Tuesday, July 14, 2020

सानासर झील के आसपास दिलकश नजारे


नत्था टॉप से हौले-हौले चलते हुए हमलोग सानासर झील के पास आ पहुंचे हैं। सानासर - यह एक छोटा सा कस्बा है। यहां पर छोटा सा बाजार भी है और कुछ रहने के लिए होटल भी बन गए हैं। हाल के कुछ सालों में यहां पर पर्यटकों के आने का सिलसिला बढ़ा है। दरअसल सानासर झील सालों तक बेरुखी का शिकार थी। पर अब इसे इतना सुंदर बना दिया गया है कि यह डल झील का मुकाबला करती हुई प्रतीत होती है। झील का सौंदर्य एक बारगी मन मोह लेता है।

सानासर झील तक हमलोग टैक्सी बुक करके पहुंचे हैं। पर यहां तक बस से भी पहुंचा जा सकता है। स्थानीय लोगों ने बताया कि जम्मू बस स्टैंड से यहां के लिए हर रोज दो बसें आती हैं। आप जम्मू बस स्टैंड से सानासर जाने वाली बस का समय पता कर लें तो सस्ते में यहां तक पहुंच सकते हैं। फिर आप रात्रि विश्राम के लिए होटल सानासर में ही बुक करें। एक या दिन यहां रुकने के बाद फिर बस से ही वापस हो लें। यह एक अच्छा तरीका हो सकता है। जम्मू से सुबह 9 बजे और उधमपुर से 12.40, 1.50 बजे और 2.10 बजे सानासर के लिए बसें मिलती हैं। वहीं सानासर से सुबह 7.00 , 7.30 , 8.00 बजे बसें उधमपुर जाती हैं। दोपहर 2.00 बजे की बस बटोटे तक जाती है। वहां से आपको जम्मू या श्रीनगर की तरफ वाली बसें मिल जाएंगी। 

तो अब सानासर के बारे में। सानासर नाम बना है दो झीलों को जोड़ कर। साना और सर नामक दो झीलें हैं यहां पर। अब यह जम्मू क्षेत्र का अत्यंत सुंदर पर्यटक स्थल बन चुका है। चारों तरफ घने जंगलों के बीच ये झील बड़ी सुहानी लगती है। झील के आसपास बड़ा मैदान है जो उसका सौंदर्य और बढा देता है। इस झील की परिधि तकरीबन एक किलोमीटर की है।  

सानासर में झील के पास पहुंचने पर आपके पास दो मौके होते हैं। पहला झील में नौका विहार और दूसरा घुड़सवारी। हमने सानासर पहुंचते ही नौका विहार करना तय कर लिया। यहां कई सुंदर सुंदर नौका हैं। पर हमने पैडल से चलने वाली एक नौका किराये पर ली। इसमें हमने और अनादि ने बारी बारी से पैडल चलाने का पूरा आनंद उठाया। यह सब करते हुए झील की पूरी परिक्रमा कर डाली।

आप यहां पर झील में मछलियों को दाना डालने का पुण्य लाभ भी कमा सकते हैं। आसपास के बच्चे यहां आटे की गोलियां बेचते मिल जाएंगे। ये आपसे लगातार आटे की गोलियां लेने के आग्रह करते नजर आएंगे।

सर्दियों के दिनों में सानासर झील के आसपास सैलानियों की भीड़ बढ़ जाती है। इस दौरान सानासर में खूब बर्फबारी होती है। तो बर्फबारी का आनंद लेने सैलानी भी पहुंचते हैं। इस दौरान यहां पर आप बगी जंपिग, स्काई डाइविंग, पारा ग्लाइडिंग आदि का भी मजा ले सकते हैं।

झील में नौका विहार के बाद हमने घुड़सवारी का भी आनंद लेने का तय किया। तो अनादि पहले घोड़े पर बैठे। वे स्कूल भी घुड़सवारी सीख रहे हैं। इसलिए उन्हें इसमें मजा आता है। थोड़ी देर घोड़ा दौड़ाने के बाद हमलोग आसपास में सैर करने निकल पड़े। झील के पास ही जम्मू कश्मीर टूरिज्म का एक सरकारी होटल भी है। झील के करीब प्रशासन ने जन सुविधाओं का भी निर्माण कराया है।


नाग देवता का मंदिर - सानासर झील के पास भी एक नाग देवता का पुराना मंदिर है। इसे चौसर नाग मंदिर कहते हैं। इस मंदिर को स्थानीय लोग 1400 साल पुराना बताते हैं। हमने मंदिर में जाकर दर्शन किए। पटनी टॉप के मंदिर की तरह यहां भी नाग देवता मंदिर परिसर में लोग फोटोग्राफी नहीं करते। सानासर में एक गोल्फ कोर्स भी है। आप यहां बड़े सुकून से चाहें तो कुछ दिन गुजार सकते हैं।


पेट पूजा और वापसी - सानासर में झील के पास स्थित पार्किंग के आसपास ही कुछ प्रमुख आवासीय होटल और खाने पीने के लिए ढाबे हैं। दोपहर से शाम की ओर समय का घोड़ा भाग रहा है। हमें कुदरत के नजारों में कुछ इस कदर खोए थे कि दोपहर का खाना ही भूल गए थे। पर अब चलने की बारी आई तो हमें भूख लगने लगी है।

हम बंदराल वैष्णो ढाबे में रोटी और चावल की थाली का आर्डर करके खाने के लिए बैठ गए हैं। यहां पर चाउमीन भी मिल रहा है। मैंने चावल की थाली आर्डर की तो माधवी वंश ने चाउमीन। ये बंदराल इधर राजपूत जाति के लोगों का उपाधि होती है।

तो बंदराल होटल वाले बहादुर सिंह जी बता रहे हैं कि बर्फबारी के समय वे खाने पीने की दरें बढ़ा देते हैं। बर्फबारी में सानासर का नजारा बदल जाता है। उस समय टूरिस्ट खूब आते हैं तो कमाई भी ज्यादा हो जाती है। पर आजकल उनका ऑफ सीजन चल रहा है।  
-        विद्युत प्रकाश मौर्य – vidyutp@gmail.com
-        ( SANSAR LAKE, PATNI TOP, BOATING, BUS, DHABA )





2 comments:

  1. सनासर झील की बहुत विस्तार पूर्वक जानकारी
    गजब की फोटो, एक छोटी सी जगह की बहुत अच्छी जानकारी दी है आप

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    1. धन्यवाद भाई साहब, मुझे ये जगह काफी अच्छी लगी, फिर कभी जाने इच्छा भी रहेगी।

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