Friday, June 26, 2020

वैष्णो माता ने किया था भैरोनाथ का वध


माता के दर्शन के बाद बाहर आने पर हमने रात के 10 बजे एक रेस्टोरेंट में रात्रि भोजन किया। इसके बाद लगेज बॉक्स से अपना सामान निकाला। माधवी और वंश ने कहा कि अब हमलोग भैरोनाथ चलेंगे। सारे श्रद्धालु तो नहीं पर काफी लोग माता के दर्शन के बाद भैरोनाथ भी जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि भैरो के दर्शन के बाद ही यात्रा पूरी होती है। भैरो घाटी की ऊंचाई सांझी छत और भवन से ज्यादा है। भैरोनाथ का मंदिर 6600 फीट की ऊंचाई पर है जबकि माता का मंदिर समुद्र तल से 5200 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।

इससे पूर्व की अपनी यात्राओं में मैं सिर्फ एक बार ही भैरोनाथ गया हूं। तब जब हम गीतेश्वर भाई और सुधीर राघव के साथ आया था। तो हम भैरोनाथ के दर्शन के लिए चल पड़े। माधवी ने पूरा उत्साह दिखाया। अनादि के उत्साह में तो कोई कमी नहीं रहती। भैरोनाथ तक पहुंचने के दो तरीके हैं। एक सड़क मार्ग के से तो दूसरा सीढ़ियों से। सीढ़ियों वाला रास्ता थोड़ा थकाने वााला है। पर इससे समय बचता है। भैरोनाथ के लिए हमने सीढ़ियों वाले मार्ग का ज्यादा इस्तेमाल किया।



भैरोनाथ के लिए रोप-वे सेवा - वैष्णो देवी से भैरोनाथ की दूरी दो किलोमीटर के करीब है। इस यात्रा के लिए नई रोपवे सेवा भी शुरू हुई है। पर ये रोपवे सेवा रात में बंद हो जाती है। हमलोग सीढ़ियों के रास्ते से जल्दी ही भैरोनाथ मंदिर तक पहुंच गए। रात के 12 बजे के आसपास भैरोनाथ के दर्शन के बाद हमलोगों ने नीचे उतरना भी शुरू कर दिया। भैरोनाथ से अधकुआंवारी तक उतरने के लिए हमने पुराने रास्ते का इस्तेमाल किया। इसमें रास्ते में सांझी छत आता है जबकि जाते समय हिमकोटि मार्ग से जाने पर सांझी छत नहीं पड़ता है। 

भैरोनाथ की कथा - भैरोनाथ मंदिर के पास साईन बोर्ड पर भैरोनाथ की जो कथा लिखी गई है उसके मुताबिक भैरोनाथ माता का वाणगंगा से पीछा करता हुआ चरण पादुका होते हुए पवित्र गुफा भवन तक आ पहुंचा था। जब उसने गुफा में प्रवेश करने की कोशिश की तो वहां पर मौजूद हनुमान जी से उसका युद्ध हुआ। इसी दौरान माता स्वयं गुफा से निकलकर आईं और भैरोनाथ का सिर धड़ से अलग कर दिया। 

अपना सिर कट जाने के बाद भैरोनाथ को माता की शक्ति समझ में आई। उसके बाद वह माता के शरणागत हो गया। वह माता से प्रार्थना करने लगा। तब माता ने उसे आशीर्वाद दिया कि जो श्रद्धालु मेरे दर्शन करने आएंगे वे भैरोनाथ के भी दर्शन करेंगे तभी उनकी यात्रा संपन्न मानी जाएगी। कहा जाता है कि जहां पर भैरोनाथ का मंदिर है वहीं पर उसका सिर आकर गिरा था। 



भैरोनाथ के दर्शन के बाद लोग वहां से प्रसाद के तौर पर वहां जलाई जा रही धूने से भभूत लेकर अपने साथ जाते हैं। हमने भी थोड़ा सा भभूत लिया और बिना देर किए वापसी की राह पर चल पड़े। भैरोनाथ से चलने के बाद रास्ते में ओम व्यू प्वांट आता है। अगर आप दिन में यात्रा कर रहे हों तो त्रिकुटा पहाड़ी के सुंदर नजारे यहां से दिखाई देते हैं। 


ओम व्यू प्वाइंट से आगे चलने के बाद हमलोग धीरे-धीरे सांझी छत पहुंच गए हैं। यहां पर रुक कर हमने चाय पी। सांझी छत पर रुकना मुझे हमेशा अच्छा लगता है। हर यात्रा में मैं यहां पर थोड़ा वक्त बिताना चाहता हूं। इसके बाद फिर धीरे-धीरे उतरने का सिलसिला शुरू कर दिया। सांझी छत से अधकुआंरी तक खड़ी चढ़ाई है इसलिए उतरने में भी सावधानी बरतनी पड़ती है। रात में सहयात्री बहुत कम हैं। रात के तीन बजे के करीब हमलोग अधकुंवारी पहुंच चुके थे। यहां 24 घंटे काफी चहल पहल रहती है। यहां मंदिर परिसर भी मनोरम हो गया है। 

रात सुबह से मिलने के लिए आगे बढ़ रही है। पर हमें थोड़ी भूख लगती जा रही है। अध कुआंरी में सागर रत्ना में रुककर हमने मसाला डोसा का ऑर्डर दिया। अनादि को बैठने पर नींद आ रही है। जब नींद आ रही हो तो खाने से वे नाराजगी दिखाते हैं। हालांकि डोसा उनका प्रिय भोजन है। खैर, थोड़ी सी पेट पूजा के बाद हमने एक बार फिर उतरना शुरू कर दिया। सबकी आंखों में नींद थी, पर हम जल्दी उतर जाना चाहते थे। चरण पादुका पहुंचने के बाद रास्ते में कई सारे फुट मसाज वाले पार्लर खुल गए हैं। पांव की थकान मिटाने के लिए हमलोग एक मसाज सेंटर में थोड़ी देर बैठ गए। इसका भी मजा ले लिया जाए। 

वापसी में वही सारे रास्ते वही सारी दुकानें दिखाई दे रही हैं जो हमें जाते समय मिली थीं। वाणगंगा पहुंचने से पहले अनादि और माधवी थक चुके थे। वाणगंगा का गेट पार करने के बाद हमने अपने होटल के टैक्सी वाले को फोन किया। अपने वादे के मुताबिक ही थोड़ी देर में वे टैक्सी लेकर वाणगंगा पर हाजिर थे। टैक्सी में बैठकर सुबह के सात बजे से पहले हमलोग कटरा अपने होटल में पहुंच चुके थे। इस तरह 17 घंटे में हमने माता के दरबार में चढ़ने उतरने की यात्रा पूर कर ली, जिसमें भैरोनाथ के दर्शन भी शामिल हैं।
दर्शन के बाद वापसी वाणगंगा में 

-        विद्युत प्रकाश मौर्य – vidyutp@gmail.com
-        ( KATRA TO BHAWAN, BHAIRON NATH TEMPLE, MATA VASHINO DEVI, TARAKOT MARG, HIMKOTI MARG )

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