Sunday, July 26, 2020

यहां पर शहीद हुए थे महान वीर बाबा बंदा बहादुर


सिख इतिहास में बंदा बहादुर का नाम स्वर्णाक्षरों में दर्ज है। महरौली में सूफी संत कुतुबद्दीन बख्तियार काकी  की मजार के पास ही गुरुद्वारा बंदा बहादुर स्थित है। इसका निर्माण महान योद्धा बंदा बहादुर की याद में कराया  गया है। इस स्थल का सिख इतिहास में खास महत्व है। बंदा बहादुर यहीं पर 16 जून 1716 को युद्ध लड़ते हुए शहीद हो गए थे। 

राजौरी में हुआ था जन्म -  बंदा बहादुर का जन्म 1670 में कश्मीर के पूंछ जिले में राजौरी के पास गांव में सोढ़ी ( राजपूत ) परिवार में हुआ था। बंदा बहादुर का बचपन का नाम लक्ष्मण देव था। बचपन में उन्होंने शिकार करना और युद्ध करना सीखा था। महज 15 साल की उम्र में उनसे एक हिरणी का शिकार हो गया जिसके बाद वे संत प्रवृति के हो गए। बाद में वे एक बैरागी संत के शरण में आकर माधोदास बैरागी हो गए थे। वे कुछ समय तक पंचवटी नासिक में भी रहे और योग ध्यान की शिक्षा ग्रहण की। इसके बाद वे नांदेड़ चले गए और यहां गोदावरी तट पर एक आश्रम की स्थापना की।

गुरुगोबिंद सिंह ने सिख धर्म में दीक्षित किया -  माधोदास बैरागी की नांदेड़ में गुरुगोबिंद सिंह जी से मुलाकात हुई। उन्हें नांदेड़ में गुरुगोबिंद सिंह जी ने सिख धर्म में दीक्षित किया और उनका नाम बंदा सिंह बहादुर रखा गया। गुरुजी ने उन्हें पंजाब का भार सौंपा। पंजाब में बंदा बहादुर ने मुगलों के खिलाफ कई युद्ध लड़े। उन्होंने खालसा राज की स्थापना की। बंदा बहादुर ने गुरुनानक देव जी और गुरुगोबिंद सिंह जी के नाम का सिक्का भी चलाया। उन्होंने शासन में कई सुधार किए। जमींदारी प्रथा समाप्त कर छोटे किसानों को दासता से मुक्त कराया। 

दिल्ली के महरौली में शहादत -  बाबा बंदा बहादुर को 1716 में छोटी सी फौज के साथ दिल्ली लाया गया। पहले उनकी फौज के लोगों को और बाद में 16 जून को महरौली में कुतुबद्दीन बख्तियार काकी की दरगाह के पास उनकी बेरहमी से हत्या कर दी गई।  उन पर इस्लाम कबूल करने के दबाव था। पर उन्होंने दो विकल्पों में से मौत को चुना।  

प्रोफेसर हरबंश सिंह लिखते हैं कि बाबा बंदा बहादुर के अंतिम दौर की संघर्ष की कहानी बहुत ही दर्दनाक है। दिल्ली आने से पहले पंजाब में धारीवाल (गुरदासपुर) के पास गुरुदास नंगल में आठ महीने तक वे मुगलों की सेना अन्न जल के अभाव के बीच लड़ते रहे थे। गढ़ी गुरदास नंगल में भी उनकी याद में बाबा बंदा सिंह बहादुर गुरुद्वारा बना हुआ है।

सिख इतिहास में बंदा बहादुर का बड़ा सम्मान है। दिल्ली में उनके नाम पर कई स्मृतियां हैं। दिल्ली के बारापुला एलिवेटेड रोड का नाम भी बंदा बहादुर के नाम पर रखा गया है। पंजाब सरकार के प्रयास से दिल्ली के मंडी हाउस के पास उनकी एक विशाल प्रतिमा भी लगाई गई है।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य – vidyutp@gmail.com
-        ( MAHRAULI, SHAHEED BANDA BAHADUR GURUDWAR, SAHEEDI STHAL )

2 comments:

  1. वीर बहादुर बंदा सिंह जी की जीवन की जानकारी बहुत सटीक शब्दों में दी
    इनकी शहादत को प्रणाम
    बाकी आप लेख तो अच्छे लिखते ही हो

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