Thursday, September 24, 2020

देश के सुंदर प्रदेश लक्षद्वीप पर एक जरूरी किताब

हम हिंदुस्तान की तस्वीर को भारत माता के रूप में देखें तो इसमें अंदमान निकोबार और लक्षद्वीप जैसे देश भारत माता के श्रंगार में पहने जाने वाले गहने हैं जो मां के सौंदर्य में अभिवृद्धि करते हैं। अंदमान आप कोलकाता, विशाखापत्तनम या चेन्नई से पहुंच सकते हैं तो लक्षद्वीप जाने के लिए केरल के कोच्चि शहर से या फिर कर्नाटक से मंगलुरू से जहाज चलते हैं।

देश के सारे प्रदेशों में कदम रख चुका हूं। सिर्फ लक्षद्वीप बचा है। नेशनल बुक ट्रस्ट के स्टॉल पर किताबें देखते हुए मेरी नजर लक्षद्वीप पर लिखी एक अंग्रेजी पुस्तक पर पड़ी। कुल 60 रुपये की ये किताब मुझे बुक क्लब का मेंबर होने के कारण 20 फीसदी छूट के बाद 48 रुपये की पड़ी। पुस्तक कई कई सालों तक मेरे अलमारी में पड़ी रही। लॉकडाउन के दौरान इसे पढ़ने का मौका मिला। पहले बात इस पुस्तक के लेखक के बारे में। इसे लिखा है अवकाश प्राप्त आईएएस उमेश सहगल ने।

उमेश सहगल, पुस्तक के लेखक, लक्षद्वीप के पू्र्व प्रशासक। 
उमेश सहगल का नाम देखकर चौंका। मुझे 1998-99 के अपने कुबेर टाइम्स के रिपोर्टिंग के दिन याद आ गए। उमेश सहगल आईएएस होने के साथ टीवी प्रोडक्शन में हाथ आजमाते रहे हैं। उन्होंने दूरदर्शन पर एक धारावाहिक बनाया था ग्राहक दोस्त। उसकी प्रेस कान्फ्रेंस में होटल कनॉट में उनसे लंबी बात हुई थी। तब हमारे संपादक ओम गुप्ता भी उनके साथ थे।

उमेश सहगल की कंपनी हुआ करती थी कामिनी प्रोडक्शन्स जो उनकी पत्नी कामिनी सहगल के नाम थी। उनके बेटे योगेश सहगल इस कंपनी का कामकाज देखते थे। उमेश सहगल बाद में दिल्ली के मुख्य सचिव होकर रिटायर हुए। पर इस लक्षद्वीप पर लिखी उनकी 220 पृष्ठों की किताब देखकर मालूम हुआ कि वे 1982 से 1985 तक तीन साल तक केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप के प्रशासक रहे। अगर आप किसी राज्य में घूमने की आकंक्षा रखते हैं तो बेहतर है कि उस राज्य के बारे में पहले से थोड़ा जान लें। तो इस लिहाज से यह काफी अच्छी किताब है।

किताब की शुरुआत संस्मरण की शैली में होती है। उमेश सहगल जुलाई 1982 में कोचीन में लक्षद्वीप हाउस में पहुंचने से शुरुआत करते हैं। पर पुस्तक आगे लक्षद्वीप के बारे में हर पहलू पर प्रकाश डालती है। यहां पहली बार ग्यारहवीं सदी में इंसान के कदम पड़ना। इसके बाद अलग अलग चरणों में वहां सभ्यता संस्कृति का विकास।

लक्षद्वीप की राजधानी कवरत्ति है। यह प्रदेश 36 छोटे बड़े द्वीपों का समूह है। अपने तीन साल के प्रवास में उमेश सहगल ने लक्षद्वीप को खूब जानने समझने की कोशिश की। उन्होंने वहां कई डाक्यूमेंटरी भी बनाई। पूरा लक्षद्वीप मुस्लिम बहुल है। पीएम सईद कांग्रेस पार्टी से यहां से 11 बार सांसद रहे। बाद में लोकसभा के उपाध्यक्ष भी बने। उमेश सहगल पीएम सईद के परिवार से अपने आत्मीय रिश्तों का भी जिक्र करते हैं।
(लक्षद्वीप का कालपेनि द्वीप - सौ - लक्षद्वीप टूरिज्म ) 

पुस्तक राज्य के इतिहास, भूगोल, द्वीप की प्राकृतिक संपदा, लोगों के रहन सहन, सामाजिक ताना बाना आदि पर बड़ी सूक्ष्मता से प्रकाश डालती है। इसका पहला संस्करण 1990 में आया था। दूसरा संशोधित संस्करण सन 2000 में आया। इंडिया द लैंड एंड द पीपुल श्रंखला के तहत नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित एक राज्य से परिचित कराती ये पुस्तक एक रेफरेंस बुक की तरह है। आपको पता है मलयालम और संस्कृत में लक्षद्वीप का मतलब क्या है। मतलब है एक लाख द्वीप। लक्षद्वीप के बारे में और जानने के लिए प्रदेश की सरकारी वेबसाइट पर जाएं। अगर आप इस प्यारे से प्रदेश में घूमने फिरने के बारे में जाना चाहते हैं तो इसके लिए लक्षद्वीप पर्यटन की वेबसाइट पर जाएं। 

-         विद्युत प्रकाश मौर्य vidyutp@gmail.com
-         ( LAKSHADWEEP, INDIA THE LAND AND THE PEOPLE, OMESH SAIGAL )  
(लक्षद्वीप का कालपेनि द्वीप - सौ - लक्षद्वीप टूरिज्म ) 

2 comments:

  1. किताब रोचक लग रही है। जल्द ही लेने का प्रयास रहेगा। आभार।

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