Sunday, July 12, 2020

नत्था टॉप - 8900 फीट की ऊंचाई पर चाय की चुस्की


पटनी टॉप के पार्कों की सैर के बाद अब हमारी अगली मंजिल है नत्था टॉप। मुझसे पहले पटनी टॉप घूमने आए हमारे साथी प्रमोद तिवारी ने सलाह दी थी कि आप नत्था टॉप और सनासर लेक जरूर जाइएगा। तो हमलोग अब नत्था टॉप की ओर चल पड़े हैं। नत्था टॉप की दूरी पटनी टॉप से कोई 12 किलोमीटर है। यह पटनी टॉप से भी ज्यादा ऊंचाई पर है।

आमतौर पर टैक्सी वाले नत्था टॉप और सनासर लेक जाने के लिए अलग से चार्ज करते हैं। यह ठीक है। पर वे रास्ता को खराब बताते हैं। पर हमने देखा ये रास्ता कोई इतना खराब नहीं है।

नत्था टॉप 2711 मीटर ( 8900 फीट ) की ऊंचाई पर है। यानी पटनी टॉप से की 700 मीटर ऊंचा। हमारी टैक्सी घुमाव दार रास्तों से धीरे धीरे नत्था टॉप के लिए ऊंचाई नाप रही है। दूर दूर तक हरे भरे नजारे नजर आ रहे हैं। पर सर्दियों के दिन में पूरी तरह हिमाच्छादित हो जाते हैं। आसपास जो दूर दूर तक पहाड़ियां दिखाई देती हैं ये पीर पंजाल रेंज की पहाड़ियां हैं।  

सर्दियों में होती है बर्फबारी - सर्दियों में नत्था टॉप के एरिया में पारा ग्लाइडिंग का आयोजन भी होता है। इस दौरान यहां खूब रौनक रहती है। सड़क के किनारे खाने पीने की अस्थायी दुकानें सजी रहती हैं। जो इन दिनों नहीं दिखाई दे रही हैं। सर्दियों में नत्था टॉप तक आने वाले लोगों को स्नो जैकेट और गम बूट किराये पर लेना पड़ता है।

व्यू प्वाइंट से नजारा -  नत्था टॉप के रास्ते में एक जगह व्यू प्वाइंट बना हुआ है। यहां पर एक कैफेटेरिया भी है। ये दो मंजिला व्यू प्वाइंट और कैफेटेरिया अभी खुला हुआ है। यहां पकौड़े चाय के साथ कुछ और चीजें खाने पीने को मिल जाती हैं। कुछ और लोग यहां पर अपनी गाड़ियों के साथ आकर रुके हुए हैं।    

आपको बता दें नत्था टॉप के इलाके में कोई होटल नहीं है। आपको यहां पहुंचने के लिए पटनी टॉप या फिर सनासर झील के इलाके में रुकना होगा। ज्यादातर सैलानी पटनी टॉप में ही रुकते और यहीं से नत्था की ओर घूमने जाते हैं। कुछ घंटे वहां गुजारने के बाद लौट आते हैं। नत्था टॉप इलाका सेना के क्षेत्र में आता है। यहां पर एक टावर बना हुआ है। सैन्य क्षेत्र सैलानियों के लिए प्रतिबंधित है।

चाय की चुस्की - नत्था टॉप के सबसे ऊंचे प्वाइंट पर पहुंचने के बाद हमलोग रुक जाते हैं। यहां पर सड़क के किनारे एक चाय की दुकान है। वैसे तो मैं चाय नहीं पीता पर इतनी ऊंचाई पर आए हैं तो यादगारी के तौर पर चाय पीनी चाहिए। तो हमने चार चाय का आर्डर दिया और बैठ गए। कुदरत का नजारे लेने के लिए। बेनया टी स्टाल के बाहर एक लकड़ी की बेंच लगी है। इसके आसपास कुछ कुरसियां भी हैं। थोड़ी देर तक आसपास निहारते रहे। इसी दौरान चाय बनकर आ गई। 2700 मीटर से ज्यादा ऊंचाई पर चाय की चुस्की लेने के बाद हमलोग आगे बढ़ चले।

लकड़ियों की तस्करी - नत्था टॉप से सानासर लेक की ओर जाने वाला रास्ता एक बार फिर उतार पर है। क्योंकि सानासर इलाके की ऊंचाई नत्था टॉप की तुलना में कम है। आसपास में दूर दूर पर कुछ गांव हैं। इन गांव के लोग जंगल से लकड़ियां लेने जाते हैं। पानी की भी दिक्कत है। गांव के लोगों को काफी दूर से पानी लेकर आना पड़ता है। गांव के लोग जंगल से लकड़ियां जरूर काटते हैं। पर वन विभाग की इनपर कड़ी नजर रहती है। तस्करी रोकने के लिए वन विभाग खुद की कटवाई हुई लकड़ियों पर पहचान के लिए खास तरह का मार्क लगवाता है।

 - विद्युत प्रकाश मौर्य vidyutp@gmail.com 
( PATNI TOP TO NATTHA TOP, VIEW PONT, A CUP OF TEA ) 

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