Tuesday, September 22, 2020

पलाश के फूलों संग ऊर्जांचल में रेल से गुजरते हुए


अपनी मामी के गांव महुआवं में रहते हुए अगले दिन हमने तय किया कि हमलोग रेलगाड़ी से शक्तिनगर जाएंगे। अशोक भाई ने बताया कि हमलोग रॉबर्ट्सगंज रेलवे स्टेशन से ट्रेन लेंगे। रॉबर्ट्सगंज शहर का नाम अंग्रेज अफसर फ्रेड्रिक रॉबर्ट के नाम पर पड़ा है। इसी नाम से रेलवे स्टेशन का भी नाम राबर्ट्सगंज पड़ गया। कभी यह मिर्जापुर जिले का हिस्सा हुआ करता था। पर अब स्वतंत्र जिला है। यह प्रदेश का एक मात्र ऐसा जिला है जिसकी सीमाएं चार राज्यों को स्पर्श करती हैं। जी हां, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश। पर सन 2020 में राबर्ट्सगंज रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर सोनभद्र कर दिया गया है। इसका स्टेशन कोड हो गया है एसबीडीआर।

वाराणसी से चुनार होकर ट्रेन राबर्ट्सगंज पहुंचती है। यहां हमलोग शक्तिनगर की ओर जाने वाली ट्रेन मे सवार हुए। ये पैसेंजर ट्रेन है जो सभी स्टेशनों पर रुकती हुई जाएगी।  अगला स्टेशन आया चुर्क। चुर्क में सीमेंट फैक्टरी है। सोनभद्र जिला जंगल और पर्वतों से आच्छादित है। भौगोलिक क्षेत्र की बात करें तो यह लखीमपुर खीरी के बाद यूपी का सबसे बड़ा जिला है।  इसके बाद का स्टेशन है अगोरी खास । हमारी ट्रेन अब चोपन पर पहुंच गई है। चोपन सोनभद्र जिले का बड़ा शहर है। पर चोपन के बाद छह किलोमीटर ही चलने पर एक और स्टेशन आया बिल्ली जंक्शन।


जी हां स्टेशन का नाम है बिल्ली। नाम सुनकर हंसी आती है। पर भारतीय रेलवे में कई ऐसे स्टेशनों के नाम बड़े रोचक हैं।  बिल्ली जंक्शन है, क्योंकि यहां से एक लाइन रेनुकूट होते  हुए झारखंड के डाल्टेनगंज की तरफ चली जाती है। बिल्ली जंक्शन का स्टेशन कोड है बीएक्सएलएल। सन 1994 में एक बार फिर मैं बनारस से बिल्ली जंक्शन होता हुआ रेनुकूट पहुंचा था सदभावना रेल यात्रा के संग। बिल्ली जंक्शन नाम सुनकर मुझे हंसी आई तो अशोक भाई ने कहा, आगे और कुछ स्टेशनों के नाम बड़े रोचक मिलने वाले हैं। पर उन्होंने नामों का खुलासा नहीं किया, ताकि मेरा कौतूहल बना रहे।

ओबरा थर्मल पावर स्टेशन - पर अभी हम शक्तिनगर की ओर जा रहे हैं तो अगला स्टेशन है ओबरा डैम। यहां पर ओबरा थर्मल पावर स्टेशन है। यहां रेणुका नदी पर बांध बनाकर ओबरा थर्मल पावर स्टेशन का निर्माण किया गया है। यह उत्तर प्रदेश सरकार का अधीन आता है। ओबरा एक औद्योगिक शहर है। यहां पावर प्लांट के अलावा सीमेंट फैक्टरी भी है। इसके बाद हमारी ट्रेन फाफराकुंड, मगरदहा, खुलदिल रोड से आगे बढ़ती हुई एक और स्टेशन पर रुकी। इस स्टेशन का नाम है मिर्चा धूरी। जी हां बिल्ली के बाद मिर्चा नामक स्टेशन। 

मिर्चा और करैला रेलवे स्टेशन - ये पूरा सफर बड़ा ही मनोरम है। रेल की खिड़की से बाहर देखते हुए बड़ा आनंद आ रहा है। रेल पटरियों के दोनों तरफ हरे भरे जंगल दिखाई दे रहे हैं, जिनमें पलाश के पेड़ों पर लाल फूल खिले हुए हैं। ये पलाश बड़े ही आकर्षक लग रहे हैं। तो लिजिए मिर्चा के बाद आठ किलोमीटर चलने पर आ गई एक और सब्जी करैला। जी हां स्टेशन का नाम है करैला रोड।  



करैला रोड जंक्शन से अब एक लाइन सिंगरौली होकर कटनी चली जाती है। जब हम सफर कर रहे थे तब यह लाइन नहीं बनी थी। पर अब करैला जंक्शन बन चुका है। करैला से 11 किलोमीटर के सफर के बाद हमलोग पहुंच चुके हैं अनपरा। अनपरा में भी विशाल थर्मल पावर स्टेशन है। यह रिहंद नदी पर जलाशय का निर्माण करके बनाया गया है। ओबरा, अनपरा, शक्तिनगर के कारण ही इस क्षेत्र को ऊर्जांचल कहते हैं। इस क्षेत्र में कोयले का भी प्रचूर मात्रा में उत्पादन होता है। यहां से बनने वाली बिजली काफी दूर तक जाती है। अकेले अनपरा की क्षमता 2630 मेगावाट बिजली उत्पादन की है।

अगला स्टेशन है कृष्णशिला। इसके बाद हमलोग पहुंच गए हैं शक्तिनगर टर्मिनल। यह आखिरी रेलवे स्टेशन है। यहां उतर कर ऐसा लगा मानो किसी सपनों की नगरी में आ गए हों। शक्तिनगर में एनटीपीसी का थर्मल पावर स्टेशन है। यह देश में एनटीपीसी द्वारा स्थापित पहला पावर प्लांट है। शक्तिनगर में एनटीपीसी की विशाल स्टाफ कालोनी बनी हुई है। यह किसी बड़े सुंदर व्यवस्थित नगर सा नजर आता है। हरे-भरे पार्क, केंद्रीय विद्यालय आदि सब कुछ यहां पर है। शाम हो गई तो तो शक्तिनगर में ही हमलोग अशोक भाई के एक मामाजी के घर जाकर रुके। उनके बेटे का नाम योगेंद्र है। उन लोगों ने हमारा बड़ा आत्मीय स्वागत किया। 

अगले दिन शक्तिनगर से हमलोग अमलोरी के लिए चले। शक्तिनगर उत्तर प्रदेश में है पर अमलोरी कोल फील्ड मध्य प्रदेश में। यह एनसीएल की खुली हुई कोयले की खान है। कोयले की कुछ खाने बंद यानी भूमिगत होती हैं।
इसके आसपास जयंत, बीना, निगाही जैसी और कई कोयले की खान हैं। अमलोरी में काशीनाथ भैया के से मुलाकात तो हुई ही यहां पर हमें खुली हुई कोयले की खान देखने का भी मौका मिला। तो ये यात्रा बड़ी सार्थक रही। हमारी वापसी भी इसी रेल मार्ग से हुई। वापसी में ट्रेन से सीधा बनारस चला आया जबकि अशोक सोनभद्र में ही उतर गए।
-     --    विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
(( SONBHADRA, CHOPAN, BILLI JN, MIRCHA DHURA, OBRA, ANPRA, SHAKTINAGAR, AMLORI ) 

4 comments:

  1. और भी बहुत से स्पॉट हैं यंहा घूमने के लिए सर, बेहतर हो और समय लेकर पधारें और एक यात्रा सीरीज लिख सकते हैं इस पर

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    1. धन्यवाद, आप मेरे ईमेल आईडी vidyutp@gmail.com पर अपना नंबर साझा करें।

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  2. मेरे लिए अनजाने छेत्र की अनजानी सी दास्तां

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