Sunday, November 15, 2020

दिल्ली के दरवाजे, हर दरवाजे की अपनी कहानी


दिल्ली शहर में कभी  चौदह दरवाजे हुआ करते थे। कई नाम इन दरवाजों के अस्तित्व की याद भी दिलाते हैं। इनमें कश्मीरी गेट और तुर्कमान गेट को आप अच्छे हालात में देख भी सकते हैं। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन का एक प्रवेश द्वार अजमेरी गेट कहलाता है।  कमला मार्केट पर  यह द्वार स्थित है। जब आप रामलीला मैदान की तरफ चल कर जाएंगे तो वहां आपको तुर्कमान गेट खड़ा दिखाई देता है।

जब आप आईटीओ ( राम चरण अग्रवाल चौक) से दरियागंज की तरफ आगे बढ़ते हैं तो आप दिल्ली गेट का दीदार करते हैं। यहां से एक रास्ता राज घाट की तरफ तो दूसरा रास्ता नई दिल्ली रेलवे स्टेशन की तरफ चला जाता है। मध्यकालीन भारत में उत्तर भारत के तमाम शहरों को सुरक्षा के लिहाज से उंची दीवारों और दरवाजों से लैस किया गया था। दिल्ली गेट के पास आप आज भी दिल्ली की ऐसी सुरक्षा दीवार को देख सकते हैं।

शाहजहां का दिल्ली दरवाजा - दिल्ली गेट का निर्माण 1638 में शाहजहां ने खुद द्वारा बसाए गए शहर शाहजहानाबाद की सुरक्षा के लिए करवाया था। यह शहर को दक्षिण की तरफ से किसी हमले से सुरक्षित करने के लिए बनवाया गया था। इस गेट को हाथी पोल भी कहा जाता था। दरअसल कभी इस द्वार के दोनों तरफ दो हाथियों की विशाल प्रतिमा हुआ करती थी। पर अब हाथी नहीं रहे। इसके निर्माण में लाल बलुआ पत्थरों का इस्तेमाल हुआ है। अब दिल्ली गेट के पास ही इसी नाम से वायलेट लाइन ( हेरीटेज लाइन ) का मेट्रो स्टेशन का निर्माण कराया गया है। आपको पता है पाकिस्तान के शहर लाहौर में भी दिल्ली दरवाजा है। वहां से दिल्ली की तरफ आने वाली सड़क पर इस द्वार का निर्माण कराया गया था।



सन 1838 में बना कश्मीरी गेट - सन 1838 में बना कश्मीरी गेट आकार प्रकार में दिल्ली गेट से मिलता जुलता है। अब कश्मीरी गेट के पास दिल्ली का सबसे बड़ा बस अड्डा है। इसलिए महाराणा प्रताप अंतरराष्ट्रीय बस अड्डे को लोग कश्मीरी गेट बस अड्डा के नाम से जानते हैं। यहां से एक रास्ता कश्मीर की तरफ जाता था इसलिए इसका नाम कश्मीरी गेट रखा गया था। सैन्य इंजीनियर राबर्ट स्मिथ द्वारा इस द्वार का निर्माण कराया गया था। यह द्वार ब्रिटिश सरकार द्वारा विद्रोहियों को नगर में प्रवेश करने से रोकने के लिए निर्मित कराया गया था यह शाहजहानाबाद का उत्तरी द्वार भी था। 

दिल्ली में जब ब्रिटिश कॉलोनियों बनने की शुरुआत हुई तो शुरुआती बंगले इसी कश्मीरी गेट के आसपास बने। कश्मीरी गेट के पास ही दिल्ली के सबसे पुराने चर्च में से एक सेंट जेम्स चर्च का निर्माण भी हुआ। यह कश्मीरी गेट 1857 में ब्रिटिश सरकार पर हमले का भी साक्षी बना। उन्नीसवीं सदी  में कश्मीरी गेट के आसपास दिल्ली का बड़ा व्यापारिक केंद्र बस चुका था। अब इस गेट पास दिल्ली मेट्रो का कश्मीरी गेट मेट्रो स्टेशन है। यहां पर तीन मेट्रों की लाइनों का मिलन होता है।



सूफी संत के नाम पर तुर्कमान गेट – जब नई  दिल्ली रेलवे स्टेशन से आसफ अली रोड पर होते हुए  दिल्ली गेट की तरफ बढ़ते हैं तो बायीं तरफ नजर आता है तुर्कमान गेट। तुर्कमान गेट का निर्माण शाहजहां ने ही 1658 में करवाया था। पर इसका नाम सूफी संत के सम्मान में दिया गया। यहां पास में ही हजरत शाह  तुर्कमान बयाबानी की  दरगाह है। वे तेरहवीं  सदी के सूफी संत थे।  उनके जमाने में यह इलाका हरा भरा जंगलों वाला हुआ करता था। पर आज इस दरवाजे के आसपास काफी घना बाजार है। दिल्ली के रामलीला मैदान के पास स्थित इस दरवाजे के अंदर घुसते ही आप पुरानी दिल्ली घने मुहल्ले में प्रवेश कर जाते हैं। तुर्कमान गेट के बगल में दिल्ली स्टॉक एक्सचेंज  की विशाल बिल्डिंग नजर आती है। 


लाल किला का लाहौरी गेट -  दिल्ली की पहचान   लाल किला से है। तो लाल किला का उत्तरी दरवाजा लाहौरी गेट कहलाता है। दस मीटर से ज्यादा ऊंचा ये दरवाजा लाहौर की ओर जा रहे रास्ते को इंगित करता है, इसलिए इसका नाम लाहौरी गेट रखा गया था। आजकल यह लाल किला का मुख्य प्रवेश द्वार है। लाल किला में अंदर जाने वाले सैलानी इसी  द्वार  से अंदर की ओर जाते हैं।

नई  दिल्ली स्टेशन के पास अजमेरी गेट – दिल्ली से जो रास्ता अजमेर शरीफ की तरफ जाता था वहां अजमेरी गेट का निर्माण कराया गया। अब नई दिल्ली रेलवे स्टेशन यहां बन चुका है। अजमेरी गेट का निर्माण 1644 में शाहजहां ने ही करवाया था। बाद में  1811 में इसके पास एक मदरसा का निर्माण कराया गया। 1857 की क्रांति का यह दरवाजा भी गवाह बना। तुर्कमान गेट की तरह यह भी भीड़भाड़ और शोर के बीच घिरा हुआ ऐतिहासिक दरवाजा है। अजमेरी गेट के सामने कमला मार्केट स्थित है।  इसके एक तरफ का रास्ता जीबी रोड (  स्वामी श्रद्धानंद मार्ग ) की ओर जाता है तो दूसरी तरफ नई दिल्ली रेलवे स्टेशन है। 


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      वैसे कहा जाता है कि अपने शहर की मजबूत किलेबंदी के लिए शाहजहां ने कुल 14 दरवाजों का निर्माण कराया था। पर इनमें से कई दरवाजों के  अस्तित्व का अब पता नहीं चलता है। 
   --       -----विद्युत प्रकाश मौर्य vidyutp@gmail.com 
( ( DELHI GATE, AJMERI GATE, TURKMAN GATE, DELHI DARWAJA, LAHORI GATE, KASHMIRI GATE ) 

2 comments:

  1. इन गेटों से तो हम अक्सर गुजरते हैं, आज इनका इतिहास भी जाना और कहीं ना कहीं ये जिज्ञासा मन में थी जो आज पूरी हुई।

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