूर है। त्रि- अंबक यानी तीन नेत्रों वाले शिव। शिव का ये मंदिर समुद्र तल से ढाई हजार फीट की ऊंचाई पर पहाड़ों की तलहटी में बना है। गौतम और गंगा जी की प्रार्थना पर शिव यहां संसार के उपकार के लिए त्रयंबक रूप में विराजते हैं।


9. रावणेश्वर - (झारखंड)   शिव का नौवां ज्योतिर्लिंग मंदिर का देवघर का वैद्यनाथ धाम मंदिर। झारखंड राज्य के देवघर जिले में स्थित ये मंदिर देश भर के करोड़ों श्रद्धालुओं के आस्था का केंद्र है। दिल्ली हावड़ा रेल लाइन पर जैसीडीह स्टेशन से छह किलोमीटर आगे देवघर में ये मंदिर स्थित है। शिव पुराण के मुताबिक इस क्षेत्र को चिताभूमि कहा गया है। शिव सती के शव को लेकर जब उन्मत होकर घूम रहे थे तब सती का ह्रतपिंड यहां गलकर गिर गया था।


10. नागेश्वर (गुजरात ) - गुजरात का नागेश्वर मंदिर भगवान शिव का प्रसिद्ध मंदिर है। द्वारका के पास दारुका वन इलाके में स्थित ये मंदिर द्वादश ज्योतिर्लिंग में 10वें स्थान पर आता है। नागेश्वर यानी नागों के ईश्वर। कहा जाता है कि इस मंदिर में पूजा से सर्प के विष से बचाव होता है। रुद्र संहिता में भगवान शिव को दारुकावनें नागेश कहा गया है। किसी जमाने में इस मंदिर के आसपास घने जंगल थे। आज भी मंदिर के आसपास कोई आबादी नहीं है। इसलिए यहां दिन में ही दर्शन के लिए जा जा सकता है।



11 रामेश्वरम ( तमिलनाडु ) - तमिलनाडु राज्य में स्थित रामेश्वरम का रामनाथ स्वामी मंदिर चार धामों में  से एक है। साथ ही यह बारह ज्योतिर्लिंग में 11वें स्थान पर आता है। भगवान श्रीराम जब श्रीलंका पर विजय के बाद वापस लौटे तब उन्होंने रामेश्वरम में भगवान शिव की पूजा की।  कहा जाता है कि यहां रामचंद्र जी रावण वध के बाद ब्राह्मण हत्या के पाप से मुक्ति के लिए शिव की आराधना की थी।




12 घुश्मेश्वर ( महाराष्ट्र ) महाराष्ट्र में औरंगाबाद शहर के समीप ही प्रसिद्ध घृष्णेश्वर मंदिर स्थित है। महादेव के ज्योर्तिलिंगों की सूची में ये 12वां और आखिरी है। यहां आकर एक विशेष प्रकार के शांत वातावरण का एहसास होता है। यह मंदिर दक्षिण भारत के तमिलनाडु के तंजौर स्थित वृहदेश्वर मंदिर  ( बिग टेंपल) का लघु रूप सा दिखाई देता है। कला शिल्प की दृष्टि से ये अति सुंदर मंदिर है।
- प्रस्तुति - विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
( 12 JYOTIRLING DARSHAN, SHIVA ) 

2 comments:

  1. Om Namah Shivaye. Great to have darshan and information about 12 Jyotirlinga.

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