Tuesday, July 28, 2020

महरौली में गंधक की बाउली और राजाओं की बाउली

महरौली के बस स्टैंड के पा स्थित भूल भुलैया। 

दक्षिण दिल्ली के महरौली की पहचान उसकी खूबसूरत और आकर्षक डिजाइन वाले बाउलियों के कारण भी है। दिल्ली में 200 से ज्यादा बाउलियों के होने का संदर्भ मिलता है। बाउली गहरा कुआं हुआ करती है। इसमें पानी तक पहुंचने के लिए सीढियां बनाई जाती हैं। इनमें से कई महरौली इलाके में हुआ करती थीं। पर इन बाउली को देखने से पहले जान लेते हैं भूल भुलैया के बारे में।

आदम खान का मकबरा या भूल-भुलैया - बस स्टैंड के पास एक स्मारक है जिसे लोग भुल भूलैया कहते हैं। वास्तव में यह अकबर के सेनापति आदम खान का मकबरा है। आदम खान वैसे तो अकबर रिश्ते में भाई लगता था। कहा जाता है कि एक बार आदम खान ने अकबर के चहेते किसी मंत्री की हत्या कर दी। इससे नाराज होकर अकबर ने आदम खान को मौत की सजा दे डाली। आदम खां की मां ने अकबर को दूध पिलाया था। इसलिए  वह अकबर के भाई के समान था। पर आदम खान को मौत की सजा पर अकबर अडिग रहा। पर आदम खान को मारे जाने के बाद अकबर ने उसकी याद में महरौली में इस मकबरे का निर्माण कराया। विशाल चबूतरे पर बने इस मकबरे में अक्सर लोग तफरीह करते हुए मिल जाएंगे। बाहर से इस मकबरे की बनावट षटकोणीय है। हर बाहरी दीवार पर तीन दरवाजे बनाए गए हैं। 
बहुत बुरे हाल में है गंधक की बाउली। 

गंधक का बाउली –  कुतुबुद्दीन ऐबक और गुलाम वंश के शासक इल्तुतमिश  के काल में गंधक की बाउली का निर्माण कराया गया था। तेरहवीं सदी में बनी इस बाउली को पानी में गंधक की अधिकता के कारण ये नाम मिला। उन्होंने ये बाउली सूफी संत कुतुबदीन बख्तियार काकी के सम्मान में बनवाई थी। इसके निर्माण में अनगढ़ पत्थरों का इस्तेमाल किया गया था। यह पांच मंजिला है। इस बाउली की गहराई काफी है। आज ये बाउली बुरे हाल में है। इसको चारों तरफ से घेर दिया गया है। अब आप इसमें नीचे नहीं उतर सकते।

राजाओं की बाउली – महरौली बस स्टैंड से आगे बायीं तरफ वन क्षेत्र में 50 मीटर से ज्यादा चलकर जाने पर आपको एक और विशाल बाउली देखने को मिलती है। इसका नाम राजाओं का बाउली है। यह अभी भी काफी अच्छे हाल में है। इसे आप चारों तरफ से घूमकर देख सकते हैं। इसका निर्माण 1506 में लोदी वंश के दौरान दौलत खान ने करवाया था। इसके प्रवेश द्वार के पास एक मसजिद है। यह बाउली तीन मंजिला है। इसमें उतरने के लिए सीढ़ियां बनी हुई है। इसमें आजकल भी पानी है। पर यह पानी साफ नहीं है।

कुछ लोगों कहना है कि यह राजाओं की नहीं बल्कि राजों ( राज मिस्त्री ) की बाउली है। क्योंकि इस बाउली को एक राज मिस्त्री ने धीरे धीरे बनवाया था तो उसके नाम ही इस बाउली का नाम पड़ गया। जो भी ये बाउली आज भी बड़ी अच्छी हालत में है। पर जरूरत है इसके पानी को स्वच्छ और निर्मल बनाए रखने की। ऐसा करने से इसका आकर्षण और बढ़ जाएगा। राजाओं की बाउली के सामने एक अनजान स्मारक भी है। यह भी बहुत अच्छी हालत में है।
तो बने रहिए हमारे साथ,  आगे बात करेंगे महरौली के कुछ और स्मारकों की... 


राजाओं की बाउली के सामने एक अनजान स्मारक। 

-        विद्युत प्रकाश मौर्य – vidyutp@gmail.com
-      (MAHRAULI MONUMENTS, RAJAON KI BAWLI, GANDHAK KI BAWLI, STEP WELL ) 

No comments:

Post a Comment