Friday, July 24, 2020

सूफी संत कुतुबद्दीन बख्तियार काकी की दरगाह पर

दक्षिण दिल्ली के महरौली में बस स्टैंड के पास से रास्ता पूछते हुए गलियों में प्रवेश करें। सूफी संत कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी चिश्ती परंपरा के संत थे। वे हजरत निजामुद्दीन औलिया से भी पहले हुए थे। उनका जन्म  1173 में हुआ था। उनका निधन 1235 में हुआ। चिश्ती परंपरा के वे महान संत और विद्वान थे। वे ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती के शिष्य और उनके अध्यात्मिक उत्तराधिकारी माने जाते हैं। उनके बारे में माना जाता है कि उन्होंने भारतीय उपमहाद्वीप में चिश्ती तरीके की नींव रखी।

सूफी संत कुतुबद्दीन बख्तियार काकी के सबसे प्रसिद्ध शिष्य और आध्यात्मिक उत्तराधिकारी फरीदुद्दीन गंजशकर थे। उनके शिष्य हजरत निजामुद्दीन औलिया हुए। तो इस तरह चलती है सूफी संतों की परंपरा। मजार के द्वार पर एक शेर लिखा है -
इश्क के खंजर से मरते हैं अमीनुद्दीन जो। 
जिंदा रहते हैं हमेशा मिस्ले कुतुबद्दीन वो। 



चिश्ती परंपरा को दिल्ली पहुंचाया -  कुतुबद्दीन बख्तियार काकी से पहले भारत में चिश्ती तरीका राजस्थान के अजमेर और नागौर शहर तक ही सीमित था। कुतुबद्दीन बख्तियार काकी ने दिल्ली में चिश्ती परंपरा को स्थापित करने में एक प्रमुख भूमिका निभाई। मेहरौली में उनकी दरगाह दिल्ली की सबसे प्राचीन दरगाहों में से एक हैं। उनकी मजार पर हर साल  विशाल उर्स का आयोजन होता है। यह रबी-उल-अव्वल की चौदहवीं तारीख को मनाया जाता है। तब यहां देश भर से लाखों लोग पहुंचते हैं। 

शेरशाह ने बनवाया भव्य प्रवेश द्वार -  महान शासक सासाराम के शेरशाह सूरी ने संत की मजार के पास एक भव्य प्रवेश द्वार बनवाया था। जबकि बहादुर शाह प्रथम ने यहां मोती मस्जिद का निर्माण कराया। मोती मस्जिद में सुंदर नक्काशी देखी जा सकती है। इस मजार पर सभी धर्म के लोग चाहे वे हिंदू मुस्लिमसिख और ईसाई क्यों न हों मत्था टेकने पहुंचते हैं। खास तौर पर हर गुरुवार को यहां जायरीनों की भीड़ ज्यादा देखने को मिलती है। लोग मजार पर सुर्ख गुलाब के फूल चढ़ाते हैं।

कुतुबद्दीन बख्तियार काकी की दरगाह पर सालों भर अकीदतमंदों की भीड़ उमड़ती है। यहां पर आपको रोज ही मेले जैसा माहौल नजर आएगा। दरगाह की ओर जाने वाली गली में दोनो तरफ दुकानें सजी हुई नजर आती हैं। न सिर्फ देश के कोने कोने से बल्कि दुनिया के कई मुल्कों से जायरीन यहां पर इबादत करने के लिए पहुंचते हैं। 
-        विद्युत प्रकाश मौर्य – vidyutp@gmail.com
-        ( MAHRAULI, SUFI SANT KUTUBDIN BAKHTIYAR KAKI, URS, GREAT SAINT)

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