Sunday, June 28, 2020

कटरा से पटनी टॉप - स्वप्नलोक का सफर


माता वैष्णो देवी की अनवरत चढ़ाई और दर्शन के बाद लगातार सफर करके उतर आने के बाद हम सब थक चुके थे। थकते भी भला क्यों नहीं हमने 17 घंटे में चढ़ना उतरना जिसमें भैरोनाथ की यात्रा भी शामिल है, रास्ता नाप लिया था। दोनों ने इस यात्रा में खूब उत्साह दिखाया था। तो माधवी और अनादि तो होटल में आते ही सो गए।

हमारा होटल में चेकआउट का समय दोपहर 12 बजे का है। हालांकि होटल वाले ने कहा है कि वह एक घंटे की रियायत भी दे देगा। पर मैंने माधवी वंश को कहा कि हम अब आगे यहां से पटनी टॉप जाने वाले हैं। यह सुनकर उन्हें थोड़ी कोफ्त हुई, क्योंकि वे आराम करके यात्रा की थकान मिटाना चाहती थीं। पर हमने उन्हें ज्यादा सोने का मौका नहीं दिया। दोपहर एक बजे तक हमें अगले सफर के लिए तैयार होना पड़ा।

हमने पटनी टॉप जाने के लिए एक टैक्सी बुक कर ली है। हमारे मित्र प्रमोद कुमार तिवारी पहले पटनी टॉप जा चुके हैं। उनके अनुभव के आधार पर टैक्सी बुक करके जाने की योजना बनी। मैंने कटरा से अमर उजाला नोएडा में कार्यरत प्रमोद तिवारी को फोन किया। उन्होंने एक टैक्सी वाले का नंबर दिया। फिर हमने अपने होटल के प्रोपराइटर को फोन किया, जहां हम जाकर ठहरने वाले हैं। दोनों ने टैक्सी की दरें एक सी ही बताईं।


फिर हमने पटनी टॉप के लिए टैक्सी उसी होटल के प्रोपराइटर से बुक की जिनका होटल हमने पटनी टॉप में बुक किया है। ये होटल हमने गोआईबीबो डॉट काम से बुक किया है। होटल के प्रोपराइटर का नाम रंजीत ठाकुर है। पता चला कि वे स्थायी तौर पर कटरा में ही रहते हैं। यहां पर उनके दो होटल हैं और ट्रैवेल टूर ऑपरेटर का भी काम करते हैं। वे इंडिका एसी टैक्सी लेकर हमारे होटल आए और हमारा परिचय ड्राईवर से करा दिया। 


टैक्सी ड्राईवर महोदय का नाम बिट्टू शर्मा है। (मोबाइल – 94196-09095 ) वे काफी अनुभवी हैं। उनका हमारा दो दो दिन का साथ रहा। ये तय हुआ कि वे आज हमें पटनी टॉप के होटल छोड़ देंगे। अगले दिन पटनी टॉप और आसपास घुमाने के बाद रात तक जम्मू शहर में छोड देंगे। इस पूरे पैकेज के हमें उन्हें 4500 रुपये देने हैं। बिट्टू शर्मा जी के साथ हमारा सफर यादगार रहा। 

बिट्टू शर्मा रास्ते के काफी जानकार होने के साथ बड़े संयमित ढंग से टैक्सी चला रहे हैं। वर्ना पहाड़ों पर आपको अच्छे चालक न मिलें तो लोगों को चक्कर आने लगते हैं। दोपहर में हमलोग कटरा शहर से बाहर निकल रहे हैं। लंच नहीं कर सके हैं तो चलते-चलते हमने एक बार फिर हमने कटरा के कुलचे खाए। यहां के कुलचों का स्वाद निराला है। खाने के साथ रास्ते के लिए कुलचे पैक कराकर भी रख लिए। कटरा से हमलोग उधमपुर के मार्ग पर चल निकले हैं। तो आगे के सफर की बातें अगली कड़ी में। 
-        विद्युत प्रकाश मौर्य – vidyutp@gmail.com
( KATRA TO UDHAMPUR,TAXI, KULCHA OF KATRA)

2 comments:

  1. बहुत ही सुंदर सचित्र वर्णन वैष्णव धाम की, जय माता दी नमन

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