Tuesday, June 30, 2020

मनमोहक, मनभावन तवी नदी के संग-संग


हमलोग कटरा से उधमपुर की राह पर हैं। कटरा से बाहर कोई दस किलोमीटर जाने पर हमें ककड़ियाल में श्रीमाता वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी का परिसर नजर आया। ये विश्वविद्यालय श्रीमाता वैष्णो देवी ट्रस्ट ने बनवाया है। यहां कई विधाओं में पढ़ाई शुरू हो चुकी है। कुछ ही सालों में विश्विवद्यालय ने अच्छी रैंकिंग हासिल की है।  

कटरा शहर से कुछ किलोमीटर आगे निकलने पर सड़क के किनारे दाहिनी तरफ शनि देव का विशाल मंदिर आया। स्थानीय लोगों की इस मंदिर में बड़ी आस्था है। वैसे शनि के कोप से हर कोई डरता है। शनि गरीबों, दलितों और पीड़ितों पर अपनी कृपा बरसाते हैं। हमने यहां पर रुक कर उन्हें प्रणाम किया और आगे की ओर बढ़ चले।

थोड़ी देर बाद टिकरी आया। टिकरी वह जगह हैं जहां पर हमें जम्मू श्रीनगर हाईवे मिला। हमलोग बायीं तरफ यानी उधमपुर की तरफ चलने लगे। अगर दाहिनी तरफ जाएंगे तो जम्मू पहुंच जाएंगे। मतलब जम्मू से कटरा अगर सड़क मार्ग से आना हो तो उधमपुर नहीं आएगा। पर रेल मार्ग उधमपुर होकर आती है। यहां से श्रीनगर की दूरी 220 किलोमीटर लिखी है। आगे बालियां नामक ग्राम आया। थोड़ी देर बाद हमलोग उधमपुर शहर पहुंच गए हैं। हाईवे ऊधमपुर शहर के बाहरी इलाके से होकर गुजर जाता है। हमने अब उधमपुर शहर को पार कर लिया है। 

उधमपुर का रेलवे स्टेशन उधमपुर शहर से बाहर बना हुआ है। रेलवे स्टेशन और शहर के बीच में श्रीनगर की ओर जाने वाला नेशनल हाईवे नंबर 44 गुजर रहा है। इसके बायीं तरफ शहर है तो दाहिनी तरफ रेलवे स्टेशन अगर आप रेल से देर रात या अहले सुबह उधमपुर रेलवे स्टेशन उतरते हैं तो कहीं जाने के लिए साधन मिलने में अभी थोड़ी दिक्कत हो सकती है। 

माधवी के आग्रह पर हमारे ड्राईवर साहब बिट्टू शर्मा जी गाड़ी बहुत ही धीमी गति से संयत से चला रहे हैं। जम्मू श्रीनगर हाईवे को चौड़ा करने का काम जगह जगह जारी है। इसलिए कई जगह सड़क पर काम चलता हुआ नजर आ रहा है। तो कई जगह धूल उड़ रही है तो वाहन सावधानी से चलाना और जरूरी हो जाता है।

सूर्य की पुत्री है तवी -  उधमपुर के आगे चलने पर हमें हाईवे के साथ साथ तवी नदी बहती हुई दिखाई दे रही है। एक जगह मैं बिट्टू शर्मा जी से आग्रह करता हूं टैक्सी रोकने के लिए। तवी को काफी निकट से देखने की इच्छा है। मैं उतर कर चला जाता हूं तवी नदी की जलधारा के काफी करीब। चांदी जैसा धवल जल है तवी का। बीच में ढेर सारे पत्थर हैं। इन शिलाओं के संग सतत प्रणय संवाद करती हुई तवी मदमाती हुई आगे बढ़ती जाती है। इन शिलाओं ने भी क्या किस्मत पाई है। मैं देख रहा हूं कि थकी होने के बावजूद पीछे पीछे माधवी भी चली आ रही हैं। तवी का प्यार उन्हें भी बुला लेता है। तवी नदी जम्मू क्षेत्र की जीवन रेखा मानी जाती है। यह चिनाब की सहायक नदी है। 

तवी का उदगम डोडा जिले में भद्रवाह के पास कैलाश कुंड के आसपास से हुआ है। तवी नदी के उदगम से पहले शुद्ध महादेव का मंदिर है, जो इस इलाके का प्रमुख तीर्थ है। तवी नदी को सूर्य की पुत्री माना जाता है। इसकी कुल लंबाई मात्र141 किलोमीटर है। जम्मू शहर भी तवी नदी के तट पर बसा हुआ है। आगे पाकिस्तान में जाकर तवी चिनाब में समाहित होकर अपना अस्तित्व मिटा देती है। नदियों की यही नियती है। ईश्क में फना हो जाना। 

रास्ते में कई छोटे छोटे झरने तवी नदी में समाहित होते रहते हैं। थोड़ी दूर आगे चलने पर हमलोग शाम के नास्ते के लिए एक होटल में रुके। इस होटल का नाम भी है तवी व्यू। यह समरोली नामक एक छोटे से गांव में है। हमारे टैक्सी वाले को सामान का एक पैकेट यहां पर किसी दुकानदार को देना था। पर वह दुकान आज बंद है तो उन्होंने पड़ोस के दुकान को ये पैकेट पकड़ा दिया है।

होटल के पृष्ठ भाग से तवी नदी का सुंदर नजारा दिखाई दे रहा है। तवी नदी हाईवे के साथ ही चल रही है। नदी की गहराई ज्यादा नहीं है। आप कहीं भी नदी के अंदर उतर सकते हैं। अनादि को ये जगह काफी पसंद आई और वे नदी के उस पार के नजारों की तस्वीरें उतारने में व्यस्त हो गए। तवी नदी का नजारा करते हुए हमलोग पराठे के संग चाय की चुस्की ले रहे हैं।  हमारा सफर अभी जारी है।

-        विद्युत प्रकाश मौर्य – vidyutp@gmail.com

 ( TAWI RIVER, KATRA TO UDHAMPUR, SAMROLI, HOTEL TAWI VIEW )
 आगे पढ़िए - देश की सबसे लंबी सुरंग - चेनानी नाशरी टनेल 


No comments:

Post a Comment