Thursday, June 4, 2020

त्रियुगीनारायण – यहां हुआ था शिव पार्वती का विवाह


हमलोगों ने गौरीकुंड में ज्यादा देर न करते हुए आगे बढ़ने का उपक्रम किया।केदारनाथ जाते समय जिस दुकान में सामान रखा था उनसे हिसाब किताब करके आगे बढ़ चले। गौरी कुंड बाजार से टैक्सी स्टैंड के लिए तकरीबन आधा किलोमीटर पैदल चलना पड़ा। पर यहां से हमें सोन प्रयाग के लिए टैक्सी तुरंत ही मिल गई।

सोन प्रयाग पहुंचने के बाद हमारी इच्छा त्रियुगी नारायण मंदिर जाने की है। पर अभी मंदिर जाने के लिए कोई शेयरिंग टैक्सी नहीं मिल पा रही है। तो हमने एक टैक्सी वाले आरक्षित यात्रा की बात की। उन्होंने कहा एक हजार रुपये में मंदिर जाना और आना हो सकेगा। हमने उनका प्रस्ताव तुरंत मान लिया। हमलोग त्रियुगी नारायण की तरफ चल पड़े हैं। सोन प्रयाग बाजार से थोड़ा आगे निकलकर दाहिनी तरफ टैक्सी पहाड़ों के घुमावदार रास्ते पर चढ़ने लगी। चालक महोदय ने टैक्सी में स्कूल से वापस लौट रहे एक बच्चे को भी बिठा लिया। हमने कोई आपत्ति नहीं जताई। पहाड़ों पर वाहनों की काफी कमी रहती है।

सोन प्रयाग से त्रियुगी नारायण मंदिर की दूरी 13 किलोमीटर है। इस मंदिर का हिंदू परंपरा में काफी महत्व है। कहा जाता है कि इसी मंदिर में शिव और पार्वती का विवाह हुआ था। हो सकता है इस कहानी की सत्यता पर किसी को शक हो। पर उत्तराखंड के हर तीर्थ स्थल और मंदिर के साथ इस तरह की कथाएं जोड़ी गई हैं। तभी उत्तराखंड को देवभूमि का तमगा मिला है। बहरहाल यह जगह की त्रियुगीनारायण के नाम से जानी जाती है। यह मंदिर उत्तराखंड के प्रमुख दर्शनीय मंदिरों में गिना जाता है।
त्रियुगीनारायण गांव में यह मंदिर स्थित है। बड़े ही शांत और मनोरम वातावरण में स्थित इस स्थल की ऊंचाई 7500 फीट ( 1947 मीटर ) है। मंदिर के आसपास छोटा सा बाजार है। कुछ खाने पीने के होटल हैं तो रहने के लिए कुछ गेस्ट हाउस भी बने हुए हैं।

देश और दुनिया भर से हिंदू श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। बड़ी संख्या में नव विवाहित युगल मंदिर में आशीर्वाद लेने के लिए पहुंचते हैं। बड़े-बड़े उद्योगपति और राजनेता भी इस मंदिर में पहुंचते हैं। मंदिर में प्रवेश के लिए आपको सीढ़ियां उतरनी पड़ती है। मंदिर परिसर में वह वेदी है जहां बताया जाता है कि शिव और पार्वती ने फेरे लिए थे। इस वेदी को ब्रह्म शिला कहते हैं। यहीं पर हिमालय ने अपनी पुत्री का कन्यादान किया था। कहा जाता है विष्णु ने इस दिव्य विवाह में पार्वती के भ्राता का दायित्व निभाया था। वहीं ब्रह्मा इस विवाह के पुरोहित बने थे।

मुख्य मंदिर के अंदर त्रियुगी नारायण मतलब तीनो लोकों को स्वामी भगवान विष्णु की प्रतिमा बनी है। उनके बगल में लक्ष्मी,  मां पार्वती और दूसरे देवी देवताओं की भी प्रतिमा है। मंदिर के प्रवेश द्वार पर गणेश जी विराजमान हैं।
मंदिर परिसर में कई कुंड - मंदिर परिसर में सरस्वती गंगा नामक जल धारा का उदगम हुआ है। परिसर में कई पवित्र जल के कुंड बने हुए हैं। इनके नाम रुद्रकुंड, ब्रह्मकुंड, विष्णुकुंड और सरस्वती कुंड है। 


यहां रुद्रकुंड में स्नान करने परंपरा है। मंदिर में प्रसाद के तौर पर चावल की थाली चढ़ाने की परंपरा है। ये थाली मंदिर के आसपास के दुकानों से मिल जाती है।
मंदिर में अखंड धूनी - मंदिर के अंदर अखंड धूनी जलती रहती है। इसके बारे में बताया जाता है कि यह हजारों साल से अनवरत जल रही है। कहा जाता है कि इसी अग्नि को साक्षी मानकर शिव पार्वती ने विवाह रचाया था। लोग इस धूनी से भभूत लेकर अपने घर जाते हैं।

पंडों के बही-खाता में खानदानी परिचय  – त्रियुगी नारायण मंदिर में पंडों की परंपरा है। देश के अलग अलग क्षेत्र के हिसाब से पंडे हैं यहां पर। उन पंडों के पास मोटे रजिस्टर हैं। अगर आपके खानदान का कोई व्यक्ति पहले यहां आया होगा तो उसका नाम इस रजिस्टर में दर्ज हो सकता है। अगर आप पहली बार आए हैं तो अपना नाम पता दर्ज करा सकते हैं। मेरे दादाजी और पिता जी कभी यहां नहीं आए, तो मैंने अपना नाम पता और पूरा पारिवारिक परिचय पंडा जी के खाते में दर्ज करा दिया है। और उन्होंने मुझे प्रसाद में भभूत प्रदान किया है। मैंने पूछा इसके एवज में दक्षिणा तो उन्होंने कहा आपकी मर्जी। कोई जबरदस्ती या दबाव नहीं है।

कहा जाता है कि त्रियुगी नारायण में पार्वती के पिता हिमावत राजा की राजधानी हुआ करती थी। त्रियुगी नारायण मंदिर के आसपास गौरी गुफा देखी जा सकती है। वहीं व्यू प्वाइंट से प्रकृति का नजारा किया जा सकता है।
त्रियुगी नारायण में भी श्रद्धालुओं के रहने के लिए बाबा काली कमली वाले की धर्मशाला बनी हुई है। कुछ और गेस्ट हाउस भी हैं। भीड़-भाड़ से दूर यह एक शांत ग्राम है। अगर आपके पास समय है और पहाड़ों की शांति से संवाद करने की इच्छा है तो यहां एक दो दिन रूक सकते हैं।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य- vidyutp@gmail.com
 ( TRIYUGI NARAYAN TEMPLE , SHIVA AND PARVATI VIVAH, KEDAR -17) 

4 comments:

  1. बाबा जी के धाम की अद्भुत सचित्र यात्रा वर्णन किया है आपने ,त्रियुगी नारायण मंदिर जहाँ माँ पार्वती,प्रभु शिव जी का विवाह रचाया गया है ये तो बैकुण्ठ से कम नहीं ,इस जानकारी के माध्यम से यात्रा करना आसान हो जायेगा ,
    बहुत बहुत धन्यवाद आपका ,शुभ प्रभात ,

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  2. That's nicely described....I have been to the place for a dozen of times... whenever I trekked on that side of the Himalayas, I always stayed there in the nearby village or visited it as it truly a place that soothes the mind...thanks for sharing

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