Sunday, September 20, 2020

सोनभद्र जिले मे मामी जी के गांव में


कुछ यात्राएं ऐसी होती हैं जो सालों नहीं भूलतीं। ये यात्रा मेरे बनारस में पढ़ाई के दिनों की है। वैसे तो मेरा घर रोहतास जिले में और ननिहाल भोजपुर जिले में हैं। पर मेरे एक तिहाई ननिहाल उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में है। दरअसल मेरे स्वर्गीय मामा लक्ष्मण सिंह जी का परिवार सोनभद्र जिले में राबर्ट्सगंज के पास ग्राम महुआवं में रहता है। इस मामाजी के परिवार से नानी के यहां शादी विवाह समारोहों में ही मिलना होता था। 

बनारस में सन 1990 से 1995 तक पांच साल की पढ़ाई के दौरान मेरी बार बार इच्छा होती लक्ष्मण मामा के परिवार के लोगों से मिलने की। मुझे लक्ष्मण मामा की धुंधली सी याद है। सन 1977 के आसपास की बात होगी। मेरे नाना जी रामगहन सिंह का निधन हो गया था। मैं मां के साथ कुसुम्ही अपने ननिहाल गया था। ननिहाल के दलान पर रहंट चल रहा था। लक्ष्मण मामा के बच्चे अशोक, मनोज, सुमिता दीदी रहंट के पानी में झूम झूम कर नहा रहे थे। मुझे नहाने से डर लगता था बचपन में । तो मैं रहट के पास मचान पर चढ़कर बैठ गया था नहाने से बचने के लिए। तभी लक्ष्मण मामा आए – बोले आओ तुम्हें भी साबुन लगाकर नहला दूं। मैं ना-ना करता रहा पर मेरी एक नहीं चली। इसके कुछ साल बाद लक्ष्मण मामा नहीं रहे। वे बरौनी थर्मल पावर स्टेशन में कार्यरत थे। पक्की सरकारी नौकरी थी। पर एक दिन घर में कपड़े टांगते हुए बिजली का करंट आ जाने से वे चल बसे। परिवार पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा। कुछ साल बाद मामी ने अपने बच्चों के साथ कुसुम्ही छोड़कर अपने भाई के पास महुआवं जिला सोनभद्र में रहना तय किया। बाद में यहीं पर उन्होंने खेतीबाड़ी की जमीन खरीदकर स्थायी निवास बना लिया।  


एक बार इच्छा हुई राबर्ट्सगंज जाने की। एक सुबह काशी हिंदू विश्वविद्यालय से निकला। रामनगर में पीपा के पुल से गंगाजी को पार किया। वही रामनगर जहां काशी नरेश का किला है। बचपन में हम एक कविता गाते थे –
रामनगर से राजा आवे,
 श्यामनगर से रानी।
रानी रोटी सेंक रही 
राजा भरते पानी ।
बनारस से चलकर राबर्ट्सगंज की तरफ जाने वाली सारी बसें रामनगर होकर ही जाती हैं। तो मैं रामनगर चौराहे पर था। नानी ने बता रखा था कि महुआवं जाने के लिए राबर्ट्सगंज बाजार से कुछ किलोमीटर पहले तेंदु पुल पर उतर जाना है। मैंने बस कंडक्टर को बता दिया तेंदु पुल तक का टिकट दे दो। नारायणपुर, अहरौरा, मधुपुर के बाद तेंदु पुल पर मैं दोपहर से पहले उतर गया। तेंदु पुल बभनौली गांव के पास है। जैसा कि नानी ने बताया था कि नहर पकड़कर पैदल ही पूरब की तरफ चलना है। तो मैं चलने लगा। लोगों से शांगो गांव के बारे में पूछा। जवाब के बदले सवाल आया – किसके घर जाना है। मैंने बोला विद्यासागर सिंह। तो गांव में हर किसी को आसपास के गांव के लोग भी जानते हैं। और विद्यासागर सिंह तो शांगो गांव ( पोस्ट – तेंदु ) के बड़े किसान हैं। उन्होंने रास्ता बता दिया। मैं दोपहर से पहले विद्यासागर सिंह के घर पहुंच गया। न उनसे मैं पहले कभी मिला था न वे मुझे पहचानते थे। मैंने अपना परिचय दिया कि मैं अशोक के फूफा का बेटा हूं। बनारस में काशी हिंदू विश्वविद्यालय में पढ़ता हूं। दरअसल अशोक का गांव महुआवं शांगो से भी थोड़ा आगे है। तो मां ने कहा था कि अगर जाना हो तो पहले शांगो विद्यासागर सिंह के यहां चले जाना वे लोग तुम्हें मामी के पास पहुंचा देंगे। तो श्री विद्यासागर सिंह मेरे मामा के साले हैं तो मेरे भी मामा हुए। मेरा परिचय जानकर वे प्रसन्न हुए। घर में मेरा स्वागत सत्कार हुआ।



दोपहर का खाना जिसमें चावल, दाल सब्जी के साथ घर की बनी शानदार दही थी, खाकर मैं तृप्त हो गया। मामा ने बताया कि थोड़ी देर में अशोक यहीं आने वाले हैं। तो आप आराम किजिए। मामा जी का घर दो मंजिला है। मैं छत पर एक कमरे में सो गया। शाम को नींद खुली तो अशोक आ चुके थे। उनके साथ हमलोग चल पड़े महुआवं। वहां मामी से मुलाकात हुई कोई दो दशक बाद। उन्होंने मुझे छुटपन में देखा था, अब मैं स्नातक कक्षा में पढ़ रहा था। मामी पर भी उम्र का असर दिखने लगा था। पर वे मिलकर बड़ी भावुक हो गईं। रात को हम वहीं रुके। महुआंव गांव में ही। महुआवं एक छोटा सा गांव है जो कैथी पोस्ट ऑफिस के तहत आता है।


वैसे अगर सीधे महुआवं गांव आना हो तो राबर्टसगंज से पहले हिंदुआरी में उतरकर आने का रास्ता सुगम है। अगले दिन अशोक भाई के साथ तय हुआ कि समय है तो हमलोग शक्तिनगर से आगे अमलोरी कोल फील्ड्स में चलेंगे जहां सबसे बड़े भैया काशीनाथ यानी सतीश कुमार सिंह कार्यरत हैं। तो हमलोग अगली दोपहर चल पड़े हैं शक्तिनगर के लिए। महुआवं से पैदल चलकर हिंदुआरी पहुंचे। वहां से बस से राबर्ट्सगंज बाजार में। वहां जाकर हमें अशोक के दूसरे नंबर के मामा रामलायक सिंह के घर रुके। इन मामा का पुकार का नाम जज है। वे जज तो नहीं बने पर वे आढ़ती का काम करते हैं। राबर्टसगंज में रेलवे क्रॉसिंग के पास जोगिया बाबा के पास उनका घर है। अगले दिन हमारा कार्यक्रम शक्तिनगर जाने का है। पर अब बस। उस यात्रा का बातें आगे करेंगे।
-         विद्युत प्रकाश मौर्य vidyutp@gmail.com
-         ( RAMNAGAR, AHRAURA, MADHUPUR, TENDU PUL, SHANGO, MAHUAON, KAITHI, HINDUWARI, ROBERTSGANJ, COLORS OF BANARAS )

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