Sunday, October 18, 2020

जीटी रोड पर शेरशाह कालीन सराय

शेरशाह सूरी मध्यकालीन भारत का ऐसा सम्राट हुआ जिसने देश के चहुंमुखी के लिए अनेक कार्य किए वह भी अपने बहुत छोटे से शासन काल में। तो शेरशाह की एक स्मृति दिल्ली से गाजियाबाद जाते समय साहिबाबाद के जीटी रोड पर भी देखी जा सकती है।

दरअसल शेरशाह ने कोलकाता से पेशावर तक जीटी रोड बनवाने के बाद इसके किनारे जगह-जगह राहगीरों के लिए पक्के सराय का निर्माण कराया था। इन सरायों कई तो विलुप्त हो गए लेकिन कुछ का अस्तित्व अभी बचा हुआ है। ऐसी ही एक शेरशाह कालीन सराय साहिबाबाद के पास जीटी रोड पर देखने को मिलती है। पर इस ऐतिहासिक इमारत के महत्व से आसपास के लोग अनजान हैं। संरक्षण के अभाव में इस सराय का क्षरण हो रहा है।

श्याम पार्क स्थित जीटी रोड के एक किनारे पर बनी यह छोटी सी इमारत फिलहाल जर्जर हालत में दिखाई देती है। श्याम पार्क मेट्रो स्टेशन के पास दक्षिणी हिस्से में इस इमारत को देखा जा सकता है। जीटी रोड की ऊंचाई बढ़ने के कारण यह इमारत थोड़ी नीची हो गई है।

इतिहासकार बताते हैं कि यह इमारत मध्यकाल की है। इसके निर्माण में छोटे आकार के लाखोरी ईंटों का प्रयोग किया गया है। यह इमारत शेरशाहकालीन है। शेरशाह सूरी ने करीब 400 साल पूर्व जीटी रोड का पुनर्निर्माण कराया था। इसी दौरान इस सराय का भी निर्माण कराया गया था।

शेरशाह ने सोलहवीं सदी में जीटी रोड के दोनों ओर लगभग 1700 सरायों का निर्माण कराया था। यह मुसाफिरों के ठहरने का स्थान हुआ करता था। शेरशाह कालीन ये सराय कई जगह तिजारत का भी केंद्र हुआ करते थे। मतलब इसके आसपास बाजार भी लगता था।

वैसे तो मुगलकाल में जीटी रोड को बादशाही सड़क कहा जाता था। हालांकि शेरशाह से पूर्व भी यह सड़क मौजूद थी। तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में मौर्य साम्राज्य के दौरान पाटलिपुत्र से अफगानिस्तान के काबुल तक इस सड़क को बनाया गया था। शेरशाह सूरी ने इसका पुनर्निर्माण कराया। ब्रिटिश राज के दौरान इस सड़क का नाम बादशाही सड़क से बदलकर ग्रैंड ट्रंक रोड (जीटी रोड) रख दिया गया। पर आजाद भारत में इसे एक  बार फिर नाम मिला शेरशाह सूरी पथ।

वर्तमान में जो जीटी रोड है उसे ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी में चंद्रगुप्त मौर्य ने बनवाया था। तब इस मार्ग को उत्तर पथ भी कहा जाता था। शेरशाह ने अपने शासन काल में फिर से पूरे पथ का नए सिरे से निर्माण कराया। तब इस मार्ग का नाम बादशाही सड़क रख दिया गया। यह देश की प्रमुख सड़क थी। जो बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली पंजाब आदि राज्यों को जोड़ती थी। इस मार्ग पर शेरशाह की डाक व्यवस्था का भी संचालन होता था।


साहिबाबाद में जो शेरशाहकालीन सराय दिखाई देती है इसका संरक्षण किए जाने की जरूरत है। इसके आसपास की दीवार तक दुकानदारो ने कब्जा कर रखा है। इसे तार के बाड़ लगाकर ऐतिहास महत्व की इमारत घोषित किया जाना चाहिए। साथ ही यहां इसका महत्व बताता हुआ एक बोर्ड भी लगाया जाना चाहिए। अगर संरक्षित नहीं किया गया तो इस तरह की कई छोटी छोटी ऐतिहासिक इमारतें विलुप्त हो सकती हैं।
-    विद्युत प्रकाश मौर्य vidyutp@gmail.com
( SAHIBABAD, GAZIABAD, SHERSHAH, SARAI, GT ROAD, BADSHAHI SADAK  )

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