Saturday, July 18, 2020

जम्मू का रघुनाथ मंदिर- सजा है रामजी का दरबार


जम्मू मंदिरों का शहर है। यहां पर कई अत्यंत सुंदर मंदिर हैं। पर जम्मू शहर के बीचों बीच स्थित है रघुनाथ मंदिर। रघुनाथ मतलब रामजी का मंदिर। देश में गिने चुने ही रामजी के मंदिर हैं। इनमें से रघुनाथ मंदिर एक है। इस विशाल मंदिर में रामजी का पूरा दरबार सजा हुआ है। मंदिर अपनी कलात्मकता के लिए प्रसिद्ध है और ये जम्मू शहर की पहचान है। यह एक मंदिर समूह है जिसमें कुल सात मंदिर बनाए गए हैं।

रघुनाथ मंदिर का निर्माण 1857 में जम्मू के पहले डोगरा महाराजा महाराजा गुलाब सिंह द्वारा करवाया गया था। वास्तव में मंदिर का निर्माण 1835 में महाराजा गुलाब सिंह ने शुरू करवाया था। इसे 22 सालों बाद 1857 में उनके पुत्र महाराजा रणबीर सिंह ने पूरा करवाया। कहा जाता है कि इस मंदिर को बनवानेकी प्रेरणा महाराजा गुलाब सिंह को एक संत रामदास बैरागी से मिली थी। वे बड़े राम भक्त संत थे। उनकी प्रेरणा से यहां राम मंदिर का निर्माण कराया गया।

मंदिर के आंतरिक हिस्से में कई जगह सोने का सुंदर काम हुआ है। कहा जाता है कि इस मंदिर में 33 करोड़ देवी देवता वास करते हैं। मंदिर के गर्भ गृह में राम, सीता और लक्ष्मण की विशाल मूर्तियां हैं। मंदिर परिसर में रामायण और महाभारत के प्रमुख पात्रों की भी मूर्तियां स्थापित की गई हैं।

मंदिर परिसर में देश चारों धाम की प्रतिकृति का निर्माण कराया गया है। एक कक्ष में भगवान सत्यनारायण की प्रतिमा स्थापित की गई है। मंदिर की दीवारों पर आकर्षक पेंटिंग भी लगी हैं। इनमें बारहमासा का सुंदर चित्रण भी है।
मंदिर में दूर से पांच कलश नजर आते हैं। विशाल परिसर वाले मंदिर में तीन प्रमुख प्रवेश द्वार हैं। रघुनाथ मंदिर जम्मू में श्री रामनवमी का त्योहार बड़े पैमाने पर मनाया जाता है। जम्मू राजा के शासन काल में तो रामनवमी के दिन यहां छुट्टी कर दी जाती थी। तब शहर में राजा राम की झांकी निकाली जाती थी जिनके साथ सुरक्षाबल की टुकड़ियां चलती थीं।

खुलने का समय – मंदिर श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए सुबह 6 बजे से रात्रि 8.30 बजे तक खुला रहता है। दोपहर में मंदिर कुछ घंटे के लिए बंद भी होता है। साल 2002 में रघुनाथ मंदिर पर बड़ा आंतकवादी हमला हुआ था। तब परिसर में 20 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी। उसके बाद मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था काफी कड़ी कर दी गई है। मंदिर परिसर में मोबाइल फोन, कैमरे आदि लेकर जाने की अनुमति नहीं है।

मंदिर परिसर में एक स्कूल और एक पुस्तकालय भी है। इस पुस्तकालय में कई भारतीय भाषाओं की दुर्लभ पांडुलिपियां मौजूद हैं। यहां संस्कृत की शारदा लिपि के कुछ ग्रंथ भी मौजूद हैं।

कैसे पहुंचे – रघुनाथ मंदिर की दूरी जम्मू रेलवे स्टेशन से तकरीबन चार किलोमीटर है। जम्मू के किसी भी हिस्से से यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। मंदिर परिसर से चारों तरफ सुंदर बाजार है।

शाम को जम्मू पहुंचने के बाद होटल से निकलकर हमलोग सबसे पहले रघुनाथ मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे। पर मुख्य द्वार पर जाकर पता चला कि मंदिर जल्द ही बंद होने वाला है। गेट पर सुरक्षा कक्ष में मोबाइल फोन जमा करके हमलोग शीघ्रता से अंदर पहुंचे। दर्शन करके प्रसाद लेकर वापस लौटे। मैं 1993 में रघुनाथ मंदिर में आ चुका हूं सदभावना रेल यात्रा के दौरान।

दर्शन के बाद हमलोग बाहर निकले और स्थानीय लोगों से सलाह लेकर यात्री वैष्णो भोजनालय में रात्रि भोजन के लिए पहुंचे। यह मंदिर इलाके का स्थानीय लोगों के बीच लोकप्रिय शाकाहारी भोजनालय है।
एक दिन बाद 31 अक्तूबर को जम्मू कश्मीर से पूर्ण राज्य का तमगा हटकर केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा मिला है। लद्दाख नामक नए केंद्र शासित प्रदेश का सृजन हो रहा है। मतलब रात को जब हम सो रहे होंगे जम्मू कश्मीर के इतिहास में नए अध्याय का पृष्ठ पलटा जा रहा होगा। इससे पहले रात में हमलोग जम्मू के रघुनाथ मंदिर के आसपास के बाजार से ड्राई फ्रूट और गर्म सलवार सूट आदि की शॉपिंग करने में लगे थे।



हमारी ट्रेन सुबह 5 बजे जम्मू स्टेशन से है। इसलिए हमने होटल के मैनेजर की मदद से सुबह 4 बजे स्टेशन छोड़ने के लिए एक आटो रिक्शा बुक कर लिया है। आटो वाले ने हमें समय पर स्टेशन पहुंचा दिया। जम्मू रेलवे स्टेशन के पास वैष्णवी धाम, कालिका धाम और सरस्वती धाम तीन विशाल आवासीय कांप्लेक्स माता वैष्णो देवी ट्रस्ट की ओर से बनवाए गए हैं। इनमें भी वैष्णो देवी जाने वाले श्रद्धालु ठहर सकते हैं।




सुबह सुबह जम्मूतवी दुर्ग  एक्सप्रेस ( 12550 ) समय से चल पड़ी।  रास्ते में हर स्टेशन पर ट्रेन समय से पहले पहुंच जा रही थी।  जम्मू से थोड़ा आगे चलते ही पंजाब शुरू हो जाता है। पठानकोट और जालंधर छावनी स्टेशनों पर भी समय से पहले पहुंची। मैं पठानकोट में उतरकर प्लेटफार्म पर भी गया। पंजाब को महसूस कर वापस डिब्बे में आ गया। 

पठानकोट के बाद होशियारपुर फिर जालंधर जिले के गांव शुरू हो जाते हैं। रास्ते में आया एक छोटा सा स्टेशन काला बकरा। किसी जमाने में अमर उजाला में रहते हुए मैं इस गांव में आया था अपने स्थानीय संवाददाता से मिलने के लिए। वे भोगपुर से रिपोर्टिंग करते थे। इसके बाद ट्रेन जालंधर छावनी से गुजरी। दुर्ग एक्सप्रेस ने हमें दोपहर दो बजे के आसपास दिल्ली से सफदरजंग रेलवे स्टेशन पर उतार दिया। स्टेशन का मुख्य द्वार फूलों से सजा  हुआ था। एक बार फिर दिल्ली हमारा स्वागत कर रही थी।

-        विद्युत प्रकाश मौर्य – vidyutp@gmail.com
-        ( JAMMU, RAHUNATH MANDIR, RAM TEMPLE, RAGHUNATH MARKET, JAMMU TAWI DURG EXP. )

2 comments:

  1. विस्तृत जानकारी। कोई अगर घूमने जाएँ तो आपका यह यात्रा वृतांत बहुत लाभकारी होगा। शुभकामनाएँ।

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